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नवजोत सिंह सिद्धू बोले- ईंट से ईंट बजा दूंगा…दिखावे का घोड़ा नहीं…

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पंजाब में कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने बुधवार को एक ऐलान किया। यह ऐलान था कि पार्टी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ेगी। इस ऐलान के बाद अमरिंदर का हौसला और बढ़ा है। हालांकि सिद्धू और अमरिंदर के खेमे में फिर खींचतान शुरू हो गई है।

अमरिंदर के साथ अपने बढ़ते झगड़े के बीच सिद्धू की पार्टी आलाकमान से भी ठन गई। कहा जा रहा है कि हरीश रावत ने सिद्धू को कश्मीर और पाकिस्तान पर उनके विवादास्पद बयानों के लिए अपने सलाहकार प्यारे लाल गर्ग और मलविंदर सिंह माली को बर्खास्त करने के लिए कहा।

अमृतसर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सिद्धू ने कहा, ‘मैंने (पार्टी) आलाकमान से सिर्फ एक ही बात कही है। अगर मैं लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करता हूं और पंजाब मॉडल को लागू करता हूं, तो मैं अगले 20 वर्षों तक कांग्रेस को राजनीति में हारने नहीं दूंगा। लेकिन अगर आप मुझे निर्णय लेने नहीं देते हैं, तो ‘मैं ईंट से ईंट बजा दूंगा’…. क्योंकि दर्शनी घोड़ा होने का कोई फायदा नहीं है।

सिद्धू की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए रावत ने मीडियाकर्मियों से कहा कि कांग्रेस की परंपराओं और पार्टी के संविधान की सीमा के भीतर, सिद्धू को पहले से ही निर्णय लेने की स्वतंत्रता है। ‘मैं मीडिया की अटकलों के आधार पर उनसे सवाल नहीं कर सकता… मैं बयान का संदर्भ देखूंगा। बात कहने का उनका अपना अंदाज होता है। वह पार्टी प्रमुख हैं, उनके अलावा कौन निर्णय ले सकता है?

शुक्रवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करने वाले रावत ने संवाददाताओं से कहा, ‘मैंने उन्हें ताजा स्थिति से अवगत करा दिया है। मैंने उससे कहा है कि सभी पक्ष उसके निर्देशों का पालन करेंगे। कुछ समस्याएं आई हैं, लेकिन हम उनका समाधान करने की कोशिश कर रहे हैं। चीजें नियंत्रण में हैं… दो-तीन समूह हैं और हम उम्मीद करते हैं कि वे एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करेंगे और एक साथ काम करेंगे। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री, पीपीसीसी प्रमुख या मंत्री एक-दूसरे का सम्मान करेंगे और मिलकर काम करेंगे।

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रावत ने कहा, ‘विधायकों और अन्य लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार के भीतर अपनी बात व्यक्त करना है। लेकिन मुद्दों पर फैसला कांग्रेस अध्यक्ष को करना है। बार-बार पंजाब कांग्रेस में सभी ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष का फैसला सभी को मंजूर होगा। जो विधायक मुझसे मिलने आए थे, उन्होंने भी यही बात बताई थी।’ कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा सहित अमरिंदर के विरोधियों का एक समूह दिल्ली पहुंचा लेकिन सोनिया से नहीं मिल सका।

इस बीच अमरिंदर ने गुरुवार को अपने वफादार, पंजाब मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी के घर पर रात्रिभोज का आयोजन किया, जिसमें दावा किया गया कि 55 विधायक और आठ सांसद मौजूद थे। यह तब हुआ जब चार कैबिनेट मंत्रियों ने विधायकों के एक समूह के साथ बैठक करके घोषणा की गई कि उनका सीएम पर से विश्वास उठ गया है।

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सोर्स – navbharattimes.indiatimes.com


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