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CSD बिपिन रावत के निधन पर राजकीय शोक क्यों नहीं? निशाने पर क्यों योगी सरकार?

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CSD Bipin Rawat Death : देश के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) का बुधवार को कुन्नूर में हुए हेलिकॉप्टर क्रैश में निधन हो गया। हादसे में उनके साथ उनकी पत्नी मधुलिका रावत (Madhulika Rawat) और 11 अन्य सैन्यकर्मियों का निधन हुआ है। जनरल बिपिन रावत के पार्थिव शरीर को दिल्ली लाया जा रहा है, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा। अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, केंद्रीय कैबिनेट, दिल्ली के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के शामिल होने की सूचना है। इस बीच जनरल बिपिन रावत जैसी शख्सियत के निधन पर कोई राजकीय शोक न घोषित किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में यह जानना दिलचस्प होगा कि राजकीय शोक कब घोषित किया जाता है।

अभी तक बिपिन रावत के गृह राज्य उत्तराखंड ने ही तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। प्रदेश में नौ से 11 दिसंबर तक तीन दिनों का राजकीय शोक रहेगा। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के मूल निवासी बिपिन रावत के निधन के चलते उत्तराखंड में चल रहा विधानसभा सत्र एक दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। विधानसभा का सत्र अब 9, 10 और 11 दिसंबर को चलेगा। 9 दिसंबर को विधानसभा में कोई कामकाज नहीं होगा। सीडीएस बिपिन रावत को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

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हालांकि नियम की बात करें, तो सेवारत और पूर्व प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रति और भारत के मुख्य न्यायाधीश ही देशव्यापी राष्ट्रीय शोक के हकदार हैं। मगर समय के साथ नियम बदलते गए। राजकीय शोक को लेकर लिखित रूप में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा गया है और न ही इसके लिए कोई SOP है। इसलिए यह सरकार के विवेकाधिकार पर है कि वह किसके निधन को राष्ट्रीय शोक की कैटिगरी में रखती है और देशव्यापी राष्ट्रीय शोक की घोषणा करती है।

राष्ट्रीय शोक और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार में अंतर होता है। कोई भी ऐसी शख्सियत जिसने राजनीति, प्रशासन, साहित्य, कानून, विज्ञान, कला और सिनेमा जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान दिया हो, उसके पार्थिव शरीर को तिरंगे से ढकने की अनुमति सरकार दे सकती है। इसके लिए मुख्यमंत्री अपनी कैबिनेट से सलाह मशविरा करने के बाद कोई फैसला ले सकता है। मदर टेरेसा, सत्य साईं बाबा, श्रीदेवी जैसे कुछ उदाहरण हमारे सामने है जिनका अपने क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

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केंद्र सरकार के 1997 के नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि राजकीय शवयात्रा के दौरान कोई सार्वजनिक छुट्टी जरूरी नहीं होती। इस नोटिफिकेशन के जरिए राष्ट्रीय शोक के दौरान अनिवार्य सार्वजनिक छुट्टी के प्रावधान को खत्म कर दिया गया। अब केवल किसी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की पद पर रहते हुए मौत हो जाने की परिस्थिति में ही सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की जा सकती है। हालांकि कई मौकों पर राज्य सरकारें किसी गणमान्य व्यक्ति की मौत पर छुट्टी की घोषणा करती रही हैं। केंद्र सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर आधे दिन का अवकाश घोषित किया था, लेकिन दिल्ली जैसे कई राज्यों ने पूरे दिन का अवकाश घोषित किया था।

सीडीएस बिपिन रावत के निधन के बाद राज्य में राजकीय शोक न घोषित करने को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी सोशल मीडिया पर निशाने पर है। लोग सवाल कर रहे हैं कि सरकार राजकीय शोक घोषित करने के लिए किस बात का इंतजार कर रही है। दरअसल योगी सरकार ने 12 जनवरी 2020 को ओमान के सुल्तान काबूस बिन सईद के निधन पर 13 जनवरी को उत्तर प्रदेश में एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया था। बिपिन रावत का तो जन्म भी अविभाजित उत्तर प्रदेश में हुआ था और उनकी गोरखा रेजिमेंट का भी उत्तर प्रदेश से विशेष नाता रहा है।

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सोर्स – navbharattimes.indiatimes.com.  CSD Bipin Rawat Death


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