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ज्ञानवापी में सर्वे के लिए नियुक्त टीम में कमिश्नर पद से हटाने पर अजय मिश्र बोले- मेरे साथ धोखा हुवा

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अजय कुमार मिश्र का कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया है जिससे कोर्ट की गोपनीयता भंग हो. उन्होंने कहा कि टीम के दूसरे कमिश्नर विशाल सिंह की शिकायत पर उन्हें हटाया गया है. विशाल सिंह ने शिकायत की थी कि अजय कुमार मिश्र के साथ एक फोटोग्राफर हैं जो बाहर सूचनाएं लीक कर रहे हैं.

अजय कुमार मिश्र का कहना है कि विशाल सिंह ने अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए मुझे नीचा दिखाया है. मुझे हटाए जाने का दुख नहीं है लेकिन जो विशाल सिंह ने मेरे साथ किया मुझे उसका अफसोस है. उन्होंने विशाल कुमार पर धोखा देने का आरोप लगाया. साथ ही कहा कि वे भले एडवोकेट कमिश्नर नहीं है लेकिन रिपोर्ट से जुड़ी जानकारी ना तो पहले उन्होंने लीक थी और ना ही वे अब किसी को बताएंगे जब तक रिपोर्ट कोर्ट में जमा नहीं हो जाती.

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शुरू में ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे करने के लिए सिर्फ अजय कुमार मिश्र को ही कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया था. इनकी निष्पक्षता को लेकर मस्जिद प्रबंधन ने सवाल उठाते हुए याचिका भी लगाई थी जिसमें अजय मिश्र को हटाने की मांग की गई थी. इस याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया था. लेकिन इस बार शिकायत साथ में काम करने वाले कमिश्नर विशाल सिंह ही कर रहे थे.

12 मई को वाराणसी कोर्ट के निर्देश के बाद बीते शनिवार को ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे की शुरुआत हुई थी जिसके बाद लगातार तीन दिनों तक मस्जिद में सर्वे हुआ. सोमवार को सर्वे के तीसरे और अंतिम दिन था. इस दिन कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश देते हुए उस जगह को संरक्षित करने को कहा जहां सर्वे टीम को कथित तौर पर ‘शिवलिंग’ मिला था.

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ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन संभालने वाले संगठन अंजुमन इंतेज़ामिया मसाजिद का कहना है कि “जिसे वो शिवलिंग कहते हैं, वो एक वज़ूखाने के बीच में लगा एक फव्वारा है. वो नीचे चौड़ा होता है और ऊपर से संकरा होता है. उसका आकार शिवलिंग जैसा होता है. उस फव्वारे को यह शिवलिंग कहते हैं और उसके आधार पर इन्होंने सारा बवाल खड़ा किया है.”

हालांकि अभी तक सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट में जमा नहीं की गई है. इस रिपोर्ट को जमा करने के लिए दो दिन का समय मांगा गया है जिसे कोर्ट ने मंज़ूर कर दिया है.

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सोर्स – hindi.news18.com


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