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BSNL को अपने ही टावर के लिए देने होंगे पैसे, प्राइवेट हाथों में होगा कंट्रोल

20220729 172631 min
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BSNL यानी भारत संचार निगम लिमिटेड हमेशा किसी ना किसी वजह से चर्चा में बनी रहती है. कल ही हम कंपनी को पिछले एक दशक में हुए घाटों पर बात कर रहे थे. अब कंपनी एक पुराने मामले में नए अपडेट को लेकर चर्चा में आई है. अक्टूबर 2000 में शुरू होने वाली BSNL इन दिनों खुद को बचाने की जद्दोजहद में लगी हुई है.

सरकार ने कंपनी को बचाने के लिए राहत पैकेज का भी ऐलान किया है. मगर एक सरकारी फैसले का विरोध कंपनी के कर्मचारी कर रहे हैं. BSNL कर्मचारी देशभर में केंद्र सरकार की पॉलिसी का विरोध कर रहे हैं. यह विरोध AUAB के तहत हो रहा है, जो BSNL के मुख्य यूनियन और संगठनों का अंब्रेला ऑर्गेनाइजेशन है. कंपनी के कर्मचारी काला बैज पहनकर सरकार की पॉलिसी का विरोध कर रहे हैं.

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AUAB महाराष्ट्र के अध्यक्ष रंजन दानी का कहना है कि उनकी संस्था 14,917 BSNL टावर्स को प्राइवेट फर्म्स के हाथ में देने के सरकारी फैसले का जोरदार विरोध कर रही है. उन्होंने बताया, ‘आम बजट 2021-22 में सरकार ने कहा था कि वह 40 हजार करोड़ रुपये BSNL और MTNL के मोबाइल टावर और ऑप्टिक फाइबर प्राइवेट कंपनियों को देकर इकट्ठा करेंगे.

अब इस बात को आसान शब्दों में समझे तो BSNL के 14,917 टावर्स प्राइवेट कंपनियों को देकर सरकार 40 हजार करोड़ रुपये इकट्ठा करना चाहती है. इससे बीएसएनएल की स्थिति को पहले से बेहतर करने की योजना है. मगर इन टावर्स को प्राइवेट कंपनियों को देने का मतलब है कि इनको इस्तेमाल करने के लिए BSNL को ही पैसे देने पड़ेंगे.

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हालांकि, सरकार कई तरह से BSNL को वापस पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है. हाल में ही सरकार ने इसके लिए 1.64 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया है.

इससे अर्से से अटकी पड़ी BSNL 4G सर्विस शुरू हो सकेगी. साथ ही केंद्र सरकार बीएसएनएल के घाटे को भी कम करने की कोशिश कर रही है. लेटेस्ट अपडेट में सरकार ने BSNL और BBNL के मर्जर को भी मंजूरी दे दी है.

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