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35 घंटे बाद पेड़ से उतारा गया साधु का शव, BJP MLA पर FIR के बाद राजी हुए समर्थक

20220806 174907 min
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राजस्थान के जालोर जिले में फांसी लगाकर खुदकुशी करने वाले साधु रविनाथ का शव 35 घंटे बाद पेड़ से उतार लिया गया. पुलिस-प्रशासन और आश्रम समर्थकों के बीच लंबी वार्ता के बाद यह सहमति बनी. अब आम लोगों की मौजूदगी में शव को पोस्टमार्टम के लिए जसवंतपुरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भेजा गया है. BJP विधायक पूराराम चौधरी पर FIR और इस मौत की जांच सीआईडी से कराने के आश्वासन के बाद ही समर्थक साधु के अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए हैं.

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दशरथसिंह ने बताया कि साधु रविनाथ ने सुसाइड नोट में बीजेपी विधायक पूराराम चौधरी सहित कुछ लोगों का नाम लिखा था. पुलिस ने विधायक सहित 3 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि राजपुरा रोड पर आश्रम के आगे जालोर के भीनमाल विधायक पूराराम चौधरी की जमीन है. गुरुवार को उसी जमीन को अपने कब्जे में लेने के लिए गए विधायक गए हुए थे और बुलडोजर के जरिए खाई खोद रहे थे.

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संत ने आश्रम के लिए रास्ता मांगा, लेकिन विधायक ने उनकी बात नहीं सुनी. इसके बाद खुदाई वाली जगह पर ही संत ने पेड़ पर फंदे से लटककर अपनी जान दे दी. सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने छानबीन में एक सुसाइड नोट को जब्त किया. बताया जा रहा है कि इस नोट में जमीन विवाद को लेकर भाजपा विधायक पूराराम चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. हालांकि, पुलिस ने जांच प्रभावित होने का हवाला देकर सुसाइड नोट को लेकर कुछ भी खुलासा करने से इनकार कर दिया.

उधर, साधु के गुस्साए समर्थकों ने अंतिम संस्कार करने से पहले इस सुसाइड नोट के खुलासे और घटना की सीबीआई सीआईडी जांच कराने की मांग की. उनका कहना था कि आश्वासन के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा. मौके पर मौजूद लोग साधु का शव पेड़ से उतारने को ही तैयार नहीं थे.

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इस मामले में अब पुलिस ने बीजेपी विधायक पूराराम चौधरी सहित तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और जांच का आश्वासन दिया गया, तब जाकर साधु के शव को पेड़ से नीचे उतारने की सहमति बनी.

वहीं, BJP विधायक पूराराम चौधरी का कहना है कि आत्महत्या के मामले की जांच होनी चाहिए. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. साधु के साथ न्याय होना चाहिए. मुझे तो इसमें हत्या का मामला प्रतीत होता है. हमने तो 2 दिनों से साधु के साथ राजी खुशी खेत को नपवाया था. हमारे बीच में कोई विवाद नहीं था. उनके कहने से ही हमने अपनी जमीन में से आश्रम के रास्ते के लिए जगह छोड़ी थी.

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