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BJP विधायक का बयान- बिल्कीस बानो के रेपिस्ट ‘ब्राह्मण और अच्छे संस्कार वाले थे

20220819 113500 min
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2002 गुजरात दंगों में बिल्कीस बानो (Bilkis Bano Case) के सामूहिक बलात्कार और उनके परिजन की हत्या से संबंधित मामले में 11 दोषियों की रिहाई के फैसले को लेकर राजनीत‍िक सरगर्मी तेज हो गइ है। आरोप‍ियों की रिहाई के व‍िरोध में जहां व‍िपक्ष हमलावर है, वहीं गुजरात के बीजेपी व‍िधायक ने अजीबोगरीब बयान द‍िया है। गोधरा के बीजेपी व‍िधायक सीके राउलजी (BJP Godhra MLA CK Raulji) ने कहा है कि बिल्कीस बानो के रेप के लिए दोषी ठहराए गए और गुजरात सरकार की ओर से जेल से रिहा किए गए 11 दोषी ब्राह्मण थे और सभी में अच्‍छे संस्‍कार थे। राउलजी के इस बयान पर तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने हमला बोला है।

दरअसल बीजेपी व‍िधायक सीके राउलजी गुजरात सरकार की ओर से बनाए गए उस पैनल का हिस्सा थे, जिसने बलात्कारियों की र‍िहाई की वकालत की। बीजेपी विधायक सीके राउलजी ने पत्रकार से बातचीत के दौरान कहा क‍ि क्राइम क‍िया क‍ि नहीं क‍िया, यह मुझे पता नहीं। लेकिन क्राइम के बारे में कोई इनटेंशली भी हो सकता है। दोष‍ियों की जो एक्‍ट‍िव‍िटी थी, वह बहुत अच्‍छी थी। वे ब्राह्मण थे और ब्राह्मण के संस्‍कार अच्‍छे होते हैं। तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की ओर से इस पूरी बात का वीड‍ियो शेयर क‍िया गया है।

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उधर, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की विधान परिषद सदस्य के. कविता ने कहा कि जेल से छूटकर आए बलात्कारियों और हत्यारों का एक विशेष विचारधारा के लोगों की ओर से स्वागत किया जाना एक सभ्य समाज के मुंह पर तमाचा है। तेलंगाना विधान परिषद की सदस्य कविता ने ट्वीट किया कि इस अत्यंत खतरनाक परंपरा को शुरुआत में ही रोक देना जरूरी है। उन्होंने ट्वीट किया क‍ि एक स्त्री होने के नाते मैं बिल्कीस बानो के दर्द और भय को महसूस कर सकती हूं। जेल से छूटकर आने पर बलात्कारियों और हत्यारों का जिस तरह से सम्मान किया गया, वह सभ्य समाज के मुंह पर एक तमाचा है। विरासत का रूप लेने से पहले इस बेहद खतरनाक परंपरा को रोकना जरूरी है।

कविता ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराधों में शामिल दोषियों को रिहा करने का फैसला इस पवित्र दिन को कलंकित करता है। कविता ने ट्वीट किया क‍ि बलात्कार और हत्या के घृणित अपराधियों को आजादी के अमृत महोत्सव पर छोड़ना इस पवित्र दिन को कलंकित करने वाला फैसला है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दिशानिर्देश भेजे हैं, जिसमें साफ तौर से ज‍िक्र किया गया है कि बलात्कारियों और उम्रकैद की सजा वाले कैदियों को माफ नहीं किया जाना चाहिए, इसके बावजूद इन कैदियों को रिहा किया गया।

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कविता ने ट्वीट किया क‍ि पांच माह की गर्भवती बिल्कीस बानो के बलात्कारियों और उसकी तीन साल की बच्ची के हत्यारों की सजा माफ कर गुजरात की बीजेपी सरकार ने बर्बर सोच को बढ़ावा दिया है। यह केवल कानून एवं न्याय की भावना के ही नहीं, बल्कि मानवता के भी विरुद्ध है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध करते हुए एक अन्य ट्वीट किया क‍ि कोई और निर्भया कांड न हो, कोई बिल्कीस दर्द के इस चरम से न गुजरे और कानून पर सबका भरोसा बनाए रहे, इसके लिए जरूरी है कि यह शर्मनाक फैसला वापस लिया जाए। मैं सुप्रीम कोर्ट से भी इस मामले का स्वतः सज्ञान लेकर हस्तक्षेप करने की मांग करती हूं।

उम्रकैद की सजा काट रहे 11 दोषियों को सोमवार को गोधरा उप-कारागार से रिहा कर दिया गया था। गुजरात सरकार ने अपनी माफी नीति के तहत इन लोगों की रिहाई की मंजूरी दी थी। मुंबई में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 11 दोषियों को सामूहिक बलात्कार और सात सदस्यों की हत्या करने के जुर्म में 21 जनवरी 2008 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी सजा को बरकरार रखा था। दोषियों ने 15 साल से अधिक जेल की सजा काट ली थी और उनमें से एक ने समय से पहले रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार को छूट के मुद्दे पर गौर करने का निर्देश दिया था।

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