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बीएचयू से जिस छात्र को दो साल पहले ले गई थी पुलिस, अब उसे बताया मृत

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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के लापता छात्र शिव त्रिवेदी की मौत हो चुकी है। शिव के पिता प्रदीप त्रिवेदी ने अपने बेटे को खोजने में दिन-रात एक कर दिए। लापता होने के दो साल से ज्यादा समय के बाद सीबी-सीआईडी की जांच में सामने आया है कि साल 2020 में स्थानीय पुलिस ने जिस शव का अंतिम संस्कार किया था, वह 24 वर्षीय छात्र शिव त्रिवेदी का ही था। शिव, 12 फरवरी, 2020 को लापता हो गए थे। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र शिव कुमार त्रिवेदी मध्य प्रदेश के रहने वाले थे। सीबी-सीआईडी जांच अधिकारी ने पाया कि डीएनए परीक्षण के बाद शव की पहचान की गई थी, जो कि लापता हुए शिव त्रिवेदी का है। शिव का शव, उसी साल 15 फरवरी को वाराणसी के रामनगर पुलिस थाने के एक तालाब में मिला था। इस मामले में शिव के पिता प्रदीप कुमार त्रिवेदी ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई थी।

इस मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना बताया गया है। दरअसल 20 अगस्त, 2020 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने छात्र के लापता होने के संबंध में दायर एक याचिका का संज्ञान लिया था; जिसे आखिरी बार शहर के लंका पुलिस स्टेशन में 12 फरवरी को देखा गया था। नवंबर में, इस मामले की जांच कोर्ट द्वारा सीबी-सीआईडी को स्थानांतरित कर दी गई थी। वहीं, इस मामले में पुलिसिया रवैये पर भी छात्र के पिता ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

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सीबी-सीआईडी ने अपनी जांच के दौरान पाया कि युवक का शव लंका पुलिस थाने से 5 किलोमीटर दूर एक तालाब में मिला था और उसका “लावारिस शव” के रूप में अंतिम संस्कार किया गया था। उसके लापता होने के तुरंत बाद, शिव कुमार के पिता प्रदीप ने दावा किया था कि जब उसे (शिव) पुलिस स्टेशन लाया गया और जिस रात वह गायब हुआ; उन्हें इस बारे में पुलिस स्टेशन द्वारा कोई सूचना नहीं दी गई थी। 24 वर्षीय छात्र शिव के पिता प्रदीप ने बताया था कि एक फोन कॉल के बाद उसे बीएचयू के एम्फीथिएटर ग्राउंड से कुछ पुलिस कर्मियों ने उठाया था और फिर लंका पुलिस स्टेशन ले जाया गया। इस मामले में हाई कोर्ट में प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले अतिरिक्त सरकारी वकील सैयद अली मुर्तजा ने शुक्रवार को कहा कि स्थानीय पुलिस के जांच अधिकारी ने तालाब में मिले लावारिस शव की अनदेखी की थी।

वकील सैयद अली मुर्तजा ने आगे कहा कि स्थानीय पुलिस की अनदेखी के बाद सीबी-सीआईडी ने कदम उठाते हुए शरीर से निकाले गए दांतों और बालों का डीएनए टेस्ट कराया था, जो कि शिव के पिता के डीएनए से मैच कर गया था। इस मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल ने गुरुवार को की थी और इसे 14 जुलाई को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

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एजीए सैयद अली मुर्तजा ने आगे कहा, “एक फोन आने के बाद छात्र को लंका पुलिस स्टेशन लाया गया था, जहां उसे खाना दिया गया था और रुकने के लिए भी कहा गया था। लेकिन उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और वह बिना किसी को बताए वहां से चला गया। इसमें पुलिस अत्याचार का कोई मामला नहीं है।” जबकि शिव के परिजनों की तरफ से पेश हुए वकील सौरभ तिवारी ने मामले में पुलिस जांच में चूक के बारे में कई सवाल उठाए हैं।

ऐसे में अदालत ने उनसे (वकील सौरभ तिवारी) एक हलफनामे में अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज जमा करने को कहा है। वकील तिवारी ने कहा कि “मैंने अदालत को अवगत कराया है कि कैसे एक छात्र रहस्यमय परिस्थितियों में पुलिस हिरासत से गायब हो गया। हैरानी भरी बात तो यह है कि पुलिस छात्र की तलाश करने के लिए दूसरे राज्यों में गई तो लेकिन उन्होंने लावारिस शवों के लिए आस-पास के पुलिस थानों की जांच नहीं की।

वकील सौरभ तिवारी के मुताबिक, थाने में तीन सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे थे लेकिन लापता छात्र के पिता को बताया गया कि उस दिन कोई कैमरा काम नहीं कर रहा था। ऐसे में जब उन्होंने वाराणसी पुलिस आयुक्तालय में एक आरटीआई के माध्यम से पता किया गया तो उसमें बताया गया कि जिस दिन छात्र लापता हुआ, उस वक्त पुलिस स्टेशन के के तीनों कैमरे चल रहे थे। वकील ने कहा, मामले में लापरवाही ऐसी हुई कि सीसीटीवी फुटेज को जांच में शामिल ही नहीं किया गया। साथ ही सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि स्थानीय पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट पर छह महीने तक कोई जांच ही नहीं की गई। जिस पर कहा गया कि यह गंभीर मामला है।

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सोर्स – jansatta.com


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