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ढोंगी, ससुर, दस नंबरी यार, कलमुंही… अब MP विधानसभा में इन शब्दों का प्रयोग नहीं कर पाएंगे विधायक

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विधानसभा के मानसून सत्र (MP Assembly Monsoon Session) का आज दूसरा दिन है। इस बार सदन शुरू होने से पहले विधायकों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया गया है। विधायकों को सत्र से पहले बताया गया है कि उन्हें क्या कहना है और क्या नहीं कहना है। आठ अगस्त को एमपी विधानसभा सचिवालय ने विधायकों को सदन में असंसदीय भाषा से बचने के लिए ‘असंसदीय शब्द एवं वाक्यांश संग्रह’ पुस्तक का विमोचन किया है। यह किताब विधायकों को भी दी गई है। किताब को पढ़कर विधायक ऐसे शब्दों के प्रयोग से बचेंगे। साथ ही सदन की कार्यवाही के दौरान इसे विलोपित नहीं करना पड़ा।

एमपी विधानसभा ने 38 पन्नों की इस पुस्तक का विमोचन किया है, जिसमें 1,161 असंसदीय शब्दों और वाक्याशों का संग्रह है, जो वर्ष 1954 से लेकर अब तक विधानसभा के रेकॉर्ड से हटाये गये हैं। ये शब्द और वाक्यांश अधिकांश हिंदी के हैं। इस पुस्तक के हिसाब से विधानसभा के अंदर सदस्यों को पप्पू और मिस्टर बंटाधार जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना है। दरअसल, बीजेपी के समर्थक कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उपहास के तौर ‘पप्पू’ कहते हैं, जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह को ‘मिस्टर बंटाधार’ कहते हैं।

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इस किताब के अनुसार सदन में ढोंगी, निकम्मा, चोर, भ्रष्ट, तानाशाह और गुंडे सहित कई शब्दों और झूठ बोलना और व्यभिचार करना जैसे वाक्याशों को भी शामिल किया गया है। इसमें ‘ससुर’ शब्द का भी जिक्र किया गया है, जिसका उपयोग सदन में नौ सितंबर 1954 को किया गया था, जिसे बाद में कार्यवाही से हटा दिया गया था।

इस पुस्तक में सदन में वर्ष 1990 और 2014 के बीच को छोड़कर 1954 से लेकर 2021 तक के उन शब्दों एवं वाक्यांशों का संकलन किया गया है, जिन्हें सदन की कार्यवाही से हटाया गया है। इस पुस्तक में कुल 1560 शब्द और वाक्य शामिल किए गए हैं, जिनका प्रयोग सदन की कार्यवाही के दौरान विधायक नहीं कर सकते हैं।

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इनमें धिक्कार, ओछी, बंटाधार, गप्पी दास, ढपोलशंखी, पागल, लल्लू मुख्यमंत्री, दस नंबरी यार, निक्कमी सरकार, बकवास, अय्याशी, मक्खनबाजी, भांड, चमचे, मिर्ची लगना, कलमुंही, सफेदपोश गुंडे, बेशर्मों की तरह बैठना, धोबी के कुत्ते, छुट्टे सांडों की तरह फिरना, टुच्चा, ढोंगी, मूर्खतापूर्ण, नालायक, जमूरा, औकात, पापी, भाड़ में जाए, भ्रष्टाचारी मुख्यमंत्री नहीं चलेगा और फालूत की बात जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं कर सकेंगे।

वहीं, सदन के पहले दिन ही बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने स्पीकर को पत्र लिखकर कहा है कि बंटाधार और नक्सलवाद जैसे शब्दों को विलोपित नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि मामू और चड्डीवाला जैसे शब्दों पर अससंदीय कहे जाने पर विचार किया जाना चाहिए।

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सोर्स – navbharattimes.indiatimes.com


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