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अपने अंतिम क्षणों में भी इस तरह लड़े सिद्धू मूसेवाला, घायल दोस्त ने बया किया उस समय का हाल

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पंजाबी गाने की शूटिंग के दौरान खुद को दिलेर बताने वाले गायक सिद्धू मूसेवाला असल जिंदगी में भी दिलेरी से लड़े। अंतिम क्षणों में भी सिद्धू मूसेवाला ने हत्यारों का डटकर सामना किया। इस बात का खुलासा सिद्धू मूसेवाला के साथी और थार गाड़ी में सवार उनके दो करीबी दोस्तों ने लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में किया। बात करने के दौरान दोनों ने बताया कि सिद्धू मूसेवाला ने भी आरोपियों को सामने देख डरने के बजाय अपने लाइसेंसी हथियार से गोलियां चला दी थी लेकिन आरोपियों की संख्या ज्यादा थी और उनके पास आधुनिक हथियार थे। आरोपियों ने सिद्धू मूसेवाला की कार को चारों तरफ से घेर लिया था।

ताबड़तोड़ गोलियों ने गाड़ी और सिद्धू मूसेवाला के शरीर को भी छलनी कर दिया। यही वजह रही है कि सिद्धू मूसेवाला ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। शुभदीप सिंह उर्फ सिद्धू मूसेवाला के करीबी दोस्त गुरविंदर सिंह और गुरप्रीत सिंह का लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

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गुरविंदर सिंह पीछे बैठा था और गुरप्रीत सिंह सिद्धू मूसेवाला के बगल वाली सीट पर बैठा था। दोनों ने बताया कि सिद्धू मूसेवाला रिश्तेदार के यहां जा रहे थे। गाड़ी में पांच लोगों के बैठने की जगह नहीं थी। यही वजह है कि उसने अपने सुरक्षा कर्मियों को साथ नहीं बिठाया और दूसरी गाड़ी में आने को कहा।

गुरविंदर सिंह के अनुसार जैसे ही वह गांव से कुछ दूर पहुंचे तो सबसे पहले उनके पीछे से एक फायर हुआ और एक गाड़ी उनकी थार के आगे आकर रुक गई। पीछे वाली गोली उसके बाजू में जा लगी और वह नीचे झुक गया। तभी एक युवक ताबड़तोड़ फायर करते गाड़ी के सामने आया। गुरविंदर सिंह के अनुसार मूसेवाला ने भी अपने पिस्टल से दो जवाबी फायर भी किए। मगर सामने वाले हमलावर के पास ऑटोमैटिक गन होने के कारण वह लगातार फायरिंग करते रहे। जैसे ही सिद्धू मूसेवाला ने दो फायर किए तो हत्यारों ने तीनों तरफ से फायरिंग कर दी।

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गुरविंदर ने यह भी बताया है कि सिद्धू मूसेवाला ने एक बार गाड़ी को भगाने का प्रयास भी किया लेकिन उन्हें घेर लिया गया था। अगर वह गाड़ी भगाने में सफल हो जाता तो शायद जान बच जाती। इसके बाद सिद्धू मूसेवाला ने बिना डरे हत्यारों का मुकाबला किया और खुद भी गोलियां दागीं। दयानंद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने गुरविंदर के कंधे पर लगी गोली को निकाल दिया है और प्लस्टर चढ़ा दिया गया है। जबकि गुरप्रीत के शरीर में लगी तीन गोलियों को निकालने के लिए डॉक्टरों की एक टीम लगी हुई है और उसका उपचार किया जा रहा है।

दयानंद मेडिकल कॉलेज में पूरी तरह से पुलिस का सख्त पहरा है। घायलों के पास रिश्तेदारों के अलावा किसी को भी नहीं जाने दिया जा रहा है। पुलिस के आला अधिकारी बीच-बीच में दोनों घायलों से सवाल पूछने पहुंचते हैं और कुछ समय बाद चले जाते हैं। और यह सिलसिला लगातार जारी है।

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सोर्स – amarujala.com


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