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JNU की वीसी बोली- कोई देवता ब्राह्मण नहीं, शिव दलित या आदिवासी

20220823 121026 min
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर प्रोफेसर शांतिश्री धुलिपुडी पंडित ने कहा है कि हिंदुओं के कोई भी देवता अगड़ी जातियों के नहीं हैं. उन्होंने भगवान शिव के दलित या आदिवासी होने का दावा किया है. उन्होंने भगवान जगन्नाथ के भी आदिवासी होने की बात कही है.

जेएनयू की वीसी का यह बयान आज के लगभग सभी अख़बारों में प्रमुखता से छपा है. अंग्रेज़ी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने भी इस बयान को अपने पहले पन्ने पर छापा है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उन्होंने कहा, ”आप में से अधिकांश को हमारे देवताओं की उत्पत्ति को मानवशास्त्र या वैज्ञानिक लिहाज से समझना चाहिए. कोई भी देवता ब्राह्मण नहीं हैं. सबसे ऊंचा क्षत्रिय है. भगवान शिव एससी या एसटी समुदाय के होंगे, क्योंकि वे श्मशान में गले में सांप डालकर बैठते हैं. उनके पास पहनने के लिए कपड़े भी बहुत कम हैं. मुझे नहीं लगता कि ब्राह्मण श्मशान में बैठ सकते हैं.

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उन्होंने आगे कहा, ”लक्ष्मी, शक्ति या यहां तक कि भगवान जगन्नाथ भी मानवविज्ञान के लिहाज से अगड़ी जाति के नहीं हैं. भगवान जगन्नाथ आदिवासी समुदाय के हैं. नवभारत टाइम्स के अनुसार उन्होंने कहा कि जब चीज़ें ऐसी हैं तो हम अभी भी जातियों को लेकर भेदभावों को क्यों बनाए हुए हैं, जबकि ये बहुत ही अमानवीय है.

शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने ये बातें दिल्ली में केंद्रीय सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्रालय की ओर से आयोजित बीआर आंबेडकर लेक्चर सिरीज़ के दौरान कही हैं. वे ‘जेंडर जस्टिस पर डॉ बीआर आंबेडकर के विचारः समान नागरिक संहिता की व्याख्या’ विषय पर बोल रही थीं. वहीं हिंदी दैनिक अमर उजाला के अनुसार, महिलाओं के बारे में उन्होंने कहा कि ”मैं सभी महिलाओं को बता दूं कि मनुस्मृति के अनुसार सभी महिलाएं शूद्र हैं, इसलिए कोई भी महिला ये दावा नहीं कर सकतीं कि वे ब्राह्मण या कुछ और हैं. आपको जाति केवल पिता या विवाह के ज़रिए पति से मिलती है. मुझे लगता है कि ये पीछे ले जाने वाला विचार है.

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महिलाओं के लिए आरक्षण की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि अधिकतर लोग इसके पक्ष में होंगे. उनके अनुसार, आज भी देश के 54 विश्वविद्यालयों मे से केवल 6 में महिला कुलपति हैं. जेएनयू की वीसी ने कहा है कि जेंडर जस्टिस के प्रति सबसे बड़ा सम्मान यह होगा कि हम बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की महत्वाकांक्षा के अनुरूप समान नागरिक संहिता को लागू करें.

उन्होंने कहा कि जब गोवा में यह क़ानून सभी धर्मो के लिए लागू हो सकता है जिसे पुर्तगालियों ने लागू किया था, तो बाक़ी देश में इसे क्यों नहीं लागू किया जा सकता. उन्होंने कहा, ”गोवा में समान नागरिक संहिता है जो पुर्तगालियों द्वारा लागू की गई थी, इसलिए वहां हिंदू, ईसाई और बौद्ध सभी ने इसे स्वीकार किया है, तो ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा.

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