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स्मृति इरानी ने गूगल से सिली सोल्स कैफे से जुड़ा कंटेंट हटाने के लिए कहा, गूगल ने मांगे लिंक

20220809 110753 min
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से गूगल के एक आवेदन पर जवाब मांगा है। दरअसल ईरानी ने सिली सोल्स कैफे एंड बार मामले से जुड़ी मानहानिकारक सामग्री को यूट्यूब से हटाने का निर्देश देने के लिए कोर्ट का रुख किया था। ईरानी के इस आवेदन पर गूगल ने कोर्ट से कहा है कि वह खुद से ऐसी सामग्री नहीं हटा सकता है। गूगल का कहना है कि सिली सोल्स कैफे एंड बार के संबंध में कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने के लिए स्मृति ईरानी को वे लिंक (URL) देने होंगे जिन्हें हटाने के लिए कहा जा रहा है।

गूगल ने न्यायालय को बताया कि उसने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और उनकी बेटी के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री वाले वेब लिंक को हटाने के आदेश का अनुपालन किया है और कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता अन्य यूआरएल प्रदान कर सकती हैं जिन पर कार्रवाई की जाएगी। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने गूगल द्वारा दायर एक अर्जी पर नोटिस जारी किया और ईरानी से जवाब मांगा। गूगल ने 29 जुलाई के आदेश में संशोधन का अनुरोध किया है जिसमें अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को वादी और उनकी बेटी की छेड़छाड़ के जरिए तैयार तस्वीरों के साथ इस तरह की मानहानिकारक सामग्री, वीडियो, पोस्ट, ट्वीट, री-ट्वीट, कैप्शन टैगलाइन को हटाने का निर्देश दिया था।

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न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ण ने पिछले महीने पारित आदेश में कांग्रेस नेताओं जयराम रमेश, पवन खेड़ा और नेता डिसूजा को ईरानी के खिलाफ अपने सोशल मीडिया पोस्ट को डिलीट करने और हटाने का निर्देश दिया था। अदालत ने गूगल, ट्विटर और मेटा (फेसबुक की पैरेंट कंपनी) को अपने प्लेटफॉर्म से ऐसी सामग्री “या उससे मिलती-जुलती किसी भी चीज” को हटाने का निर्देश दिया था। गूगल की ओर से पेश अधिवक्ता ममता झा के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद निगम ने सोमवार को कहा कि वादी (स्मृति ईरानी) को ऐसी सामग्री के यूआरएल प्रदान करने की जरूरत है, जिसे अदालत के आदेश के अनुसार यूट्यूब से हटाया जाना जरूरी है।

अधिवक्ता ममता झा ने पीठ के पिछले आदेशों का हवाला दिया, जहां इस तरह की प्रक्रिया का पालन किया गया था। उन्होंने कहा, “अगर हमें [सामग्री हटाने के अनुरोध के बारे में] कोई संदेह होता है, तो हम वादी को इसके बारे में सूचित करेंगे और फिर वादी [स्पष्टीकरण के लिए] अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। झा ने तर्क दिया कि गूगल निर्णायक प्राधिकार नहीं है और यह तय नहीं कर सकता कि क्या हटाने की जरूरत है और क्या नहीं तथा वादी उन्हें वेबलिंक देने के लिए बाध्य है और इसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। ईरानी के वकील ने इस अर्जी का विरोध किया था।

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निगम ने अदालत को बताया कि Google को केवल एक URL प्रदान किया गया था और उसे अदालत के आदेश के अनुसार डिसैबल कर दिया गया है। अदालत को बताया गया कि ईरानी गूगल को और यूआरएल मुहैया करा सकती हैं और जैसे ही वे प्राप्त होंगे उन पर कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले अदालत ने कहा था कि ईरानी और उनकी बेटी विवाद का केंद्र बने गोवा में एक रेस्तरां-सह-बार की मालिक नहीं थीं और न ही उनके पक्ष में कभी लाइसेंस जारी किया गया था। साथ ही अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ तीनों कांग्रेस नेताओं के बयान फर्जी लगते हैं जो ‘‘दुर्भावनापूर्ण इरादे से’’ दिए गए।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा की वरिष्ठ नेता और उनकी बेटी का संबंध रेस्टोरेंट ‘सिली सोल्स कैफे एंड बार’ से है। ईरानी ने अपनी और अपनी 18 वर्षीय बेटी के खिलाफ कथित रूप से निराधार और झूठे आरोप लगाने के लिए कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। ईरानी ने यह कदम कांग्रेस नेताओं द्वारा आरोप लगाए जाने के बाद उठाया कि उनकी बेटी गोवा में अवैध रूप से एक बार चलाती हैं। कांग्रेस नेताओं ने मामले में मंत्री पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की थी।

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