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जेल में नींबू घोटाला, 200 रु. प्रति किलो के हिसाब से आधा क्विंटल मंगवाए, कैदी बोले- कभी नहीं खाए

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अब तक जिस नींबू को आसमान छूती कीमतों के कारण आम आदमी खरीदने से गुरेज करता रहा, उसे 200 रुपये किलो के भाव से कपूरथला माडर्न जेल के कैदियों को खिलाया गया है। जेल सुपरिंटेंडेंट के आदेश पर गर्मी में कैदियों को आधा क्विंटल नींबू खिलाए गए। हालांकि ऐसा करना उन्हें भारी पड़ गया है। जेल मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने निरीक्षण के बाद कपूरथला जेल अधीक्षक गुरनाम लाल को निलंबित कर दिया है। इस दौरान गबन और कुप्रबंधन सहित कई अनियमिताएं भा सामने आई हैं।

कपूरथला से आठ किलोमीटर दूर स्थित थेह काजला में जालंधर व कपूरथला जिलों के लिए बनी केंद्रीय माडर्न जेल के अधीक्षक ने अप्रैल में 50 किलोग्राम नींबू की खरीद दिखाई थी। उस समय नींबू की कीमतें 200 रुपये किलो से ऊपर मंडरा रही थीं। दूसरी ओर से कैदियों ने दावा किया है कि रसोई में नींबू का कभी इस्तेमाल किया ही नहीं गया। जेल मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कपूरथला जेल अधीक्षक गुरनाम लाल को कुप्रबंधन और कैदियों के लिए कथित तौर पर राशन की हेराफेरी के लिए निलंबित करने का आदेश दिया है।

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जेल अधिकारी ने अन्य अनियमिताओं के बीच, 50 किलोग्राम नींबू की खरीद दिखाई थी जबकि कैदियों ने दावा किया था कि नींबू जेल की रसोई में कभी इस्तेमाल नहीं किया गया था। इस नींबू की खरीद को 15 से 30 अप्रैल के बीच दिखाया गया था, उस समय नींबू की कीमतें 200 प्रति किलोग्राम से उपर चल रही थी।

कैदियों की कई शिकायतों के बाद एडीजीपी (जेल) वीरिंदर कुमार ने एक मई को जेल में औचक निरीक्षण करने के लिए एक डीआईजी (जेल) और लेखा अधिकारी को भेजा था। जांच पैनल ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि कैदियों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता खराब थी और जेल नियमावली में तय की गई मात्रा पर्याप्त नहीं थी। उदाहरण के लिए प्रत्येक चपाती का वजन 50 ग्राम से कम था, जिससे संकेत मिलता था कि कई क्विंटल आटे का भी गबन किया गया था।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि जेल अधिकारी की तरफ से सब्जियों की खरीद में भी गड़बड़ी की गई है। जेल अधीक्षक ने पांच दिनों के लिए सब्जियां खरीदी दिखाई लेकिन कैदी कम दिनों के लिए सब्जियां खरीदने का दावा कर रहे हैं।

रिपोर्ट में दवा की अनुपलब्धता, परिसर के खराब रखरखाव और कनिष्ठ अधिकारियों पर नियंत्रण की कमी का भी उल्लेख किया गया है। आकस्मिक जांच में पता चला कि जेल अधीक्षक का जेल प्रशासन पर नियमावली के अनुसार पूर्ण नियंत्रण नहीं था। अधिकारी को जेल में कुप्रबंधन और धन के उपयोग में गबन की प्रारंभिक रिपोर्टों के अलावा, अपने कर्तव्यों और जेल प्रशासन के प्रति भी लापरवाह पाया गया है। सूत्रों का कहना है कि गुरनाम लाल जो पंजाब जेल विभाग में प्रतिनियुक्ति पर बीएसएफ के अधिकारी हैं उनके खिलाफ भी इस चूक के लिए आरोप पत्र दायर किया जाएगा।

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सोर्स – jagran.com


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