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किसान मोर्चा ने गुरनाम सिंह चढ़ूनी को किया सस्पेंड, जानें पूरा मामला…

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केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों (Farm Law) का विरोध कर रहे किसान संगठनों ने बुधवार को एक अहम फैसला लिया है. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) द्वारा हरियाणा के किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी (Gurnam Singh Charuni) को एक हफ्ते के लिए सस्पेंड कर दिया गया है. इस दौरान गुरनाम सिंह चढ़ूनी संयुक्त किसान मोर्चा के किसी मंच पर शामिल नहीं हो सकेंगे. ये फैसला तब लिया गया है जब बीते कुछ दिनों में गुरनाम द्वारा पंजाब विधानसभा चुनाव, किसान आंदोलन को लेकर विवादित बयान दिए गए थे.

संयुक्त किसान मोर्चा के बलबीर सिंह राजेवाल ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी, जिसमें उन्होंने कहा कि गुरनाम सिंह चढ़ूनी लगातार मिशन पंजाब को लेकर बात कर रहे थे, जबकि उन्हें ऐसा नहीं करने को कहा गया था. हमारा मकसद कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई लड़ने से है, ना कि राजनीति करने से. क्या कहा था गुरनाम सिंह ने?

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आपको बता दें कि करीब एक हफ्ते पहले गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने एक बयान दिया था, जिसपर विवाद हुआ था. पंजाब में किसान आंदोलन के लिए काम करने वाले लोगों से गुरनाम सिंह ने विधानसभा चुनाव लड़ने की बात कही थी, साथ ही राजनीति में आकर सिस्टम बदलने को कहा था. गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने इसे मिशन पंजाब का नाम दिया था.

इसके अलावा अपने एक बयान में गुरनाम सिंह ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को पाकिस्तानी बताया था, जिसके बाद पंजाबी समुदाय में बड़ा रोष था. आपको बता दें कि गुरनाम सिंह चढ़ूनी किसान आंदोलन का एक अहम चेहरा हैं, जो कि भारतीय किसान यूनियन (BKU) की हरियाणा यूनिट के प्रमुख भी हैं. कृषि कानूनों के खिलाफ जब सितंबर 2020 में आंदोलन अपनी जड़ें मजबूत करने में जुटा था, तब गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने ही हरियाणा के पीपली गांव में पहली सभा का आयोजन किया था.

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गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने हरियाणा में विधानसभा चुनाव भी लड़ा है, लेकिन वह खुद हार गए थे. जबकि उनकी पत्नी भी लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमा चुकी हैं, उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा था. कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन को करीब एक साल हो गया है. केंद्र और कृषि संगठनों के बीच लंबे वक्त से कोई बातचीत नहीं हुई है. ऐसे में किसानों की ओर से अलग-अलग राज्यों में अपनी पैठ को मजबूत किया जा रहा है. बंगाल चुनाव के बाद किसान संगठनों द्वारा यूपी, उत्तराखंड के चुनावों में भी महापंचायत की जा सकती है.

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सोर्स – aajtak.in


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