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बनारस का एकमात्र अंधविद्यालय बंद, नेत्रहीन छात्रों ने किया प्रदर्शन

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प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय को बंद कर दिया गया है, जिसके ख़िलाफ़ गुरुवार को दृष्टिबाधित छात्रों ने बीएचयू स्थित विश्वनाथ मंदिर के सामने प्रदर्शन किया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सरकार हम विकलांग छात्रों को दिव्यांग कहकर दया न दिखाए बल्कि हम विकलांग, दृष्टिबाधित छात्रों को उनका हक दिया जाए।

पूरे उत्तर प्रदेश में कुल केवल 5 अन्ध विद्यालय है जिसमें वाराणसी का सबसे बड़ा 250 सीटों का विद्यालय है जो सेवा स्मृति ट्रस्ट द्वारा संचालित होता है लेकिन आर्थिक तंगी का हवाला देकर कक्षा 9 से 12 तक बंद किया जा चुका है और विद्यालय में नए छात्रों का प्रवेश नहीं हो रहा। ऐसे में हम बनारस भर के सभी छात्रों, नागरिकों से अपील करते हैं कि विकलांग छात्रों के अधिकार के लिए साथ आयें।

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ये अन्ध विद्यालय 1972 में बना था तथा इसे सरकार द्वारा अनुदान भी प्राप्त होता है। जनता की आस्था का इस्तेमाल दृष्टिहीनता पर किये जाने के कारण दानदाताओं का भी तांता लगा रहता है मगर छात्रों के जीवन पर इन सुविधाओं का कोई असर नहीं पड़ता। इन पैसों और सुविधाओं का इस्तेमाल ट्रस्ट अपने व्यवसायिक कामों में करता है। यहां तक कि दान दाताओं को आकर्षित करने के लिए परीक्षा के दिनों में भी विद्यालय प्रांगण में ही कथाओं जैसे बड़े-बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिनका कोई भी सार्थक असर दृष्टिहीनों पर नहीं पड़ता।

वक्ताओं ने कहा कि जहां दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं के लिए तमाम विद्यालय खोने जाने चाहिए वहां मोदी जी के संसदीय क्षेत्र में कोई अन्ध विद्यालय बंद किया जाना बहुत दुःखद और शर्मनाक है।

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इस अन्ध विद्यालय को सरकार पूर्णतया अपने अधिकार क्षेत्र में ले और हमें हमारा अधिकार भीख या सेवा के बजाय अधिकार बोध के साथ प्रदान किया जाए। विद्यालय से निकाले गए छात्रों को वापस दाखिल किया जाए और उनकी कक्षाओं और परीक्षाओं का उचित प्रबंध किया जाए।

तत्काल प्रभाव से विद्यालय को पुनः संचालित किया जाए।, सभा में मुख्य रूप से शशि भूषण, अनिरुद्ध, राकेश, मंदीप, आकाश, रामकुमार आदि लोग शामिल रहे।

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सोर्स – mediavigil.com


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