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इस शहर के स्कूली बच्चों को बस्ते के बोझ से मिली मुक्ति, एक कॉपी लेकर जाते है स्कूल

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छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के सरकारी स्कूलों में शानदार पहल की गई है। आठ सरकारी स्कूलों में बच्चों को अब स्कूल बैग की टेंशन नहीं है। इन स्कूलों में पढ़ाई के लिए बच्चे सिर्फ कॉपी लेकर आते हैं। इनका बैग स्कूल में ही इंतजार कर रहा होता है। यहां के बच्चे प्राइवेट स्कूल की तरह यूनिफॉर्म में आते हैं।

जी हां, अब न बस्ते का बोझ, न किताब की टेंशन…आओ मिलकर स्कूल चले हम। बच्चों के खिले-खिले चेहरे बता रहे हैं कि इन्हें भारी भरकम बस्तों से आजादी मिल चुकी है। बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड के चंद्रनगर संकुल केंद्र के स्कूलों के शिक्षकों की अलग सोच ने इसे अच्छे से अच्छे शहरी स्कूलों से बेहतर बना दिया है। चंद्रनगर संकुल केंद्र के 8 स्कूलों के 560 संख्या वाले बच्चों में कोई भी बच्चा स्कूल बैग लेकर नहीं आता।

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स्कूल के हर कक्षाओं में एक अलमारी रखी गई है, जिसमें प्रत्येक बच्चे अपने अलग-अलग विषयों की किताबें यहां रखते हैं। अलमारी के ऊपर बकायदा बच्चों का नाम लिखा होता है। स्कूलों की तरफ से किताबों की दो सेट बच्चों को दिया गया है। एक स्कूल के लिए दूसरा घर के लिए है। बैग के टेंशन से मुक्ति मिलने से बच्चे खुश हैं।

इतना ही नहीं शिक्षकों की सोच और अभिभावकों के सहयोग से यहां बच्चे बकायदा आईडी कार्ड और टाई लटकाकर स्कूल आते हैं। इसका पूरा खर्च स्कूल के शिक्षकों ने वहन किया है। पढ़ाई के मामले में भी यहां के बच्चे प्राइवेट स्कूल के छात्रों को मात दे रहे हैं।

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चंद्रनगर संकुल केंद्र के प्रभारी ने बताया कि पुरानी किताबें, जिन्हें रद्दियों के भाव में बेचा जाता है, उसका एक सेट बनाकर बच्चों को प्रदान किया गया है। यह सेट स्कूल में रखा रहता है। स्कूल में बुक उपलब्ध होने की वजह से बच्चों को घर से लेकर नहीं आना होता है।

उन्होंने कहा कि टाई बेल्ट और आईडी कार्ड भी अभिभावकों के सहयोग से बच्चों को प्रदान किया गया है। वहीं, विकासखंड शिक्षा अधिकारी भी शिक्षकों के इस प्रयास की तारीफ कर रहे हैं और उन्होंने कहा कि दूसरे स्कूलों में भी इसे लागू करने की हम कोशिश करेंगे।

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सोर्स – navbharattimes.indiatimes.com


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