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नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से बड़ा कारनामा तो ‘बाइक बोट’ के मालिक ने कर डाला, जानें घोटाले पर विस्तार से..

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Bike Boat Scam : बाइक बोट कंपनी की ओर से 42 हजार करोड़ का फ्रॉड हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के फ्रॉड से भी बड़ा माना जा रहा। पुलिस के सीनियर अधिकारियों की जांच में लीपापोती के कारण फ्रॉड समय से लोगों के सामने नहीं आ सका। अब इस मामले में सीबीआई की ओर से कंपनी के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर संजय भाटी और 14 अन्य लोगों पर केस करने के बाद ऐसे पुलिस अधिकारियों की भी परेशानी बढ़ेगी। वहीं दूसरी ओर फ्रॉड के शिकार हुए हजारों लोगों में खुशी है और न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

निवेश करने वाले लोगों का आरोप है कि उन्हें पैसे नहीं दिए गए। बाद में संचालक फरार हुआ तो लोगों ने केस कराने शुरू किए। दादरी कोतवाली एरिया के कोट गांव में बाइक बोट का मुख्य ऑफिस बनाया गया। बाइक बोट घोटाला (Bike Boat Scam)  सामने आने के बाद निवेशकों को साधने के लिए लाखों फर्जी चेक तक दिए गए। लेकिन अधिकांश लोगों के चेक बाउंस हो गए। पुलिस ने कुछ लोगों के मुकदमे दर्ज नहीं किए तो लोगों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट के आदेश पर मुकदमे दर्ज कराएं।

मुख्य आरोपी संजय भाटी बसपा नेता, जो गौतमबुद्ध नगर में लोकसभा प्रभारी रहा था और कंपनी का डायरेक्टर था जो जेल में बंद है। इसका साथी लखनऊ निवासी बीएन तिवारी ने नोएडा में रहकर न्यूज चैनल चलाता था। उसी चैनल पर बाइक बोट का जमकर प्रचार प्रसार किया था। नोएडा से ही लखनऊ तक के अधिकारियों से संबंध बना लिए थे। बाइक बोट के प्रसार के लिए चैनल का प्रयोग किया जाता था। बाइक बोट में निवेश की गई रकम से ही चैनल का शुभारंभ किया था।

बता दें कि सीबीआई से पहले इस केस में ईडी ने जांच शुरू की थी। एजेंसी की ओर से कंपनी के प्रमोटरों की 216 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की थी। सीबीआई ने अपनी एफआईआर में लिखा है कि 2 लाख लोगों से ठगी का यह मामला है। इसके तहत कंपनी ने विज्ञापन जारी करके लोगों से स्कीम में निवेश की अपील की थी। सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने अपनी जांच में पुलिस की ढिलाई पर भी सवाल उठाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक एसएसपी और एसपी क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपनी शिकायतों को वापस लेने के लिए दबाव बनाया था। वही अब सीबीआई ने अगर इस मामले की फाइल खोलने शुरू की तो लखनऊ से लेकर नोएडा तक के कई पुलिस व प्रशासन के सीनियर अधिकारियों से लेकर जांच करने वाले इंस्पेक्टर लेवल के अधिकारी फंस सकते हैं। सूत्रों के अनुसार बाइक बोट की एक पार्टी में लखनऊ के कई सीनियर नेता और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी भी जांच के घेरे में आ सकते हैं। कई पार्टियों मे उनके शरीक होने की चर्चा है।

बाइक बोट कंपनी के मालिक संजय भाटी, राजेश भारद्वाज, विजयपाल कसाना, हरीश कुमार, विनोद कुमार, संजय गोयल, विशाल कुमार, राजेश सिंह यादव, पुष्पेंद्र सिंह, विनोद कुमार, आदेश भाटी, सचिन भाटी, करणपाल, सुनील कुमार और पवन भाटी, बीएन तिवारी निवासी विवेक खंड, गोमतीनगर लखनऊ, ललित कुमार निवासी मेरठ, वी के शर्मा, दिनेश पांडे, सत्येंद्र सिंह भसीन निवासी दिल्ली, रविंद्र और रेखा निवासी जालंधर पंजाब, तरुण शर्मा, विदेश भाटी, मनोज कुमार त्यागी निवासी पिलखुआ हापुड़ और अनिल शाह निवासी नई दिल्ली के खिलाफ मई ओर जून 2021 को पुलिस कमिश्नर के अनुमोदन के बाद थाना दादरी में गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।

बाइक बोट फर्जीवाड़े के आरोपितों पर कंपनी एक्ट के तहत शिकंजा कसा है। मामले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू मेरठ की टीम ने जुलाई 2021 में आरोपितो पर दर्ज सभी केसों में पर कंपनी एक्ट की धारा 75(ए) बढ़ा दी है। गौतमबुद्ध नगर के दादरी थाने में आरोपितों पर 90 से अधिक केस दर्ज हैं और 75 आरोपित गिरफ्तार कर जेल भेजे गए हैं। मेरठ के तरवेंद्र मलिक ने बताया कि दादरी के कोट गांव में कंपनी के शुभारंभ के बाद 10 दिसंबर 2018 में रक्तदान शिविर लगाकर निवेशकों ने 62100 यूनिट रक्त दान किया था। खून भी आगे इन्होंने बेच डाला था।

बाइक बोट टैक्सी स्कैम में दो लाख सैनिकों व करीब 6 लाख अन्य नागरिकों से 42 हजार करोड़ रुपये की ठगी हुई है। जिसे लेकर देशभर में हजारों मुकदमे दर्ज हुए हैं। 24 से अधिक आरोपित जेल में बंद हैं। सीबीआई ने प्राइवेट कंपनी बाइक बोट की ओर से किए गए करीब 15 हजार करोड़ के घोटाले में केस दर्ज किया है। आरोप है कि इस कंपनी ने देशभर के करीब 2 लाख लोगों के साथ ठगी की है। ठगी करने के मामले में सीबीआई ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय भाटी सहित 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

सीबीआई की 20 अक्टूबर 2021 को दर्ज की एफआईआर के मुताबिक कंपनी ने बाइक टैक्सी में निवेश करने के लिए लाखों लोगों को ऑफर दिया गया। कंपनी अगस्त 2017 में ‘बाइक बोट नाम की योजना लेकर आई। योजना 2019 की शुरुआत तक चली और ठगी की गई। बाइक बोट योजना गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड (जीआईपीएल) कंपनी की ओर से निकाली गई थी। यह कंपनी 2010 में कानपुर में रजिस्टर्ड की गई थी।

कंपनी का रजिस्टर्ड ऑफिस ग्रेटर नोएडा बनाया गया। योजना के तहत निवेशकों को 62,100 रुपये निवेश करने के लिए कहा गया था। निवेशक को बाइक से हर माह निश्चित 5175 रुपये बाइक का किराया मिलना था। कंपनी ने निवेशकों से 1, 3, 5 या 7 बाइकों में निवेश करने का ऑफर दिया गया। योजना में मासिक रेंटल इनकम बोनस और रिन्युअल इनकम भी शामिल थी।

इस ऑफर से करीब 15 हजार करोड़ की ठगी लोगों के साथ की गई। लोगों को भारी रिटर्न का सपना दिखाया गया लेकिन उन्हें मिला कुछ नहीं उल्टे कंपनी के लोग ये रकम लेकर फरार हो गए। जानकारी के मुताबिक सीबीआई से पहले इस मामले में ईडी ने भी जांच शुरू की थी। एजेंसी की ओर से कंपनी के प्रमोटरों की 216 करोड़ की प्रॉपर्टी जब्त की गई थी। सीबीआई की ओर से दर्ज केस में पुलिस की ढिलाई बरतने पर भी सवाल खड़े किए हैं। सीबीआई की एफआईआर में इस बात का भी जिक्र है कि एसएपी और एसपी क्राइम ने लोगों पर केस वापस लेने का दबाव बनाने की कोशिश की।

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सोर्स – navbharattimes.indiatimes.com.  Bike Boat Scam


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