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कोयला संकट से कटने वाली है दिल्ली में बिजली? जानें कितना कोयला बचा है बाकी

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कोयले की कमी की वजह से देश के कई राज्यों में बिजली संकट गहराता जा रहा है। इसकी आंच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक महसूस हो रही है। एक तरफ प्रचंड गर्मी की वजह से दिल्ली में बिजली की मांग रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है दूसरी तरफ कोयला संकट की वजह से राजधानी में बत्ती गुल होने का अंदेशा भी गहरा गया है। दिल्ली सरकार तो ये आशंका जता चुकी है कि कोयला संकट की वजह से मेट्रो और अस्पतालों को 24 घंटे बिजली सप्लाई बाधित हो सकती है।

यानी मेट्रो ट्रेनों के पहिए थम सकते हैं, और तो और, अस्पतालों में मरीजों की सांसें तक उखड़ सकती हैं। दिल्ली सरकार ने केंद्र को हालात की गंभीरता बताते हुए खत लिखा है और दखल देने की मांग की है। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि दिल्ली में बिजली संकट कितना बड़ा है। प्रचंड गर्मी और लू की वजह से दिल्ली में बिजली की डिमांड काफी बढ़ चुकी है। गुरुवार को पहली बार अप्रैल में डेली पावर डिमांड 6000 मेगावॉट पहुंच चुकी है। इतना ही नहीं, इस साल दिल्ली में डेली पीक पावर डिमांड भी पहली बार 8000 मेगावॉट को पार करने वाली है।

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2019 के अप्रैल महीने में दिल्ली में बिजली की पीक पावर डिमांड 5664 मेगावॉट थी। 2020 में ये आंकड़ा 3,362 था। पिछले साल यानी 2021 में अप्रैल में पीक पावर डिमांड 4372 मेगा वॉट और इस साल 28 अप्रैल को ये 6000 मेगा वॉट पहुंच गई। इतना ही नहीं, इस साल 19 अप्रैल को ही पीक पावर डिमांड ने पिछले सालों का रेकॉर्ड तोड़ दिया था। 19 अप्रैल को दिल्ली में पीक पावर डिमांड 5,735 मेगा वॉट रही, 20 अप्रैल को 5,761 मेगा वॉट, 27 अप्रैल को 5,786 मेगा वॉट और 28 अप्रैल को 6000 मेगा वॉट पहुंच गई।

दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी को बिजली की आपूर्ति करने वाले पावर प्लांट्स में कोयले की संभावित कमी पर चिंता जाहिर की है। दादरी और ऊंचाहार थर्मल पावर प्लांट से बिजली आपूर्ति बाधित होने से दिल्ली मेट्रो, अस्पतालों और राष्ट्रीय राजधानी के अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए दिल्ली सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर थर्मल पावर प्लांट्स को पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराने के लिए हस्तक्षेप करने को कहा है। नेशनल पावर पोर्टल की डेली कोयला रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) के कई बिजली स्टेशनों पर कोयले की भारी कमी है।

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एनटीपीसी के दादरी-द्वितीय और झज्जर (अरावली) बिजली संयंत्र मुख्य रूप से दिल्ली की बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्थापित किए गए थे, लेकिन इन संयंत्रों में बहुत कम स्टॉक बचा है। दिल्ली सरकार ने जानकारी दी है कि दादरी-2 पावर प्लांट में सिर्फ एक दिन का कोयला स्टॉक बचा है, ऊंचाहार पावर प्लांट में दो दिन का स्टॉक है, कहलगांव में साढ़े तीन दिन का स्टॉक बचा है, फरक्का के पास 5 दिन का स्टॉक है जबकि झज्जर (अरावली) के पास 7 से 8 दिन का स्टॉक बचा है। कोयला संकट से जहां बिजली आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा है, वहीं दिल्ली और कई अन्य राज्य भीषण गर्मी की स्थिति का सामना कर रहे हैं। मौसम विभाग ने कहा है कि दिल्ली में पारा 46 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। इतनी प्रचंड गर्मी में बिजली कटौती कोढ़ में खाज की तरह है।

दिल्ली के बिजली मंत्री सत्येंद्र जैन ने गुरुवार को दिल्ली सचिवालय में कोयले की किल्लत को लेकर इमर्जेंसी मीटिंग की। उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राष्ट्रीय राजधानी को बिजली की आपूर्ति करने वाले बिजली संयंत्रों को पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराने के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। मंत्री ने कहा कि वर्तमान में तमाम थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की भारी किल्लत है। सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली सरकार हालात पर करीबी निगाह रखे हुए है और हर मुमकिन कोशिश कर रही है कि बिजली कटौती की नौबत न आए। उन्होंने कहा कि दिल्ली की बिजली जरूरत की जिन पावर प्लांट्स से पूर्ति होती है, वो कोयले की कमी से जूझ रहे हैं।

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सोर्स – navbharattimes.indiatimes.com


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