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क्या BSP औऱ AIMIM मैं होने वाला है गठबंधन ? मायावती ने कही ये बड़ी बात…

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सियासी पार्टियां जुटी हुई हैं। लगातार दो विधानसभा चुनाव में हार के बाद इस बार का इलेक्शन बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के लिए भी बहुत अहम है। पार्टी की अध्यक्ष और यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने साफ किया है कि बीएसपी किसी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। इससे पहले एक न्यूज चैनल ने असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम और बीएसपी के बीच गठबंधन की खबर प्रसारित की थी। मायावती ने इसे सिरे से खारिज किया है।

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट किया, ‘मीडिया के एक न्यूज चैनल में कल से यह खबर प्रसारित की जा रही है कि यूपी में आगामी विधानसभा आम चुनाव औवेसी की पार्टी AIMIM और बीएसपी मिलकर लड़ेगी। यह खबर पूर्णतः गलत, भ्रामक व तथ्यहीन है। इसमें रत्तीभर भी सच्चाई नहीं है तथा बीएसपी इसका जोरदार खण्डन करती है।

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मायावती ने आगे कहा, ‘वैसे इस संबंध में पार्टी द्वारा फिर से यह स्पष्ट किया जाता है कि पंजाब को छोड़कर, यूपी व उत्तराखण्ड प्रदेश में अगले वर्ष के प्रारंभ में होने वाला विधानसभा का यह आम चुनाव बीएसपी किसी भी पार्टी के साथ कोई भी गठबंधन करके नहीं लड़ेगी अर्थात अकेले ही लड़ेगी। इससे पहले बीएसपी ने पंजाब में मुख्य विपक्षी पार्टी शिरोमणि अकाली दल के साथ 2022 विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन किया है। राज्य में 32 फीसदी से ज्यादा दलित आबादी है। ऐसे में बीएसपी ने सुखबीर सिंह बादल की पार्टी से अलायंस करते हुए बड़ा दांव खेला है।

गठबंधन के तहत राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से 20 पर बीएसपी लड़ेगी, जबकि बाकी 97 सीटें अकाली दल के हिस्से में आई हैं। पंजाब में 1996 के लोकसभा चुनाव में भी बसपा ने अकाली दल से गठबंधन किया था। तब अलायंस ने राज्य की 13 में से 11 लोकसभा सीटें जीती थीं। बीएसपी जिन तीन सीटों पर लड़ी थी वो सभी उसने जीत ली थी। वहीं अकाली दल को 8 सीटें हासिल हुई थीं।

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चार बार यूपी की मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती के सियासी भविष्य के लिए 2022 का चुनाव अहम है। 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी और 2017 में बीजेपी से उनकी पार्टी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। 2017 में पार्टी सिर्फ 19 सीटों पर सिमट गई और उसका मुख्य विपक्षी दल का दर्जा भी खत्म हो गया। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी ने अखिलेश यादव की सपा से गठबंधन करते हुए 10 सीटों पर जीत हासिल की। चुनाव के बाद ये अलायंस टूट गया और दोनों पार्टियां एक बार फिर अलग-अलग राह पर हैं।

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सोर्स – navbharattimes.indiatimes.com


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