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कृषि कानूनों की वापसी पर महुआ मोइत्रा का BJP पर तंज- क्या यूपी हारने का डर है?…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्र द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस ले लिया है. उन्होंने लंबे समय से चल रहे इसके विरोध को लेकर कहा कि हम किसानों को समझा नहीं पाए. पीएम मोदी के इस ऐलान के बाद से ही विपक्षी दलों की ओर से तंज आना शुरू हो गए हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि ‘हर एक किसान को मेरी हार्दिक बधाई, जिसने अथक संघर्ष किया और उस क्रूरता से विचलित नहीं हुए, जो भाजपा ने आपके साथ की. यह आपकी जीत है! इस लड़ाई में अपने प्रियजनों को खोने वाले सभी लोगों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है.

यहां टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने साल 2020 के ट्वीट को रिट्वीट किया जिसमें एक वीडियो में वे सरकार की ओर से राज्यसभा में कृषि कानूनों का विरोध और उसका टीवी टेलीकास्ट रोके जाने की बात कह रहे हैं. वहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने एक ट्वीट पर मोदी सरकार पर निशाना साधा, उन्होंने कहा- ‘यह यूपी में हार का डर है या आखिरकार बीजेपी को अक्ल आ गई. सरकार ने कृषि कानूनों को वापस ले लिया है. ये लोगों की आवाज के लिए कई और जीत की शुरुआत है.

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इधर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कानून वापसी के ऐलान के बाद एक ट्वीट में लिखा- ‘देश के अन्नदाता ने सत्याग्रह से अहंकार का सर झुका दिया. अन्याय के खिलाफ़ ये जीत मुबारक हो! जय हिंद, जय हिंद का किसान! इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा- ‘आज प्रकाश दिवस के दिन कितनी बड़ी ख़ुशख़बरी मिली. तीनों क़ानून रद्द. 700 से ज़्यादा किसान शहीद हो गए. उनकी शहादत अमर रहेगी. आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी कि किस तरह इस देश के किसानों ने अपनी जान की बाज़ी लगाकर किसानी और किसानों को बचाया था. मेरे देश के किसानों को मेरा नमन.

गौरतलब है, कि केंद्र द्वारा लाए गए इस कानून का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी फसल की निश्चित कीमत दिलवाना था. इन कानूनों के तहत कोई किसान फसल उगाने से पहले ही चाहे तो किसी व्यापारी से समझौता कर सकता था. इस समझौते में फसल की कीमत, फसल की क्वालिट, मात्रा और खाद से जुड़ी बातें शामिल होनी थीं.

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इसके अनुसार किसान को फसल की डिलिवरी के समय ही दो तिहाई राशि का भुगतान किया जाता और बचा हुआ पैसा 30 दिन में देना होता. साथ ही खेत से फसल उठाने की जिम्मेदारी व्यापारी की होती. इसमें यदि कोई भी एक पक्ष समझौते को तोड़ देत तो उस पर जुर्माना लगाया जाता. सरकार का कहना है कि यह कानून कृषि उत्पादों की बिक्री, कृषि बिजनेस फर्मों, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ किसानों को जुड़ने के लिए जागरुक करता.

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सोर्स – aajtak.in


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