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सांप्रदायिक हिंसा पर ऐसा कुछ बोल गए रघुराम राजन की भड़क उठे उन्मादी, पढ़ें विस्तार से…

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आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के एक बयान की सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। राजन ने कहा है कि अगर दुनिया में भारत की छवि अल्पसंख्यक विरोधी देश के रूप में उभरती है तो प्रोडक्ट्स बनाने वाली भारतीय कंपनियों को नुकसान हो सकता है। हाल के कुछ हफ्तों में भारत में कई जगहों पर सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुई हैं। जहांगीरपुरी में शोभायात्रा के दौरान पथराव और आगजनी हुई तो सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर की कार्रवाई पर रोक लगा दी। ऐसे वक्त में राजन ने आगाह किया है कि एंटी-माइनॉरिटी इमेज भारत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। सोशल मीडिया पर लोग भड़क गए हैं। कुछ लोग उन्हें असफल गवर्नर बता रहे हैं तो कुछ लोग उनके बयान पर स्क्रीनशॉट शेयर कर रहे हैं। लोग क्या कह रहे हैं, इससे पहले पढ़िए कि पूर्व गवर्नर ने अल्पसंख्यकों के बारे में क्या कहा।

टाइम्स नेटवर्क के इंडिया इकनॉमिक कॉनक्लेव में बोलते हुए राजन ने कहा कि जनता का पर्सेप्शन काफी महत्वपूर्ण होता है। कुछ हद तक मुझे लगता है कि हमें काफी सावधानी बरतनी चाहिए। यूके में हमने देखा कि कैसे इन्फोसिस को परेशानी का सामना करना पड़ा। यह राजनीतिक था क्योंकि वह रूस में लगातार बिजनस कर रही थी। दरअसल, भारतीय सॉफ्टवेयर सेवा कंपनी इन्फोसिस के कारण ब्रिटेन के वित्त मंत्री ऋषि सुनक की भी मुश्किलें बढ़ गई थीं। इस कंपनी में सुनक की पत्नी अक्षता मूर्ति की हिस्सेदारी है। उनसे रूस के साथ संबंधों पर सवाल हुए। उनसे कहा गया जो सलाह दूसरों को दी जा रही है उसका पालन घर में क्यों नहीं हो रहा है। राजन ने इसी मसले का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये चीजें काफी तेजी से प्रसारित होती है।

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उन्होंने कहा कि ऐसे में जनता का पर्सेप्शन ये बनता है कि जो हमारे हिसाब से काम नहीं कर रहा है उसे हम दंड देंगे। अगर हमारी छवि ऐसे लोकतांत्रिक देश की बनती है जहां सभी नागरिकों के साथ समान रूप से व्यवहार किया जाता है तो हमारे प्रति लोगों की सहानुभूति बढ़ेगी। लोगों के मन में ऐसे भाव आते हैं कि हम यह चीज उस देश से खरीद रहे हैं जो सही दिशा में बढ़ रहा है और इस तरह से हमारा मार्केट बढ़ता है। राजन आगे कहते हैं कि दूसरी तरफ अगर लोगों को लगता है कि देश में तानाशाही है और यह देश अपने अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करता है और आप रोज यही देखते और पढ़ते हैं। यह न केवल न्यूयॉर्क टाइम्स और द इकॉनमिस्ट में… कई तरह से। आपको पता चलता है कि कितनी मौतें हुईं, इसके भी आंकड़े देश छिपा रहा है तो लोग इससे नाराज हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के बड़े निवेशक देश को विश्वसनीय भागीदार के रूप में नहीं देखेंगे।

लोग राजन के बयान की आलोचना कर रहे हैं। प्रशांत लिखते हैं, ‘इसका मतलब सुब्रमण्यम स्वामी शुरुआत से ही सही थे। उनकी रुचि भारत विरोधी है। क्या वह आरबीआई गवर्नर के तौर पर हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे थे? स्वामी का शुक्रिया, उन्होंने बीजेपी में बिना किसी के सपोर्ट के लड़ाई लड़ी जिससे राजन को गवर्नर के तौर पर दूसरा कार्यकाल न मिले।

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कुछ विपक्षी दलों ने भी रघुराम राजन के बयान को ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है। कपिल शर्मा @kapilsh41168854 कहते हैं कि तो क्या करें दंगाइयों और पत्थरबाजों को छोड़ दें? Dr. Deep Chatterjee लिखते हैं कि रघुराम राजन कांग्रेसियों के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। दिवाकर शर्मा ने कहा कि रघुराम राजन अब भी भ्रम में हैं कि उनकी बातों को भारत में महत्व मिलता है। एजेंडे के पीछे चलते हैं, तथ्य से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं रहता।

संतोष कुमार सक्सेना लिखते हैं कि किसी भी दल की सत्ता रही हो, अल्पसंख्यक या अन्य वर्ग मुफ्त राशन और अन्य सुविधाएं बराबर पाता आया है। लेखकर सानु संक्रांत लिखते हैं कि ऐसा लगता है कि इस झूठे नैरेटिव कि ‘अल्पसंख्यक खतरे में हैं’ के लिए पूरा ईकोसिस्टम ऐक्टिव हो गया है।

अभिषेक ने एक लाइन में ट्वीट किया कि भारत में दो लोग प्रशांत किशोर और रघुराम राजन ओवररेटेड हैं। बीजेपी नेता और आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने भी राजन के बयान पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन उस मानसिकता और पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसने पिछले आठ वर्षों से हर मौके पर भारत के विकास पथ को बाधित करने की कोशिश की है।

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सोर्स – navbharattimes.indiatimes.com


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