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जिनको राम रहीम अपनी निजी सुरक्षा के लिए चुनता, उनके अंडकोष कटवा देता था

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Gurmeet Ram Rahim : रंजीत सिंह मर्डर केस में दोषी पाए गए गुरमीत राम रहीम को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. उसके अलावा 4 अन्य दोषियों को भी यही सजा दी गई है. इनके नाम हैं जसबीर, सबदिल, इंदर सेन, अवतार और किशन लाल. इंदर सेन की 2020 में मौत हो गई थी. बाकी 4 दोषियों की बाकी जिंदगी अब जेल में ही कटेगी. सजा के ऐलान के बाद गुरमीत राम रहीम फिर चर्चा में है. लल्लनटॉप ने इस बलात्कारी और हत्यारे के बारे में कई स्टोरी की हैं. अदालत के फैसले के बाद हम कई स्टोरी एक बार फिर अपने पाठकों के सामने रख रहे हैं. इनमें से एक ये स्टोरी 29 मई 2018 को प्रकाशित की गई थी.

इस आर्टिकल में आप घिनौने ब्यौरे पढ़ेंगे. अपनी साध्वियों का रेप करने वाले डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम के. राम रहीम को 28 अगस्त 2017 को सज़ा सुनाई गई. उसके बाद से उसके कई कारनामे सामने आ रहे हैं. उन्हीं सब के बीच अब एक किताब आई है. ये ब्यौरे उसी किताब को पढ़ने के बाद आपको पढ़ाए जा रहे हैं. ज़ाहिर है कि ये सब के सब नए हैं. पहले की किसी रिपोर्ट में नहीं आए हैं विस्तार से. और ये सब आपको पढ़ना-जानना ज़रूरी है. क्योंकि ये कथित संत धर्म की आड़ में हज़ारों करोड़ का साम्राज्य चलाते हैं. क्योंकि ये कथित संत शोषण करते हैं. क्योंकि ये कथित संत पकड़े जाने से पहले सच के सब सुबूत मिटाने की कोशिश करते हैं. क्योंकि ये कथित संत पकड़े जाने के बाद भी अपने गुर्गों और भक्तों के जरिए अपने गुनाह ढांपने की कोशिश करते हैं. क्योंकि ये सब कथित संत हमारे आपके आसपास ही ऑपरेट करते हैं.

गुरमीत साध्वियों को सेक्स स्लेव की तरह ट्रीट करता था. और जो पुरुष साधु थे, उनके दो काम थे. दिनभर काम करना. नशीली रोटियां खाकर. और जो ज़्यादा मज़बूत थे, वे राम रहीम की पर्सनल आर्मी के लिए ट्रेनिंग पाने जाते. उनमें भी कुछ अभागे थे. राम रहीम उनको अपनी निजी सुरक्षा के लिए चुनता. और उनके अंडकोष सर्जरी करवा कटवा देता. इस मामले में CBI ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है. उसके इस कमीने कृत्य को भुगतने वाले कई पूर्व साधुओं ने बताया कि कैसे राम रहीम ये काम करता था.

ऐसे ही एक पूर्व साधु या कहें कि विक्टिम हैं हरियाणा के फतेहगढ़ जिले के हंसराज. वह बाज़ीगर दलित समुदाय से आते हैं. गरीब घर से थे. स्वर अच्छा था. परिवार डेरे से जुड़ा था. हंसराज भी जुड़ गए. भजन गाने लगे. फिर डेरे के लोगों ने परिवार पर दबाव डाला, तो परिवार ने उन्हें हमेशा के लिए डेरा भेज दिया. वह साधु बन गए. आगे की कहानी उन्हीं की जुबानी.

1999 में हम कुछ साधुओं ने एक बात सुनी कि डॉक्टरों ने डेरे के एक घोड़े के अंडकोष काट दिए. घोड़ा तीन महीने बाद मर गया. फिर पता चला कि पिता जी (गुरमीत का भक्तों के बीच नाम) ने इंसानों पर भी यह प्रयोग करने की सोची है. शुरुआत में डेरा के सीनियर मैनेजमेंट के एक व्यक्ति के साथ यह किया गया. उसके बाद 1999 के आखिरी में 500 साधु बुलाए गए. ये संत ब्रह्मचारी सेवादार ग्रुप के मेंबर थे. इन सबसे कहा गया, ‘एक छोटी सी सर्जरी होगी और उसके बाद आप सीधे ईश्वर के संपर्क में आ जाओगे.’ इसके बाद सभी साधुओं से गुरमीत खुद एक-एक कर मिला. जिन साधुओं से सर्जरी से इनकार किया, उन्हें टॉर्चर रूम में डाल दिया गया.

सबसे पहले गुरमीत के पर्सनल कुक, जो दो साधु थे, उनकी सर्जरी हुई. गुफा में ही ऑपरेशन टेबल सेट की गई. उसके बाद गुरमीत के करीबी दूसरे मैनेजमेंट के लोगों की सर्जरी हुई. सबको साफ निर्देश था. किसी को भी इस बारे में नहीं बताना है. बताना है तो ये कि सर्जरी के बाद उनका दिमाग और आध्यात्मिक हो गया है. इन साधुओं को दूसरे नौजवानों का ब्रेन वॉश करने की भी जिम्मेदारी दी गई.

अक्टूबर 2000 में हंसराज गुरमीत के कारवां के साथ हमेशा की तरह सत्संग के लिए गया था. रास्ते में गुरमीत ने उससे कहा, ‘तुम पर रहमत हो गई है. जल्द ही तुम्हें ईश्वर दिखेंगे.’ हंसराज तब 17 साल का था. गुरमीत ने हंसराज से अपने गांव गुरुसर मोडिया जाने को कहा. वहां डेरा एक अस्पताल चलाता है. शुरुआत में इसे ही बधिया करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था. गुरमीत ने हंसरात से कहा, ‘अस्पताल में जाना और डॉ. पंकज गर्ग और डॉ. एमपी सिंह से मिलना. कहना, मुझ पर रहमत हो गई.

हंसराज शाम को वहां पहुंचा और ऐसा ही बोला. डॉक्टर ये सुन मुस्कुराए और उसे पीने के लिए कोल्ड ड्रिंक दी. फिर जब उसकी आंख खुली, तो अंडकोष गायब हो चुके थे. यानी उसे नपुंसक बना दिया गया था.

हंसराज की जैसे दुनिया खत्म हो गई. कहां जाए, किसे बताए. डेरा में उसे ऐसे और भी साधु मिलते. रोज सुबह उन्हें एक काली गोली खाने को दी जाती, जिससे उनका दिमाग घूमता रहता. फिर कुछ बरस बाद हंसराज ने हिम्मत कर परिवार को बता दिया. घरवाले उसे ले गए. मगर यहां भी डेरा वाले उसे परेशान करते. गांववाले उसे तंग करते. कभी उसकी नौकरी जाती, कभी कुछ और. परिवार वाले इन्हीं सब के बीच गुज़र गए. हंसराज संगीत सिखाकर गुजारा करते हैं. उनके जैसे सैकड़ों साधु हैं, जो असल में उनके जैसे नहीं हैं. क्योंकि हंसराज तो वक्त रहते निकल आए. मगर वो साधु गुरमीत के कहने पर कत्ल करते रहे. खुद को भी मारते रहे. जैसे अंबाला में गुरमीत की पेशी के बाद एक साधु ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली. उसके सुसाइड नोट में पता चला कि वह गुरमीत को कोर्ट में बुलाए जाने से नाराज़ है. अगली बार फिर ऐसा हुआ. दोनों का ही जब पोस्टमार्टम हुआ, तो पता चला अंडकोष गायब हैं.

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सोर्स – thelallantop.com


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