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BJP नेता सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने केंद्र सरकार को कोर्ट में घसीटा तो होना पड़ा हा‍ज‍िर, जानें पूरा मामला…

20221103 202011 min
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भाजपा के नेता और पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार को जब कोर्ट में घसीटा तो सरकार की ओर से उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी प्रबंध करने का आश्वासन दिया गया। इस पर स्वामी ने कोर्ट का आभार जताया है। उन्होंने कहा, “मेरे जैसे साधारण नागरिकों के बचाव में अदालतों के आने से, हमारे लोकतंत्र पर हमें गर्व है। यह मुझे देश के लिए और भी अधिक लड़ने के लिए उत्साहित करता है।

सुब्रमण्यम स्वामी भाजपा के नेता पूर्व राज्यसभा सांसद हैं। उनका राज्यसभा का कार्यकाल 24 अप्रैल 2022 को खत्म हो चुका है। लिहाजा वह जिस सरकारी आवास में सांसद के रूप में रह रहे थे उसे खाली करने का उनको नोटिस दिया गया था। अदालत ने 14 सितंबर को स्वामी को छह सप्ताह के भीतर अपने सरकारी बंगले का कब्जा संपदा अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि बंगले का आवंटन पांच साल के लिए किया गया था और वह अवधि समाप्त हो गई है। न्यायाधीश ने कहा कि अदालत को ऐसी कोई सामग्री नहीं दिखाई गई है जो जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति के लिए सरकारी आवास के आवंटन को अनिवार्य करती है।

इस बीच सुब्रमण्यम स्वामी ने केंद्र सरकार से कहा कि उनके निजी आवास पर जरूरी सुरक्षा प्रबंध किये जायें, क्योंकि वह जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त नेता हैं। उनकी सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था।

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उनकी याचिका पर केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय से गुरुवार को कहा कि भाजपा के पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी को ‘जेड श्रेणी’ की सुरक्षा प्राप्त है। उनके निजी आवास पर उनकी सुरक्षा मुहैया कराने के लिए जरूरी प्रबंध किए गए हैं। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने केंद्र सरकार के इस आश्वासन पर गौर करते हुए स्वामी की याचिका का निपटारा कर दिया।

स्वामी ने याचिका में दावा किया था कि पहले दिए आश्वासन के बावजूद केंद्र ने उनके निजी आवास पर सुरक्षा के पर्याप्त बंदोबस्त नहीं किए। केंद्र की पैरवी कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने कहा कि विभिन्न सुरक्षा एजेंसी इस बात से संतुष्ट हैं कि स्वामी को दी गई ‘जेड श्रेणी’ सुरक्षा के मद्देनजर उनकी सुरक्षा पुख्ता करने के लिए जरूरी प्रबंध किए गए हैं। अदालत के पहले के आदेश का पालन करने के लिए केंद्र ने इस मामले में एक अतिरिक्त शपथपत्र भी दाखिल किया। स्वामी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील जयंत मेहता ने अदालत से कहा कि बंगले को खाली कर उसका कब्जा शनिवार तक प्राधिकारियों को सौंप दिया जाएगा।

मेहता ने दलील दी कि पूर्व सांसद के निजी आवास पर सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं अभी नहीं दी गयी है। उन्होंने कहा था कि सरकारी बंगला खाली करने के लिए उन्हें दी गयी आखिरी तारीख 26 अक्टूबर थी तो प्राधिकारियों ने नए आवास का ‘‘दौरा’’ तब किया जब 27 अक्टूबर को मामले को उच्च न्यायालय के समक्ष पेश किया गया था। केंद्र सरकार ने अदालत को 31 अक्टूबर को बताया था कि स्वामी के निजी आवास की सुरक्षा की समीक्षा की गयी है।

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