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शिंदे और उद्धव की मुलाकात पर सियासत गर्म, शिवसेना नेता ने मातोश्री पर मुलाकात का किया दावा

20220717 152638 min
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उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) की मुलाकात को लेकर शिवसेना नेता ने बड़ा दावा किया है। वहीं इसके बाद से ही महाराष्ट्र की राजनीति में नई अटकलें लगाई जाने लगी हैं। इसको लेकर कोई कह रहा है कि यह बीजेपी और शिवसेना का प्रीप्लान गेम था तो कोई इसे अलग ही अंदाज में सियासी दांव करार दे रहा है।

फिलहाल महाराष्ट्र की सत्ता के सियासी गलियारे में यह चर्चा आम हो चली है कि क्या बीजेपी और शिवसेना फिर से एक हो जाएंगे। यह सियासी मायने पैदा हो रहे हैं शिवसेना नेता दीपाली सैयद (Deepali Sayed) के ट्वीट को लेकर… उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा देने से पहले कई बार बागी विधायकों से बातचीत कर उन्हें मनाने की कोशिश की।

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वहीं शिंदे समेत बागियों का मत था कि वे एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार नहीं चलाएंगे। जिसके बाद शिवसेना के 40 और एकनाथ शिंदे समेत 10 निर्दलीय विधायकों ने अपना दावा अलग पेश किया था और एमवीए की सरकार को सत्ता से बाहर होना पड़ा था। वहीं करीब हफ्ते भर चले सियासी ड्रामे के बाद एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री और देवेंद्र फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

दीपाली सैयद ने एक ट्वीट कर महाराष्ट्र की राजनीति में नया पासा फेंक दिया है। दीपाली सैयद ने अपने ट्वीट में कहा, ‘यह सुनकर बहुत अच्छा लगा है कि अगले दो दिनों में आदरणीय उद्धव साहब और आदरणीय शिंदे साहब शिवसैनिकों की भावनाओं पर चर्चा करने के लिए पहली बार मिलेंगे। साफ है कि शिंदे साहब शिवसैनिकों की तड़प को समझते थे और उद्धव साहब ने परिवार के मुखिया की भूमिका बड़े दिल से निभाई थी। इसमें मध्यस्थता में मदद करने के लिए भाजपा नेताओं को धन्यवाद। एक हॉट स्पॉट इंतज़ार कर रहा होगा।

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दीपाली सैयद के ट्वीट के बाद से माना जा रहा है कि क्या वास्तव में महाराष्ट्र की सियासत में कुछ ऐसा होने वाला है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाएगा या फिर यह महज औपचारिकता ही रह जाएगी। ऐसे में यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि क्या अगर शिंदे और उद्धव की मुलाकात होती है तो वास्तव में बीजेपी मीडिएटर की भूमिका में नजर आएगी।

दरअसल एक दिन पहले ही दीपाली सैयद ने एक और ट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘माननीय आदित्य साहब जल्द ही कैबिनेट में आएं। मातोश्री पर शिवसेना के 50 विधायक पेश हों। आदरणीय उद्धव साहब और आदरणीय शिंदे साहब एक हो जाएं। शिवसेना कोई गुट नहीं हिंदुत्व का गढ़ है। उस पर हमेशा भगवा लहराता रहेगा।

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