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हुबली में ईदगाह मैदान में ही होगी गणेश पूजा, हाई कोर्ट ने कहा- सुप्रीम कोर्ट का आदेश मान्य नहीं

20220831 183834 min
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने ये कहते हुए हुबली की ईदगाह मैदान में गणेश महोत्सव की अनुमति दे दी है कि बेंगलुरू के चामराजपेट ईदगाह मामले की तरह इस मामले में ज़मीन के मालिकाना हक़ को लेकर कोई विवाद नहीं है. मंगलवार को ही देर रात 10 बजे कर्नाटक हाई कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई. करीब एक घंटे की जिरह के बाद जस्टिस अशोक एस किनागी ने रात पौने 12 बजे अपना फ़ैसला सुनाया.

जस्टिस किनागी ने कहा, “मौजूदा मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश मान्य नहीं है. मुझे याचिकाकर्ता की ओर से अंतरिम आदेश पारित करने की अर्ज़ी में कोई आधार नहीं दिखता. इसलिए इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अंतरिम आदेश की मांग को खारिज किया जाता है. कोर्ट ने हुबली-धारवाड़ नगर निगम (एचडीएमसी) की ओर से हिंदू संगठनों को ईदगाह मैदान में गणेश उत्सव मनाने की इजाज़त देने वाले आदेश को बरकरार रखा. मंगलवार को दिन में बेंगलुरू की चामराजपेट ईदगाह मैदान से जुड़े एक अन्य मामले में जस्टिस इंदिरा बनर्जी की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आदेश देते हुए कहा था, “”बुधवार और गुरुवार को ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी की पूजा आयोजित नहीं की जाएगी.

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मामले की अगली सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 23 सितंबर की तारीख तय की थी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को मामला सुलझाने के लिए हाई कोर्ट से संपर्क करने को कहा था. हुबली ईदगाह मैदान को लेकर अंजुमन-ए-इस्लाम ने हाई कोर्ट में अर्ज़ी दायर कर कहा था कि ईदगाह मैदान में गणेश प्रतिमा को स्थापित करने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश दिया जाए. ये पहली बार है जब हिंदू संगठनों ने हुबली धारवाड़ नगर निगम से यहाँ पूजा करने की अनुमति मांगी है. हालाँकि, याचिकाकर्ता ने ये भी स्वीकार किया कि उन्हें रमज़ान और बक़रीद सहित अन्य मौकों पर इसी ईदगाह में नमाज़ पढ़ने की मंज़ूरी दी जा चुकी है.

नगर निगम की ओर से कोर्ट में वरिष्ठ वकील ध्यान चिनप्पा ने कहा, “कल ये मेरे घर में भी पूजा का विरोध करेंगे. जस्टिस किनागी ने अपने आदेश में कहा, “इस तथ्य को लेकर कोई विवाद नहीं है कि ये संपत्ति नगर निगम की है और याचिकाकर्ता को केवल रमज़ान और बक़रीद के मौके पर इसका इस्तेमाल करने की इजाज़त मिली है. याचिकाकर्ता ख़ुद ये स्वीकार कर रहे हैं कि संपत्ति के मालिकाना हक़ को लेकर कोई विवाद नहीं है. इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि नगर निगम को किसी भी संप्रदाय की ज़मीन को पूजा स्थल के रूप में बदलने का कोई अधिकार नहीं है. इसपर अदालत ने कहा कि ईदगाह को पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 के तहत पूजा स्थल घोषित नहीं किया गया था.

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याचिकाकर्ता ने ऐसे कोई साक्ष्य भी पेश नहीं किए जो ये साबित करते हों की नगर निगम ने इस जगह को पूजा स्थल घोषित किया है. कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता के पास ऐसे सबूत होते, तो भी वो इस मुद्दे पर सवाल कर सकते हैं लेकिन ये अंतरिम आदेश पारित करने का आधार नहीं होता.कर्नाटक हाई कोर्ट ने बेंगलुरू ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी पूजा की अनुमति दे दी थी. इसके बाद कर्नाटक वक़्फ़ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.

शुरू में इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने की, लेकिन बाद में ये मामला तीन सदस्यीय पीठ को भेज दिया गया. वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल कर्नाटक वक़्फ़ बोर्ड का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. इस मामले को लेकर इलाक़े में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया था.

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