NDTV को चलाने पर बोले गौतम अडानी- मैनेजमेंट और संपादकीय में हमेशा एक लक्ष्मण रेखा रहेगी

NDTV को चलाने पर बोले गौतम अडानी- मैनेजमेंट और संपादकीय में हमेशा एक लक्ष्मण रेखा रहेगी
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इंडिया टुडे मैगजीन ने दुनिया के तीसरे और भारत के सबसे अमीर शख्स गौतम अडानी (Gautam Adani) को ‘न्यूज मेकर ऑफ द ईयर’ घोषित किया है. इसके तहत इंडिया टुडे ग्रुप के एडिटोरियल डायरेक्टर (पब्लिशिंग) राज चेंगप्पा ने गौतम अडानी से खास बातचीत की. इस इंटरव्यू में गौतम अडानी से NDTV से भी जुड़े सवाल पूछे गए. अडानी ग्रुप ने हाल ही में NDTV का टेकओवर किया है. उनसे पूछा गया कि क्या आप NDTV में भी अपने बाकी उद्योगों की तरह हस्तक्षेप नहीं करेंगे? आप संपादकीय आजादी को कैसे तय करेंगे?

इस सवाल के जवाब में गौतम अडानी ने कहा कि मैं आपको बताना चाहूंगा की एनडीटीवी विश्वसनीय, स्वतंत्र और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क रहेगा. मैनेजमेंट और संपादकीय में हमेशा एक लक्ष्मण रेखा रहेगी. हम चाहें तो इस पर लंबी बहस कर सकते हैं. जैसा कई और कर रहे हैं, लेकिन मेरा कहना है कि वक्त के साथ ये साफ हो जाएगा. तो हमें थोड़ा वक्त दें.

अडानी ग्रुप के पास NDTV की 37.44 फीसदी हिस्सेदारी है. इसके अलावा NDTV के प्रमोटर प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने भी अधिकांश हिस्सेदारी अडानी ग्रुप को ही बेचने का फैसला किया है. दोनों के पास कुल 32.26 फीसदी की हिस्सेदारी है. इसमें से वो 27.26 फीसदी की हिस्सेदारी अडानी ग्रुप को बेचने वाले हैं. इस तरह NDTV में अडानी ग्रुप की हिस्सेदारी 64.71 फीसदी हो जाएगी.

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गौतम अडानी ने कहा कि हमारे लिए 2022 कई वजहों से खास था. हमारा अडानी विल्मर का IPO सफल रहा और इसके साथ अडानी विल्मर हमारे समूह की सातवीं लिस्टेड कंपनी बन गई है. उन्होंने कहा कि हम बिजनेस मॉडल के तहत कंपनी को शुरू करते हैं, फिर कंपनी को मुनाफे के लायक बनाते हैं, और तब जाकर उसे शेयर बाजार में लिस्ट कराते हैं. ये आईपीओ भी उसी का उदाहरण है.

गौतम अडानी ने साल 1988 में कमोडिटी का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट करने वाली कंपनी के रूप में अडानी एक्सपोर्ट्स की शुरुआत की, जिसका बाद में नाम बदलकर अडानी एंटरप्राइजेज कर दिया गया था. अडानी एक्सपोर्ट्स की स्थापना सिर्फ 5 लाख रुपये की पूंजी से की गई थी. अडानी एंटरप्राइजेज 1994 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी.

महज 5 लाख रुपये से अपनी पहली कंपनी शुरू करने वाले अडानी करीब दो दशक में कारोबार जगत के सरताज बन गए. खासकर पिछले 5 से 7 साल में अडानी ग्रुप का कारोबार तेजी से फैला है. साल 1995 का साल गौतम अडानी के लिए बेहद सफल साबित हुआ, जब उनकी कंपनी को मुंद्रा पोर्ट (Mundra Port) के संचालन का कॉन्ट्रैक्ट मिला.

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