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सरकार ने मान लिया है कि 23-24 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में 15 करोड़ ग़रीब हैं : रवीश कुमार

ravish kumar tripura violence
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सरकार ने मान लिया है कि 23-24 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में 15 करोड़ ग़रीब हैं। ग़रीबी पिछली और मौजूदा सरकारों की आर्थिक नीतियों की विरासत होती है। और दोनों की आर्थिक नीतियाँ एक ही हैं। आक्रमकता और भयावहता में अंतर है। कह सकते हैं कि उन्हीं का क्रूर विस्तार हैं। मोदी सरकार अस्सी करोड़ ग़रीब लोगों को मुफ़्त अनाज दे रही है।

वह नहीं बताएगी या अब बताएगी तो मुफ़्त टीका की तरह फ़र्ज़ी आँकड़ों पर ही भरोसा करना होगा कि सात साल में ग़रीबी बढ़ी है या घटी है। यूपी में कितना शानदार विकास हुआ होगा कि 15 करोड़ लोग ग़रीब हैं। ये सरकार ही मानती है। कोई कह सकता है कि चुनाव के लिए यूपी में होली तक मुफ़्त अनाज दिया जाएगा लेकिन ग़रीबी इतनी है कि देना ही पड़ेगा।

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लगता है एक लीटर खाद्य तेल फ़्री में दिया जाएगा। जिसकी महंगाई से जनता परेशान है। इसी तेल का दाम बढ़ने लगा तब हरियाणा सरकार ने राशन से हटा दिया मगर यूपी में चुनाव है तो दिया जा रहा है।

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अगर आपको लगता है कि विकास नहीं हुआ है तो आप उन मूर्तियों, स्मारकों की तरफ़ देखिए जिन्हें विकास के बदले बनाया जा रहा है। जिसे देखकर आप विकास मान लेते हैं। और हर ख़ेमे की राजनीतिक बहस देखिए, उसमें आर्थिक नाइंसाफ़ी पर कोई बहस नहीं है। जाति और धर्म की पहचान को लेकर एक से एक महंत बन गए। हर दूसरा आदमी इस आर्थिक नीति से विस्थापित हो रहा है लेकिन बहस हो रही है जाति और धर्म की।

धर्म के नाम पर बहुसंख्यकवाद है तो जाति के नाम पर गिरोहवाद। लोगों की हालत ये हो गई है कि हवाई जहाज़ में भोजपुरी बोल देने से खुश हो जाते हैं कि भाषा के साथ न्याय हो गया। वो देखना भूल जाते हैं कि जहाज़ दिखा कर रेलगाड़ी से ग़रीबों को बाहर किया जा रहा है। ग़रीब लोग स्लीपर बसों में ठूँसा कर यात्राएँ कर रहे हैं। लंबी दूरी की और महँगी।

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