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BJP का 57 साल पुराना ‘किला’ ढहा, क्या अपनों ने बिगाड़ दिया सिंधिया का गणित?

20220718 142708 min
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ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) का गढ़ कहे जाने वाले ग्वालियर शहर पर कांग्रेस ने कब्जा कर लिया है। बीजेपी का 57 साल पुराना किला शोभा सिकरवार ढाह दिया। बीजेपी की लहर होने के बावजूद ग्वालियर में बीजेपी की महापौर प्रत्याशी हार गई। इसके लिए सीधे तौर पर पार्टी के उन नेताओं को भी जिम्मेदार माना जा सकता है, जिनकी अनदेखी बीजेपी द्वारा पिछले दिनों की गई। इसकी शुरुआत टिकट वितरण से ही हो गई थी।

दरअसल, बीजेपी की महापौर प्रत्याशी के टिकट वितरण को लेकर कई बैठकों का दौर चला था। मध्य प्रदेश के सभी नगर निगम के बीजेपी के महापौर प्रत्याशी तय हो गए थे, लेकिन ग्वालियर नगर निगम के महापौर प्रत्याशी को सबसे आखिर में टिकट दिया गया था। इसके पीछे की वजह केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच की खींचतान बताई गई थी। बताया गया था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने हिसाब से महापौर प्रत्याशी तय करना चाहते थे, लेकिन नरेंद्र सिंह तोमर इसके लिए राजी नहीं हुए।

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बाद में जब सुमन शर्मा का नाम घोषित हुआ तो यह बात सामने निकल कर आई थी कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की बात मानी गई और सिंधिया की बात को पार्टी ने दरकिनार कर दिया। इसके बाद से ही सिंधिया खेमे में हलचल तेज हो गई थी। माना तो यह भी जा रहा था कि अब सिंधिया इस चुनाव में दिलचस्पी नहीं लेंगे, इसके बावजूद ज्योतिरादित्य सिंधिया लगातार ग्वालियर आए और उन्होंने चुनाव प्रचार भी किया। लेकिन जिस तरीके से उनके मनमाफिक महापौर प्रत्याशी का टिकट घोषित नहीं हुआ था, तो लगता था कि कहीं ना कहीं बीजेपी को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। अब तो रिजल्ट भी सबके सामने है।

चर्चा तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा को लेकर भी है। अनूप मिश्रा बीजेपी में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने में लगे हैं। लंबे समय से उन्हें पार्टी के पुराने नेताओं द्वारा भाव नहीं दिया जा रहा है। कहा तो ये भी जा रहा है कि इसी के चलते वे सिंधिया के नजदीक आ गए हैं। बताया जाता है कि पिछले दिनों जब बीजेपी ने एक निजी होटल में नगर निगम ग्वालियर के लिए अपना वचन पत्र जारी किया था, उस समय पूर्व मंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता अनूप मिश्रा को मंच पर जगह नहीं दी गई थी। इस बात से अनूप मिश्रा नाराज हो गए और कार्यक्रम में से उठकर सीधे अपने घर चले गए थे।

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वहीं, इस बात की जानकारी जब बीजेपी प्रत्याशी सुमन शर्मा को लगी थी तो वह अनूप मिश्रा के घर पहुंच गई थी। सोशल मीडिया पर इस वाक्ये को लेकर ब्राह्मण समाज ने बीजेपी के खिलाफ वोट करने तक का ऐलान कर दिया था। सुमन शर्मा ने अनूप मिश्रा के पैर छुए, उनके सामने हाथ जोड़े, यहां तक कि उन्होंने आंसू भी बहाए। तब कहीं जाकर अनूप मिश्रा ने अपनी नाराजगी छोड़ दी और सुमन शर्मा को माफ कर दिया था। अनूप मिश्रा ब्राह्मण समाज का नेतृत्व करते हैं, इसलिए सीधे तौर पर ब्राह्मण वोट भी बीजेपी से कटता हुआ नजर आया है।

इसके अलावा बीजेपी के बागी नेताओं ने भी बीजेपी का गणित बिगाड़ कर रख दिया। ग्वालियर में नगरीय निकाय चुनाव में पार्षद प्रत्याशियों के टिकट वितरण को लेकर बीजेपी के कई नेता बागी हो गए। उन्होंने बीजेपी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने न केवल बीजेपी के पार्षद प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ा बल्कि बीजेपी की महापौर प्रत्याशी के खिलाफ भी जमकर माहौल बनाया। जिसका नतीजा यह हुआ कि बीजेपी के महापौर प्रत्याशी की नैया डगमगा गई।

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