India

सुप्रीम कोर्ट बोला- हिजाब की तुलना सिखों की पगड़ी और कृपाण से नहीं की जा सकती है

20220910 135832 min
आर्टिकल को शेयर ज़रूर करें :-

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि सिखों के पगड़ी पहनने की तुलना हिजाब से नहीं की जा सकती है. शैक्षणिक संस्थाओं के परिसर में हिजाब पहनने पर लगाए गए प्रतिबंध के फ़ैसले को कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा बरकरार रखने के ख़िलाफ़ दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये बात कही. जस्टिस हेमंत गुप्ता की अगुवाई वाली पांच जजों की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि पगड़ी और कृपाण सिखों के लिए अनिवार्य हैं. इसलिए सिखों के पगड़ी पहनने की हिजाब से तुलना अनुचित है क्योंकि सिख धर्म में पंचक अनिवार्य है. याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील निज़ामुद्दीन पाशा ने अपनी दलीलों में कृपाण और पगड़ी की तुलना हिजाब से करने की कोशिश की थी.

एडवोकेट पाशा ने कहा कि हिजाब पहनना मुस्लिम लड़कियों की धार्मिक रीति रिवाजों का हिस्सा है. उन्होंने ये भी पूछा कि क्या हिजाब पहनने वाली लड़कियों को स्कूल आने से रोका जा सकता है? उन्होंने ये दलील भी दी कि सिख छात्रों को पगड़ी पहनने की इजाजत है. निज़ामुद्दीन पाशा ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सांस्कृतिक रीति रिवाज़ों का भी संरक्षण किया जाना चाहिए. जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि कृपाण को संविधानिक संरक्षण मिला हुआ है इसलिए दोनों धर्मों के रीति-रिवाज़ों की तुलना न की जाए. “अगर संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत कपड़े पहनना पूर्ण मौलिक अधिकार है तो फिर कपड़े न पहनना भी इस अनुच्छेद के तहत अधिकार बन जाता है.

ये भी पढ़ें -: तिहाड़ जेल में कैदी के पेट में दर्द हुआ, जाँच हुवी तो पेट से निकले दो मोबाइल

कर्नाटक के स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध बरकरार रखने वाले हाई कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ अर्ज़ियों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के कई कड़े सवाल और टिप्पणियां कीं. इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ये भी कहा कि कर्नाटक हिजाब बैन मामले में सवाल सिर्फ़ स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध का है क्योंकि इसके अलावा कहीं भी हिजाब पहनने की मनाही नहीं है. इस साल जनवरी महीने में जब भारत के कई राज्यों में कड़ाके की ठंड थी, उस समय कर्नाटक में छिड़ा हिजाब विवाद पूरे देश में ताप बढ़ाने का काम कर रहा था. तबसे ये विवाद जारी है.

मार्च महीने में सरकारी शैक्षिक संस्थानों में हिजाब बैन को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा था कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है. इसी फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी. शीर्ष न्यायालय में जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई की. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ से अनुरोध किया कि इस मामले को पांच-सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजा जाए.

ये भी पढ़ें -: श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में कोर्ट ने एक पक्ष पर लगाया जुर्माना, पढ़ें विस्तार से…

उन्होंने दलील दी कि अगर कोई लड़की संविधान के अनुच्छेद 19, 21 या 25 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए हिजाब पहनने का फैसला करती है, तो क्या सरकार उस पर ऐसा प्रतिबंध लगा सकती है जो उसके अधिकारों का उल्लंघन करे. न्यायमूर्ति गुप्ता ने इसपर कहा, “हम इस बहस को अतार्किक अंत तक नहीं ले जा सकते…अगर आप कहते हैं कि कपड़े पहनने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है तो कपड़े न पहनने का अधिकार भी मौलिक अधिकार बन जाता है.” इस पर अधिवक्ता कामत ने कहा कि स्कूल में कोई भी कपड़े नहीं उतार रहा है.

कामत की ओर से क्रॉस, रुद्राक्ष और जनेऊ धारण करने के उदाहरणों के जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सब कपड़े के ऊपर नहीं पहने जाते, किसी को दिखाई नहीं देते. कोर्ट ने तर्क दिया कि कोई भी छात्रों की यूनिफ़ॉर्म उतरवाकर ये जांच करने नहीं जा रहा कि उन्होंने कौन सा धार्मिक प्रतीकचिह्न पहना है. पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “सवाल यह है कि कोई भी आपको हिजाब पहनने से नहीं रोक रहा है. आप इसे जहां चाहें पहन सकते हैं. प्रतिबंध सिर्फ़ स्कूल में है. हमारी चिंता केवल इसको लेकर है.

ये भी पढ़ें -: नवनीत राणा जिसे लव जिहाद बताकर थाने में भड़की थीं, उस केस में लड़की के बयान से ट्विस्ट

ये भी पढ़ें -: UP की जेल में बंद केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, पढ़ें विस्तार से…

ये भी पढ़ें -: असम CM की रैली में बवाल, मंच पर चढ़े TRS कार्यकर्ता ने जबरन खींचा माइक


आर्टिकल को शेयर ज़रूर करें :-