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एक वक़्त योगी को गिरफ्तार करने वाले IPS अब तक हैं निलंबित, पूर्व IPS ने तंज कसते हुवे कही ये बात

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पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने आईपीएस जसवीर सिंह के निलंबन के बहाने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। अमिताभ ठाकुर ने आरोप लगाया है कि जसवीर सिंह ने महाराजगंज का एसपी रहते हुए योगी आदित्यनाथ पर एनएसए लगाने की सिफारिश की थी। इसी के चलते वे निलंबित चल रहे हैं।

उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए एक ट्वीट में लिखा, ‘इस IPS अफसर जसवीर सिंह को योगी आदित्यनाथ ने कायर अफसरों का इस्तेमाल करते हुए पिछले ढाई साल से बेहद सतही आरोपों में मात्र इस कारण निलंबित रखा है क्योंकि इसने किसी समय SP महाराजगंज रहते एविडेंस के आधार पर आदित्यनाथ पर NSA की संस्तुति की थी। यह है उनके “ठोक डालो” की हकीकत !आपको बता दें कि जसवीर सिंह को यूपी सरकार ने 14 फरवरी 2019 को निलंबित कर दिया था। इसके पीछे विवादास्पद बयान देने और अनाधिकृत रूप से ड्यूटी से गायब रहना वजह बताई गई थी।

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कौन हैं जसवीर सिंह- पंजाब, होशियारपुर के रहने वाले जसवीर सिंह 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनकी गिनती साफ़ सुथरी छवि वाले अधिकारियों में होती है। कहा जाता है कि चाहे वो किसी भी पार्टी की सरकार हो, उन्होंने अपने काम में कभी समझौता नहीं किया। इसी कारण वो किसी भी जिले में 35 दिनों से ज्यादा नहीं टिके।

पुलिस अधीक्षक (SP) रहते हुए किया था योगी आदित्यनाथ को गिरफ्तार- साल 2002 में जसवीर सिंह महाराजगंज के एसपी पद पर तैनात थे। योगी आदित्यनाथ तब सांसद थे। उनके द्वारा बनाए गए संगठन, ‘हिंदू युवा वाहिनी’ पर महाराजगंज और गोरखपुर बॉर्डर के पास एक गांव में हिंसा फैलाने का आरोप लगा था। इसी मामले में जसवीर सिंह ने योगी आदित्यनाथ को गिरफ्तार कर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत उन पर कारवाई की। इसके दो दिन बाद ही मायावती की सरकार ने उनका ट्रांसफर कर दिया था।

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योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आते ही हुए साइडलाइन- जब योगी आदित्यनाथ की सरकार सत्ता में आई तब से जसवीर सिंह को साइडलाइन कर दिया गया। एक मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में जसवीर सिंह ने सरकार की एनकाउंटर नीति, अधिकारियों के ट्रांसफर और सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार उन्हें बिना काम के ही सैलरी दे रही है। सरकार विरोधी बयान देते हुए जसवीर सिंह ने कहा था कि नेता चाहते हैं अधिकारी उनके प्रति वफादार रहें जो संविधान के खिलाफ़ है।

सरकार ने उनके इन बयानों को सर्विस कंडक्ट रूल्स के विपरित मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया था और अब तक वो निलंबित हैं।

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सोर्स – jansatta.com


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