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अग्निपथ योजना के भारी विरोध के बीच आई सरकार की सफाई, पढ़ें विस्तार से…

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भारतीय सेना के तीनों अंगों- थल, जल और वायु सेना में भर्तियों के लिए अग्निपथ योजना की घोषणा के बाद से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। तमाम तरह की शंकाओं के कारण देश के विभिन्न राज्यों में युवा सड़कों और रेलवे ट्रैकों पर उतर गए हैं। अग्निवीर के रूप में चार वर्षों तक सैन्य सेवा के बाद के भविष्य को लेकर सशंकित युवाओं ने कई जगहों पर योजना का विरोध कर रहे युवाओं की भीड़ उग्र हो गई और जमकर उत्पात मचाया। बिहार में बीजेपी के दो विधायक भी आक्रोशित युवाओं के निशाने पर आ गए। वहीं, हरियाणा के पलवल में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वहां इंटरनेट बंद करना पड़ गया, वहीं फरीदाबाद में धारा 144 लागू करना पड़ा। अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं में उबलते आक्रोश को देखते हुए सरकार ने भी सफाई पेश की है और गुरुवार को कई सवालों के जवाब दिए। आइए जानते हैं 10 बड़ी बातें…

जगह-जगह प्रदर्शनों के कारण 34 से अधिक ट्रेनों को कैंसल कर दिया गया जबकि आठ अन्य ट्रेनों को आंशिक रूप से कैंसल किया गया। रेलवे ने कहा कि कम-से-कम 72 ट्रेनें इन प्रदर्शनों के कारण अपने नियत समय से देरी से चल रही हैं। अकेले मध्य पूर्व रेलवे जोन में ही 22 ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। बिहार के छपरा, गोपालगंज, कैमूर और गया में ट्रेनों में आग लगा दी गई जिससे कई बोगियां जलकर खाक हो गईं।

हरियाणा के पलवल में गुरुवार को अग्निपथ योजना के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गया। इस दौरान पथराव और गाड़ियों में आगजनी की गई। पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए बल प्रयोग किया और प्रशासन ने इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय राजमार्ग 19 को जाम कर दिया। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव कर दिया और पुलिस की पांच गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पलवल के पुलिस अधीक्षक (SP) मुकेश मल्होत्रा ने बताया कि इस बाबत दो प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं और दो विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि हिंसा में शामिल किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग 19 को खाली कराकर यातायात को सुचारू रूप से चलाया।

वहीं इस घटना के बाद फरीदाबाद पुलिस भी सतर्क हो गई है। फरीदाबाद के पुलिस आयुक्त कमिश्रर विकास कुमार अरोड़ा ने सभी उपायुक्तों (डीसीपी), सहायक पुलिस आयुक्तों (एसीपी) थाना और चौकी प्रभारियों को अलर्ट रहने के निर्देश जारी किए है। पलवल के अलावा गुरुग्राम और रेवाड़ी में भी प्रदर्शन हुए हैं। जिले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 144 का उपयोग करना पड़ा है। प्रशासन ने जिले में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दिया है। साथ ही, शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए फरीदाबाद में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हर प्रमुख स्थल पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जिले में सघन पुलिस पेट्रोलिंग चल रही है। युवाओं से अपील की गई है कि वो किसी अफवाह और बहकावे का शिकार होकर कानून को हाथ में नहीं लें।

इसके अलावा, होडल इलाके में भी काफी बवाल हुआ। पुलिस की गाड़ियों को पलटा गया और कुछ जगह आगजनी की गई। गुड़गांव के भी बिलासपुर चौक को युवाओं ने जाम कर दिया। पुलिस को हाइवे से रूट डायवर्ट करना पड़ा। रेवाड़ी में सैकड़ों छात्रों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। बिहार के कई जिलों में प्रदर्शन हिंसक हो गया। कई प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनों में आग लगा दी और पथराव किया। हालात काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। नवादा में बीजेपी की विधायक अरुणा देवी की गाड़ी पर प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जिसमें विधायक सहित पांच लोग घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे संपत्ति को ज्यादा नुकसान पहुंचाया। भभुआ और छपरा स्टेशन पर बोगियों में आग लगा दी। कई जगहों पर डिब्बों के शीशे तोड़ दिए। आरा में बड़ी संख्या में गुस्साए युवाओं ने जिला मुख्यालय को घेर लिया। पटना-गया, बरौनी-कटिहार और दानापुर-डीडीयू जैसे ट्रेन रूट प्रभावित हुए। कई गाड़ियां कैंसल करनी पड़ीं। जहानाबाद, बक्सर, कटिहार, सारण, भोजपुर और कैमूर जैसे जिलों में सड़क यातायात बाधित हुआ। यहां पर पथराव की घटनाओं में कई स्थानीय लोग घायल हो गए।

अग्निपथ योजना से असंतुष्ट युवा गुरुवार को मेरठ, आगरा, अलीगढ़, फिरोजाबाद में सड़कों पर उतर आए। जगह-जगह जाम लगाए। प्रदर्शन किया। टायरों में आग लगा दी। पुलिस से भिड़ंत भी हुई। कई जगह पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर युवाओं को दौड़ाया। मेरठ में छात्रों ने ऐलान किया है कि अगर तीन दिन में अग्निपथ योजना वापस नहीं ली गई तो वे 20 जून को दिल्ली कूच करेंगे। मथुरा में युवाओं ने आगरा-दिल्ली हाइवे पर जाम लगा दिया। पुलिस ने किसी तरह समझाकर ट्रैफिक दोबारा शुरू करवाया। आगरा में भी अलग-अलग रास्तों को प्रदर्शनकारियों ने बंद कराया। अलीगढ़ में प्रदर्शनकारियों ने बसों की शीशे तोड़े और सड़क पर टायरों में आग लगाई।

राजस्थान के कई जिलों में युवाओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान कहीं से किसी घटना होने की सूचना नहीं मिली। युवाओं ने विशेष रूप से जयपुर, सीकर, नागौर, अजमेर, जोधपुर, जैसलमेर और झुंझुनू के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। जयपुर में बड़ी संख्या में लोग जिला कलेक्ट्रेट पर इकट्ठा हुए। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई जगह अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई थी। छात्रों ने अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे।

उत्तराखंड के तमाम जिलों में अग्निपथ स्कीम का विरोध शुरू हुआ। कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर, खटीमा, टनकपुर और बाजपुर में गुरुवार को सैकड़ों युवा सड़क पर उतर आए। पिथौरागढ़ में तो युवाओं ने एनएच को जाम कर दिया। यातायात रुक गया। चंपावत और टनकपुर में युवाओं ने जुलूस निकाला। अल्मोड़ा में सेना की भर्ती में जाने की तैयारी कर रहे युवकों ने शुक्रवार को बड़े पैमाने पर आक्रोश रैली निकालने का ऐलान किया है। युवाओं का कहना है कि 4 साल के लिए सेना में भर्ती उनके साथ धोखा है। सैनिक बहुल उत्तराखंड में लाखों युवा सेना की तैयारी कर रहे हैं।

जम्मू में भी कुछ युवाओं ने धरना-प्रदर्शन किया जिन्होंने थल सेना में भर्ती के मेडिकल और फिजिकल टेस्ट पिछले वर्ष ही पास कर लिया था और अब वो लिखित परीक्षा का इंतजार कर रहे थे। अग्निपथ स्कीम की घोषणा के कारण पूर्व में घोषित सेना भर्ती की परीक्षाएं कैंसल कर दी गई हैं।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी युवाओं ने जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बिरलानगर रेलवे स्टेशन को तबाह कर दिया। वहां आगजनी की गई। कई ट्रेनों पर पत्थरबाजी हुई जिससे कई खिड़कियों के शीशे टूट गए। दावा किया गया कि प्रदर्शनकारियों ने स्टेशनल के नियंत्रण कक्ष में तोड़फोड़ की और कंट्रोल सिस्टम को नुकसान पहुंचाया।

केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब दिए। सरकार ने अग्निवीरों की रिटायरमेंट के बाद के भविष्य को लेकर जताए जा रहे संदेहों पर भी स्थिति स्पष्ट की। सरकार ने यह भी कहा कि अग्निपथ स्कीम से सेना की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ने का संदेह निराधार है। उसने कहा कि दो साल के संपर्क अभियान के बाद अग्निपथ स्कीम का प्रस्ताव तैयार किया गया। जहां तक बात अग्निवीरों के भविष्य की है तो केंद्र एवं राज्य सरकारें उन्हें रिटायरमेंट के बाद अपने विभिन्न विभागों की भर्तियों में प्राथमिकता देंगी। साथ ही, उन्हें बिजनस करने, रोजगार पाने, पढ़ाई करने में भी मदद करेगी।

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सोर्स – navbharattimes.indiatimes.com


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