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कांग्रेस नेता बोले- ताजमहल और कुतुब मीनार हिंदुओं को सौंप दे मोदी सरकार

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उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर की चर्चा पूरे देश में हो रही है. सबकी निगाह सर्वे के बाद की रिपोर्ट पर है. वीडियोग्राफी-सर्वे कार्य के लिए नियुक्त आयोग इससे जुड़ी रिपोर्ट पेश करने के लिए कोर्ट से दो-तीन दिन का अतिरिक्त समय मांगेगा. इस बीच मामले को लेकर कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम का बयान सामने आया है.

कांग्रेस के चर्चित नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने ज्ञानवापी विवाद पर कहा है कि ये आस्था और भारत की जन भावनाओं से जुड़ा मामला है. यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन सवाल यह है कि शिवलिंग को अब तक क्यों छिपाकर रखा गया और किसने छिपाया? टीवी न्‍यूज चैनल आजतक से बात करते हुए आगे कांग्रेस नेता ने कहा कि कुतुब मीनार और ताजमहल भारत सरकार के अधीन है, किसी धर्म से जुड़े हुए नहीं हैं. भारत सरकार को चाहिए कि वह ताजमहल और कुतुब मीनार हिंदुओं को सौंपने का काम करे, हम राष्ट्र और देश के साथ हैं.

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सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह ने ने कहा कि कोर्ट के आदेश के अनुसार, 14 से 16 मई के बीच सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वीडियोग्राफी-सर्वे कार्य किया गया। 17 मई को सर्वे से संबंधित रिपोर्ट अदालत में पेश की जानी थी. हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि हम आज (मंगलवार) अदालत में रिपोर्ट नहीं जमा कर रहे हैं, क्योंकि यह तैयार नहीं है. हम अदालत से दो-तीन दिन का अतिरिक्त समय मांगेंगे. कोर्ट जो भी समय देगी, हम उसमें रिपोर्ट पेश करेंगे.

आपको बता दें कि इससे पहले, हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने सोमवार को दावा किया था कि अदालत द्वारा अनिवार्य वीडियोग्राफी-सर्वे कार्य के दौरान मस्जिद परिसर में एक शिवलिंग पाया गया है. एक स्थानीय कोर्ट ने सोमवार को हिंदू पक्ष की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के उस हिस्से को सील करने का आदेश दिया था, जहां कथित तौर पर शिवलिंग मिलने का दावा किया गया है.

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उधर, ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करने वाली कमेटी के एक सदस्य ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा था, मुगल काल की मस्जिदों में वजू खाने के अंदर फव्वारा लगाए जाने की परंपरा रही है. उसी का एक पत्थर आज सर्वे में मिला है, जिसे शिवलिंग बताया जा रहा है. अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव सैयद मोहम्मद यासीन ने आरोप लगाया था कि सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर द्वारा आदेश जारी करने से पहले मस्जिद प्रबंधन का पक्ष नहीं सुना गया.

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सोर्स – prabhatkhabar.com


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