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अदालत से आए 4 धार्मिक विवादों से जुड़े फैसले- कहीं मुस्लिम पक्ष को झटका, कहीं हिंदू पक्ष को फटकार

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देश में आज चार जगहों पर धार्मिक स्थलों से जुड़े विवाद में सुनवाई हुई। वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे को लेकर कोर्ट के फैसले पर लोगों की नजरें थीं। दूसरी तरफ आगरा के ताजमहल में 22 कमरों को खुलवाने को लेकर भी याचिका पर सुनवाई हुई। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत को 4 महीने के भीतर संबंधित याचिकाओं को निपटाने का आदेश दिया। वहीं, मध्यप्रदेश के धार में भोजशाला विवाद को लेकर हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने हिंदू संगठन की याचिका को स्वीकार कर लिया। ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हाई कोर्ट से मुस्लिम पक्ष को झटका लगा। ताजमहल के 22 बंद दरवाजों को खोलने की मांग पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता बीजेपी नेता को जमकर फटकार लगाई। उन्हें ताजमहल के बारे में रिसर्च कर आने को कहा। इस तरह आज कहीं मुस्लिम पक्ष को झटका लगा तो कहीं हिंदू पक्ष को कोर्ट ने जमकर सुनाया। पढ़िए अदालत से आए आज चार फैसलों की पूरी कहानी।

ज्ञानवापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी मंदिर विवाद मामले में कोर्ट ने स्पष्ट फैसला दिया कि कोर्ट कमिश्नर को नहीं हटाया जाएगा। अदालत ने कहा कि 17 मई के पहले दोबारा सर्वे होगा। कोर्ट कमिश्नर के साथ दो और वकील होंगे। मुस्लिम पक्षकारों ने कोर्ट कमिश्नर को बदलने की मांग की थी, जिसे सिविल जज ने खारिज कर दिया। मस्ज़िद के अंदर सर्वे का मुस्लिम पक्ष ने विरोध किया था। इस आपत्ति को कोर्ट ने भी खारिज किया। इससे मुस्लिम पक्ष को झटका लगा है। फैसले से पहले कोर्ट को खाली करा लिया गया था। परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी। वादी पक्ष के एडवोकेट सुधीर त्रिपाठी ने कोर्ट कमिश्‍नर बदलने पर आपत्ति के साथ इस बात पर जोर दिया कि ज्ञानवापी मस्जिद के तहखाने में भी सर्वे और वीडियोग्राफी होनी चाहिए।

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कोर्ट ने फैसला दिया है कि कमिश्नर अजय मिश्रा नहीं बदले जाएंगे और साथ में ताला खोलकर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने 17 मई तक रिपोर्ट मांगी हैं। अगर कार्रवाई में कोई विरोध करता है तो उस पर FIR करने के आदेश दिए हैं। – -मदन मोहन यादव, ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के अधिवक्ता

ताजमहल के बंद कमरों को खोलने की याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि ताजमहल के बारे में रिसर्च करने के बाद ही याचिका डालें। कोर्ट ने याचिका डालने वाले अयोध्या बीजेपी नेता से कहा है कि पीआईएल को मजाक ना बनाएं। पहले पढ़ लें, ताजमहल कब और किसने बनवाया। जस्टिस डीके उपाध्याय ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि PIL व्यवस्था का दुरुपयोग ना करें। इसका मजाक ना बनाएं। ताजमहल किसने बनवाया, पहले जाकर रिसर्च करो। यूनिवर्सिटी जाओ, PhD करो तब कोर्ट आना। रिसर्च से कोई रोके तब हमारे पास आना। अब इतिहास को आपके मुताबिक नहीं पढ़ाया जाएगा। PIL व्यवस्था का दुरुपयोग ना करें। इसका मजाक ना बनाएं। ताजमहल किसने बनवाया पहले जाकर रिसर्च करो। यूनिवर्सिटी जाओ, PHD करो तब कोर्ट आना। रिसर्च से कोई रोके तब हमारे पास आना। अब इतिहास को आपके मुताबिक नहीं पढ़ाया जाएगा। – – जस्टिस डीके उपाध्याय

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मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा की अदालत को निर्देश देते हुए कहा कि मूल वाद से जुड़ी सभी अर्जियों को जल्द से जल्द निपटाएं। हाई कोर्ट ने इन सभी अर्जियों का अधिकतम 4 महीने में निपटारा करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य पक्षकारों के सुनवाई में शामिल ना होने पर एकपक्षीय आदेश जारी करने का निर्देश दिया। मथुरा की एक अदालत में श्री कृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ भूमि के स्वामित्व की मांग को लेकर याचिका दाखिल की गई है। पिछले सप्ताह मथुरा की जिला अदालत ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। श्रीकृष्ण जन्मभूमि में बनी शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की भी मांग बहुत पुरानी है। कोर्ट ने साल 2020 को मस्जिद को हटाने वाली याचिका खारिज कर दी थी।

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला विवाद अब कोर्ट तक पहुंच गया है। एमपी हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने इससे जुड़ी याचिका को स्वीकार कर लिया है। याचिका में कहा गया है कि भोजशाला सरस्वती मंदिर है, यहां मुस्लिमों को नमाज पढ़ने से रोका जाना चाहिए। हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने याचिका स्वीकार कर आठ लोगों को नोटिस जारी किया है। इसमें केंद्र सरकार भी शामिल है। धार स्थित भोजशाला का विवाद लंबे समय से चला आ रहा है।

हिंदुओं का दावा है कि भोजशाला सरस्वती का मंदिर है। दूसरी ओर मुस्लिम इसे कमाल मौलाना की दरगाह बताते हैं। मगर हर साल सरस्वती पूजा के अवसर पर दोनों समुदाय के लोग सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हैं। एक तरफ मां सरस्वती की पूजा होती है तो दूसरी तरफ अजान होती है। अब एक हिंदू संगठन हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में एक याचिका दायर की है।

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सोर्स – navbharattimes.indiatimes.com


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