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दिल्ली दंगों मैं कपिल मिश्रा के भाषण देते समय वीडियो में दिखे पुलिस अफसर ने भेजा राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार के लिए अपना नाम

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दिल्ली में पिछले साल सीएए-एनआरसी के मुद्दे को लेकर भड़के दंगों में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने जारी हैं। दंगों में सबसे ज्यादा प्रभावित पूर्वोत्तर दिल्ली रहा था, जहां तनाव उभरने से कुछ समय पहले ही भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने सीएए-एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन पर विवादास्पद भाषण दिया था। इस भाषण का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें एक पुलिस अफसर को मिश्रा के साथ खड़ा देखा गया था। बताया गया था कि वे पूर्वोत्तर दिल्ली के डीसीपी वेद प्रकाश सूर्या थे। अब उन्हीं वेद प्रकाश सूर्या ने इस साल वीरता के लिए दिए जाने वाले राष्ट्रपति पुलिस मेडल के लिए अपना नाम भेजा है।

बताया गया है कि सूर्या ने इस अवॉर्ड के लिए अपना नाम प्रस्तावित करने के लिए जो वजहें दी हैं, उसमें दिल्ली दंगों के दौरान सैकड़ों लोगों की जान बचाने के साथ संपत्ति के नुकसान को रोकने और दंगों में असाधारण प्रदर्शन जैसी बातें शामिल हैं। इतना ही नहीं सूर्या के साथ 25 अन्य पुलिसकर्मियों ने भी राष्ट्रपति पुलिस मेडल के लिए अपने नाम हेडक्वार्टर भेजे हैं। इनमें सूर्या के जेसीपी आलोक कुमार और उनके कई मातहत भी शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि इनमें से ज्यादातर ने दंगे रोकने के लिए अपनी भूमिका का ही जिक्र किया है।

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बता दें कि बहादुरी के लिए दिए जाने वाले राष्ट्रपति पुलिस मेडल को किसी की जान या संपत्ति को नुकसान से बचाने और अपराध को रोकने और अपराधियों को पकड़ने के लिए दिया जाता है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अलग-अलग जिलों से पुलिस हेडक्वार्टर में नामों के प्रस्ताव भेजे जाते हैं। यहां एक वरिष्ठ पुलिस अफसरों की कमेटी इन नामों पर विचार करती है और आखिर में दिल्ली के पुलिस कमिश्नर नामों पर मुहर लगाते हैं। इसके बाद फाइल केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजी जाती है।

सूत्रों का कहना है कि सूर्या ने कुछ दिन पहले ही इस अवॉर्ड के लिए आवेदन दिया था। उनके साथ 24 अन्य पुलिस अफसरों के आवेदन भी हेडक्वार्टर भेज दिए गए हैं। एक सूत्र ने बताया कि 23 पुलिसकर्मियों ने तो अपने लिए असाधारण कार्य पुरस्कार की मांग की है और 14 ने आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन मांगा है। बताया गया है कि सूर्या ने अपने आवेदन में तीन से चार दिन के अंदर दंगों को नियंत्रित करने का दावा किया है। उन्होंने सैकड़ों लोगों की जान बचाने की बहादुरी के बारे में भी बताया और कहा कि पत्थरबाजी के बावजूद वे लोगों की मदद से पीछे नहीं हटे।

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क्या था कपिल मिश्रा का बयान?: बता दें कि कपिल मिश्रा ने 23 फरवरी को दिल्ली के मौजपुर में विवादास्पद भाषण दिया था। इसे लेकर उनके खिलाफ लोगों को भड़काने और अराजकता फैलाने के आरोप लगे थे। दरअसल, कपिल मिश्रा ने पूर्वोत्तर दिल्ली के डीसीपी वेद प्रकाश सूर्या की मौजूदगी में ही दिल्ली पुलिस को खुलेआम चेतावनी दी थी और कहा था कि अगर तीन दिन में CAA के खिलाफ प्रदर्शनकारियों को रास्ते से नहीं हटाया गया तो वे लोग किसी की भी नहीं सुनेंगे। बताया जाता है कि मिश्रा के इस भाषण के बाद ही क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण हो गए थे।

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सोर्स – jansatta.com


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