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सलमान रुश्दी की एक आंख की रोशनी गई, एक हाथ ने भी काम करना बंद किया

20221024 102212 min
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न्यूयार्क में 12 अगस्त को एक हमले के दौरान घायल हुए जाने-माने लेखक सलमान रुश्दी की एक आंख की रोशनी चली गई है और उनके एक हाथ ने भी काम करना बंद कर दिया है. इस बात की जानकारी सलमान रुश्दी के एजेंट ने दी. दरअसल, इस हमले के बाद लेखक को उत्तर-पश्चिमी पेनसिल्वेनिया के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हमले में उनके लीवर, आंख और एक हाथ की नस पर काफी गहरी चोटें आई थीं, जिसके बाद उनकी सर्जरी की गई थी.

रुश्दी के एजेंट एंड्रयू वायली ने एक स्पेनिश न्यूजपेपर को इंटरव्यू के दौरान बताया, “यह एक बेहद ही क्रूर हमला था. हमले में घायल हुए रुश्दी के घाव बहुत गहरे थे. उनके गले में काफी गंभीर तीन घाव लगे थे. जिसके चलते उनकी आंखो की रोशनी चली गई और उनके एक हाथ की नस भी कट गई, जिसके चलते उनके हाथ ने भी काम करना बंद कर दिया है.

इसके अलावा उनके सीने में और पूरे शरीर में लगभग 15 घाव थे.” हालांकि, वायली ने इस बात को स्पष्ट नहीं किया है कि रूश्दी अस्पताल में अभी कितने ठीक हुए हैं. लेकिन उन्होंने इस बात का उल्लेख किया है कि रुश्दी बच जाएंगे.

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बता दें कि 12 अगस्त को सलमान रुश्दी पर हमला करने वाले आरोपी की पहचान हादी मटर के रूप में हुई थी. जिसने खुद को बेकसूर बताया था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब हमला करने के आरोप लगाए गए तो 24 वर्षीय मटर ने चौटाउक्वा काउंटी न्यूयॉर्क की एक अदालत में खुद को बेकसूर बताया.

सलमान रुश्दी की ‘द सैटेनिक वर्सेज’ किताब ने ऐसे विवादों को जन्म दिया, जो जिंदगीभर उनके साथ बने रहे. उनकी इस किताब को इस्लाम विरोधी और ईश निंदा करने वाला माना गया. इसी वजह से 1980 के दशक में उन्हें ईरान से जान से मारने की धमकियां मिलीं. ये किताब 1988 से ही ईरान में बैन है, लेकिन इसकी वजह से सलमान रुश्दी हमेशा चरमपंथियों के निशाने पर रहे.

सलमान रुश्दी को ईरान से मिली धमकी किसी भी हालत में मामूली नहीं थी. क्योंकि उन्हें मारने वाले को 30 लाख डॉलर इनाम देने का ऐलान हुआ था. वहीं ईरान में गणतंत्र के संस्थापक और देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह रुहोल्ला ख़ुमैनी ने उनके खिलाफ 1989 में फतवा भी जारी किया था. हालांकि बाद में ईरान की सरकार ने इसे उनका निजी विचार बताते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया था. साल 2012 में भी सलमान रुश्दी को जान से मारने की धमकी मिली और ईरान के एक धार्मिक संगठन ने ईनाम की राशि को बढ़ाकर 33 लाख डॉलर कर दिया.

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