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चीफ जस्टिस ने ED-CBI से पूछा- सांसदों-विधायकों के खिलाफ चार्जशीट में इतनी देरी क्यों?

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सासंदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के जल्द ट्रायल और निपटारा करने की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने ईडी और सीबीआई से पूछा कि विधायक-सांसदों के मामलों में चार्जशीट दाखिल करने में देरी क्यों हो रही है. सीजेआई ने कहा कि अगर जांच में कुछ मिलता है तो चार्जशीट दाखिल कीजिए इसे लंबित मत रखिए.

सीजेआई ने कहा कि हम जांच एजेंसियों को निराश नहीं करना चाहते हैं इसलिए कुछ कह नहीं रहे हैं. जांच एजेंसियों पर दबाव है तो कोर्ट के ऊपर भी मामलों को दबाव है. एक सीबीआई कोर्ट में 900 मामले हैं. सीजेआई ने कहा कि हमने भारत सरकार से स्पेशल कोर्ट मुहैया कराने की मांग की थी, लेकिन सरकार ऐसा कर नहीं पाई. इंफ्रास्ट्रक्चर बड़ा मसला है. मैंनेे दो जजों से भी कहा था कि वो इस मामले को देखें और युक्तिकरण का सुझाव दें. यह देश के लिए भी अच्छा है कि देश में रेशनलाइजेशन पॉलिसी हो.

यह रिपोर्ट अच्छी नहीं है. 10-15 सालों से चार्जशीट या कुछ और दाखिल ना करना गलत है. एक केस ऐसा है जहां आपने 200 करोड़ की सपत्ति अटैच की लेकिन कुछ भी फाइल नहीं किया गया. CJI एनवी रमना ने कहा कि 15-20 साल से कई अहम मुकदमे लंबित हैं लेकिन ये एजेंसिया कुछ नहीं कर रही हैं. खासतौर से ईडी तो सिर्फ संपत्ति जब्त कर रही है. यहां तक कि कई मामलों में वर्षों बीत जाने के बावजूद चार्जशीट तक दाखिल नहीं की गई है. हमारा मानना है कि मुकदमों को ऐसे ही लटका कर न रखें. चार्जशीट दाखिल करें या फिर बंद करें. क्योंकि एजेंसियों के लापरवाह अधिकारी, मामलों में देरी का कारण भी नहीं बताते हैं.

CJI ने फटकार लगाते हुए कहा कि PMLA में 78 मामले सन 2000 से लंबित हैं. आजीवन कारावास के मुलजिमों के भी अनगिनत मामले लंबित हैं. सीबीआई के 37 मामले अभी लंबित हैं. हमने एसजी से यह पूछा था कि इसमें कितना समय लगेगा? हम एसजी तुषार मेहता से सीबीआई और ईडी से इन लंबित मामलों के बारे में स्पष्ट स्पष्टीकरण देने को कह रहे हैं. एजेंसियों ने इन मामलों में देरी के कारणों के बारे में विस्तार से नहीं बताया है.

कोर्ट की इस फटकार के बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आप हाईकोर्ट को इसमें तेजी लाने का निर्देश दे सकते हैं. CJI ने कहा हमने पहले ही उच्च न्यायालयों को HC के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का निर्देश दिया है. जांच एजेंसियां आगे बढ़ सकती हैं और जांच पूरी कर सकती हैं.

सीजेआई एनवी रमना, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की तीन जजों की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है. सीजेआई ने आगे कहा कि कृपया निगरानी समिति के सुझावों पर गौर करें, हम कुछ नहीं कह रहे हैं. उन सुझावों में सब कुछ है. वहीं,जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि सीबीआई-ईडी के निदेशक बता सकते हैं कि समय से इन लंबित प्रक्रिया पूरी करने के लिए कितनी अतिरिक्त जनशक्ति की आवश्यकता है?

इसपर एसजी ने कहा कि मैं उनके साथ एक संयुक्त बैठक करूंगा, जो भी कमी है उसे दूर किया जा सकता है. हाई कोर्ट प्रशासनिक निर्देश दे इसके बजाय, आप न्यायिक निर्देश जारी कर सकते हैं. इसपर सीजेआई ने कहा कि हर जगह मैन पावर एक वास्तविक मुद्दा है. हमारी तरह जांच एजेंसियां भी इस समस्या से जूझ रही हैं. हर कोई सीबीआई जांच चाहता है.

इसपर एसजी ने कहा कि कुछ ऐसे मामले ऐसे भी हैं जहां ट्रायल या जांच पर कोर्ट के द्वारा स्टे लगाया गया है. इसपर सीजेआई नेे कहा कि नहीं यह सही नहीं है, 200 मामलों में से 8 केस में स्टे लगाया गया है. बाकी मामलों में नहीं. एसजी ने सफाई देते हुए कहा कि मैं चार्जशीट फाइल होने में हो रही देरी को स्टे से जस्टिफाई नहीं कर रहा हूं. सीजेआई ने कहा कि हमने पहले ही उच्च न्यायालयों को स्पेशल बेंच बनाने और मॉनिटर करने का निर्देश दिया है. महामारी के चलते बीते दो सालों में सुनवाई रुक गई है लेकिन जांच एजेंसियों को तो कुछ नहीं रोक रहा. इसपर एसजी ने कहा कि ईडी के मामलों में ऐसा होता है कि अनुरोध पत्र कई देशों में जाते हैं. दूसरे देश देर से प्रतिक्रिया देते हैं या जो देश टैक्स हैवन हैं वे बिल्कुल भी प्रतिक्रिया नहीं देते हैं. इससे अभियोजन की शिकायत में देरी होती है.

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सोर्स – aajtak.in


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