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वरुण गांधी बोले- जनहित में बोलने से कौन रोकेगा मुझे, मैं किसी डर या निजी लाभ-हानि की दृष्टि से…

BJP MP Varun Gandhi Taunt On Government
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Varun Gandhi On Politics : इन दिनों बीजेपी के सांसद वरुण गांधी सुर्खियों में हैं। लगातार अपने बयानों के जरिए अपनी ही सरकार से सवाल कर रहे हैं। किसान आंदोलन की बात हो या युवाओं से जुड़े मसले, इनके सवालों ने सुर्खी तो बटोरी ही, अपनी सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। वरुण गांधी से विपक्ष को भी ताकत मिल रही है। उनके सवाल उठाने के पीछे क्या है उनकी मंशा, क्या वह पार्टी की किसी रणनीति के तहत ऐसा कर रहे हैं, भविष्य में उनका क्या सियासी रास्ता हो सकता है…

आजकल आप लगातार किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, एक स्वतंत्र आवाज के रूप में। इसे किस रूप में देखा जाए?
जनता ने मुझे अपने मुद्दे उठाने के लिए ही सांसद चुना है। यह मेरा लोकतांत्रिक कर्तव्य है कि मैं जनता के विषयों पर बोलूं। यदि जनता की समस्याओं को मैं नहीं उठाऊंगा तो फिर चुनाव लड़ने, सांसद बनने या राजनीति करने के कोई मायने नहीं हैं।

आपने कई ऐसे मुद्दे उठाए, जिनके बारे में कहा गया कि इससे आपकी ही पार्टी और सरकार असहज हुई। कोई खास मंशा थी आपकी?
मुद्दे पार्टी या सरकार की सुविधा देखकर या किसी को असहज करने के लिए नहीं उठाए जाते। साल भर से किसानों का देशव्यापी आंदोलन चल रहा था, वे सड़क पर बैठे हुए थे। 700 से ज्यादा किसान इसमें शहीद हो चुके थे। उनकी पीड़ा को समझना चाहिए था, इसीलिए मैंने उनकी बात की। हमें समझना होगा हमारे देश में लोकतंत्र है। किसान ने भी बीजेपी को वोट दिया था। इतने बड़े वर्ग की अवहेलना करके कोई भी पार्टी राजनीति में टिक नहीं सकती। अंत में किसानों की बात मानकर कानून वापस ले लिए गए। यह लोकतंत्र की विजय है। इससे लोकतंत्र और मजबूत हुआ है।

पार्टी लाइन से हटकर कुछ बोलने में आपको डर नहीं लगता है? आपका पार्टी नेतृत्व से कोई संवाद हुआ?
देखिए मैं किसी डर या व्यक्तिगत लाभ-हानि की दृष्टि से राजनीति नहीं करता। यदि जनसरोकार के मुद्दों को उठा नहीं सकता तो ऐसी राजनीति का कोई अर्थ नहीं है। जनता के हित में बोलता हूं तो कौन रोकेगा, कौन टोकेगा? पार्टी में संवाद तो होता रहता है। मेरे विचारों को मानने से पार्टी को लाभ ही होगा।

क्या पांच राज्यों के चुनावों में युवा, किसानों की नाराजगी या महंगाई का असर देखा जा सकता है?
जनता के मुद्दों का असर चुनाव पर पड़ता तो है परंतु केवल कुछ मुद्दों के आधार पर ही चुनाव में हार-जीत होती है यह कहना भी ठीक नहीं है। चुनाव में मतदाता बहुत सारी बातें ध्यान में रखकर वोट करते हैं। मुद्दों का असर तो पड़ेगा परंतु किस मुद्दे का कितना असर होगा, यह कहना बहुत मुश्किल है।

वैसे आपकी नजर में देश की तीन सबसे बड़ी समस्याएं क्या हैं?
किसानों को फसलों की उचित और लाभकारी कीमत नहीं मिल रही, लागत बढ़ रही है, खेती घाटे का सौदा बन चुकी है, अतः युवा खेती नहीं करना चाहते। दूसरे, बेरोजगारी बहुत बड़ी समस्या है। बेरोजगार युवाओं को उचित रोजगार उपलब्ध करवाना, उनकी ऊर्जा को सकारात्मक रूप से देशहित में उपयोग करना देश के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। तीसरे, अर्थव्यवस्था अलग-अलग कारणों से बहुत खराब स्थिति में है जिसका दुष्परिणाम महंगाई, बेरोजगारी आदि के रूप में सामने आ रहा है।

आपने किसानों के मसले पर एक किताब भी लिखी है। आपके हिसाब से तीनों कृषि कानूनों में कहां चूक रह गई?
इन कानूनों में कुछ ऐसे प्रावधान थे जिनके कारण मंडी व्यवस्था बर्बाद हो सकती थी, कृषि एवं जिंस व्यापार कुछ निजी कंपनियों के हाथों में सिमट सकता था। कालांतर में किसान और उपभोक्ता, दोनों का नुकसान होता और देश में रोटी बहुत महंगी हो जाती।

इन दिनों असल मुद्दों की जगह कई बार हेट या दूसरी चीजें अधिक हावी हो जा रही हैं। गिरते डिस्कोर्स पर आप क्या कहना चाहेंगे?
नकारात्मक विमर्श के लिए सभी जिम्मेदार हैं। सरकार, राजनीतिक दल, आम जनता और मीडिया- सबकी जिम्मेदारी है। इसे रोकना होगा। परंतु अभिव्यक्ति की आजादी भी प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

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सोर्स – navbharattimes.indiatimes.com.  Varun Gandhi On Politics


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