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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- आर्य समाज की ओर से जारी विवाह प्रमाण पत्र कानूनी नही माना जायेगा

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सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने शुक्रवार, ३ जून को आर्य समाज की ओर से जारी विवाह प्रमाण पत्र को कानूनी मान्यता देने से इंकार कर दिया. जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि आर्य समाज का काम और अधिकार क्षेत्र विवाह प्रमाणपत्र जारी करना नहीं है.

विवाह प्रमाणपत्र जारी करने का ये काम तो सक्षम प्राधिकरण ही करते हैं. ऐसे में उसके सामने असली प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाए. आज तक से जुड़े संजय शर्मा के मुताबिक ये मामला प्रेम विवाह का है.

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लड़की के घरवालों ने नाबालिग बताते हुए अपनी लड़की के अपहरण और रेप की एफआईआर दर्ज करा रखी थी. लड़की के घरवालों ने युवक के खिलाफ IPC की धारा 363, 366, 384, 376(2) (n) के साथ-साथ 384 और पॉक्सो एक्ट की धारा 5(L)/6 के तहत मामला दर्ज करवाया था.

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इस मामले में युवक का कहना था कि लड़की बालिग है और उसने अपनी मर्जी से विवाह करने का फैसला किया है. युवक के मुताबिक उन दोनों ने आर्य समाज मंदिर में विवाह किया.

दोनों ने मध्य भारतीय आर्य प्रतिनिधि सभा की ओर से जारी विवाह प्रमाण पत्र भी कोर्ट के सामने पेश किया. और कोर्ट से शादी को मान्यता देने की मांग की. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसे मानने से इंकार कर दिया.

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सोर्स – thelallantop.com


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