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तेजस्वी यादव बोले- समान सोच वाली पार्टियां साथ आएं… विपक्ष का नेता तो बाद में भी चुन लेंगे

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2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन से RLSP और पूर्व सीएम मांझी की पार्टी HAM इसी बात पर अलग हुई थीं कि तेजस्वी गठबंधन में किसी की सुन नहीं रहे थे। मांझी-कुशवाहा ने बार-बार महागठबंधन के नेता पर आम राय बनाने की बात तक की थी। लगता है कि 2020 चुनाव से तेजस्वी ने अब सबक लिया है। अब तेजस्वी का कहना है कि पहले समान विचारधारा वाली सभी पार्टियां साथ आएं, विपक्ष का नेता बाद में भी चुन लिया जाएगा।

चिराग पासवान को साथ लेने के सवाल पर उनका कहना है कि यह चिराग पासवान पर निर्भर है कि वह अपने पिता की राजनीतिक विरासत को कैसे संजोना और बचाना चाहते हैं। प्रादेशिक और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर तेजस्वी यादव से एनबीटी के नैशनल पॉलिटिकल एडिटर नदीम ने बातचीत की। प्रस्तुत हैं मुख्य अंश :

सवाल- बिहार के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को आप किस रूप में देखते हैं?
हम कह सकते हैं कि भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है। खींचतान और सत्तालोलुपता से बिहार का नुकसान हो रहा है। अब सत्तासीन दलों के विधायक, मंत्री भी जनता की नब्ज को समझकर विद्रोह करने की तैयारी में हैं। पिछले दिनों सरकार के ही एक मंत्री ने भ्रष्टाचार और बेलगाम अफसरशाही से तंग आकर इस्तीफा देने का ऐलान किया। कोरोना की दूसरी लहर में पूरी दुनिया ने देखा कि कैसे राज्य सरकार ने जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया।

सवाल- चिराग पासवान से आपकी नजदीकी बढ़ने की बात कही जा रही है। क्या चिराग को आप अपने गठबंधन में लेना चाहेंगे?
रामविलास पासवान जी से हम लोगों का दशकों पुराना पारिवारिक संबंध रहा है। कुछ कालखंडों को छोड़ लालू जी और रामविलास जी ने एक साथ राजनीति भी की है। उनकी मृत्यु के पश्चात जिस तरीके से बीजेपी और नीतीश जी ने विश्वासघात किया है, उससे हम सभी आहत हैं। सत्ता में बैठे लोग असंवैधानिक तरीके से देश को चलाना चाहते हैं। चिराग जी के पिताजी ने भी अपने लंबे राजनीतिक जीवन में अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। अब चिराग जी को तय करना है कि वह अपने पिता की विरासत को कैसे संजोना और आगे बढ़ाना चाहते हैं।

सवाल-वैसे एलजेपी की टूट का बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ने की संभावना है?
एलजेपी को तोड़ने के अनैतिक कार्य में जो लोग या पार्टियां संलिप्त हैं, उनके खिलाफ आक्रोश का माहौल है। जनता समझ चुकी है कि नीतीश जी और मोदी-शाह की जोड़ी को सिर्फ सत्ता की भूख है और इसकी प्राप्ति के लिए वे लोग किसी हद तक जा सकते हैं। बीजेपी- जेडीयू के साथ जो छोटे दल सरकार में शामिल हैं, वे पहले तो सिर्फ अपनी उपेक्षा से पीड़ित थे, अब वे अपने दल के भविष्य को लेकर आशंकित हैं।

सवाल-आप पर एक बड़ा आरोप यह है कि बिहार को जब आपकी जरूरत होती है, तब आप वहां होते ही नहीं हैं?
यह आरोप सत्ता में बैठे वे लोग लगा रहे हैं, जो अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने में असफल रहे हैं। मुख्यमंत्री कोरोना काल में खुद 143 दिनों तक अपने आवास से बाहर नहीं निकले। साथ ही आदेश निकाल दिया कि कोई जनप्रतिनिधि भी घर से बाहर नहीं निकलेगा। हम जनता की सेवा के लिए निकले तो हम पर आधे दर्जन केस लाद दिए। विपक्ष का नेता होने के नाते जनता मुझसे जो अपेक्षा करती है, मैं उसको पूरा कर रहा हूं। सभी को मालूम है कि मेरे पिता बीमार हैं। इसी सिलसिले में मैं दिल्ली में था। एक नेता होने के साथ साथ मैं बेटा भी हूं। सभी माता-पिता चाहते हैं कि विषम परिस्थितियों में उनकी संतान साथ रहे। उनकी सेवा करना भी मेरा धर्म है।

सवाल-राष्ट्रीय राजनीति की बात की जाए तो 2024 के मद्देनजर आप विपक्ष को कितना तैयार देखते हैं?
मोदी सरकार की लगभग सभी नीतियां जनविरोधी और देशविरोधी हैं। संख्या बल की बदौलत सरकार तानाशाही कर रही है। पिछले सात साल में मोदी सरकार ने अपने चुनावी वादों को जुमला साबित करने के अलावा कोई बड़ा कार्य नहीं किया है। इन्हीं मुद्दों को लेकर हम तमाम विपक्षी दल जनता के बीच और उनके साथ खड़े हैं। 2024 में निश्चित रूप से गैर बीजेपी सरकार बनेगी।

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सोर्स – navbharattimes.indiatimes.com


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