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ज्ञानवापी मस्जिद के बाद अब उठा ‘भोजशाला’ मामला, जानें पूरा मामला विस्तार से…

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Bhojshala Dispute: वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर दावा किया जा रहा है कि प्राचीन विश्वेश्वर मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर मस्जिद बनाई गई थी जिसको लेकर मस्जिद परिसर में अब सर्वे का काम चल रहा है. सर्वे की रिपोर्ट 17 मई को अदालत के सामने पेश की जाएगी. वहीं इस मामले के साथ अब धार जिले की भोजशाला का मामला भी उठते दिख रहा है. भोपाल से ढाई सौ किलोमीटर दूर इंदौर के पास बसा धार ऐतिहासिक शहर है जिसे राजा भोज से जोड़कर देखा जाता है.

शहर के एक किनारे में बनी है भोजशाला जिसके बारे में कहा जाता है कि उसे दसवीं सदी में राजा भोज ने बनाया था. माना जाता है वो एक संस्कृत पाठशाला थी जिसमें देवी सरस्वती या वाग्देवी की प्रतिमा भी लगी थी जिसे अंग्रेज अपने साथ लंदन ले गए. इसी परिसर से सटी हुई है सूफी कमाल मौला की दरगाह जो तेरहवीं सदी के खिलजी वंश की है. तेरहवीं सदी के बाद के दस्तावेजों में भोजशाला को कमाल मौला की मस्जिद बताया गया है तो यहां परिसर में नमाज पढ़ी जाती है.

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कई लंबे सालों तक चले विवादों के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एएसआई ने इस परिसर को अपने कब्जे में लिया है और मंगलवार को हिंदुओं को फूलों के साथ पूजा करने और शुक्रवार को मुसलमानों को दोपहर की नमाज पढ़ने की छूट दी है. बाकी दिन वो पुरातत्व विभाग की इमारत है टिकट लेकर कोई भी आ जा सकता है. धार में सक्रिय हिंदू संगठन भोजशाला को सौंपने के लिये लंबे समय से आंदोलन चलाते आ रहे हैं. 2003 के बाद से चल रहे बीजेपी शासन से उनको उम्मीदें थी कि उनकी सुनी जाएगी मगर 2013 से केंद्र में बीजेपी की सरकार आने के बाद भी उन नियमों में जरा भी तब्दीली नहीं हुई.

भोजशाला में मंगलवार को नियम से हनुमान चालीसा पढ़ी जा रही है. इसे वो सत्याग्रह कहते हैं. मंगलवार की सुबह भी गोपाल शर्मा और उनके साथियों ने राष्ट आराधना के कुछ गीतों के बाद हनुमान चालीसा पढ़ा और उम्मीद जाहिर की कि ये परिसर हिंदुओं को आज नहीं तो कल मिलेगा. धार में एबीपी न्यूज़ की टीम ने कुछ मुस्लिम समाज के लोगों से भी बात की तो बिना कैमरे के सामने आये उनका दावा था कि कागजों पर उनका दावा मजबूत है चाहे धार स्टेट के कागज हों या फिर आजादी के बाद के ये कमाल मौला मस्जिद है इस पर उनका हक है. मगर जब हमने उनसे पूछा कि यदि कोर्ट आस्था के आधार पर फैसला देने लगा तो क्या करोगे तो वो चुप ही रहे.

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एबीपी की टीम मंगलवार को भोपाल पहुंची और बुधवार की दोपहर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में हिंदू फ्रंट फार जस्टिस की ओर से याचिका लगा दी गई. भोजशाला परिसर हिंदुओं को देने और मुसलमानों को नमाज पढ़ने से रोकने के लिये याचिका दाखिल की गई. हिन्दू पक्ष की याचिका वकील हरिशंकर जैन ने लगायी है जिन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद और कुतुब मीनार का विवाद भी उठाया था. कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर संबंधित पक्षों को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने को कहा है. अचानक आयी इस याचिका और कोर्ट के आदेश के बाद धार का मुस्लिम पक्ष हरकत में हैं और कह रहा है कि भोजशाला पर हक के लिये कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी.

मगर अब साफ है कि अयोध्या, काशी के बाद भोजशाला भी हिंदू संगठनों की उसी कड़ी का हिस्सा है जिसे वो इतिहास की भूल कहकर सुधारने निकले हैं. जानकार कहते हैं कि इतिहास की गलतियों से सबक लेना चाहिए मगर यहां तो इतिहास की गलतियों को सुधारने की धुन सवार है.

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सोर्स – abplive.com


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