India

रामदेव के बयान पर कोर्ट बोला- तोड़-मरोड़कर मत बोलिए, साफ-साफ कहें कोरोनिल COVID-19 का इलाज नहीं

20220804 224758 min
आर्टिकल को शेयर ज़रूर करें :-

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन द्वारा दायर किए गए मामले में योग गुरू रामदेव का स्पष्टीकरण मानने से इनकार कर दिया। इस स्पष्टीकरण में उन्हें उनकी फर्म पतंजलि आयुर्वेद की बनाई गई कोरोनिल के बारे में गलत जानकारी देने से रोकने की मांग की गई थी। रामदेव ने जून 2020 में कोरोनोवायरस महामारी की पहली लहर के बीच कोरोनिल लॉन्च किया था। कोरोनिल दवा को लेकर बाबा रामदेव ने दावा किया था ये दवा सात दिनों में कोविड की बीमारी को ठीक कर सकती है। हालांकि, उनकी कंपनी बाबा के इस दावे के समर्थन में कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं दे पाई थी।

अदालत में पिछली सुनवाई के दौरान बाबा रामदेव और पतंजलि ने कहा था कि वे दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन बार और बेंच के वकील के परामर्श से इस मामले पर स्पष्टीकरण जारी करेंगे। हालांकि गुरुवार को जस्टिस अनूप जयराम भंभानी को बताया गया कि स्पष्टीकरण पर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई है। इसके बजाय, रामदेव के वकील ने एक प्रस्तावित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया, जिसे न्यायाधीश ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

ये भी पढ़ें -: मथुरा की शाही मस्जिद ईदगाह में जलाभिषेक की इजाजत मांगी, अदालत ने याचिका खारिज की

न्यायाधीश अनूप जयराम भंभानी ने देखा कि स्पष्टीकरण “अपनी पीठ पर थपथपाने” जैसा था और योग गुरु द्वारा किए गए किसी भी दावे को शायद ही वापस लिया हो। जज ने उस स्पष्टीकरण पर टिप्पणी करते हुए कहा, “देखिए, बात यह है कि ऐसे अनावश्यक शब्दों और बारीकियों से दूर रहना चाहिए।” जज ने आगे कहा, “आपने जनता को दो धारणाएं दीं: एक यह है कि एलोपैथिक डॉक्टरों के पास इलाज नहीं है और दूसरा यह कि कोरोनिल इलाज और इलाज है… विचार व्यक्त करने के लिए शब्द हैं। अगर प्रामाणिक विचार है तो इस स्पष्टीकरण में छुपाया गया है।

न्यायाधीश पिछले साल मई में रामदेव के दिए गए एक बयान का जिक्र कर रहे थे जिसमें दावा किया गया था कि कोरोनावायरस वैक्सीन की दो खुराक मिलने के बाद भी 1,000 डॉक्टरों की मौत हो गई थी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने योग गुरु के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इससे पहले फरवरी 2021 में रामदेव ने पतंजलि आयुर्वेद द्वारा एक शोध पत्र जारी किया था, जिसमें दावा किया गया था कि कोरोनोवायरस संक्रमण के इलाज के लिए कोरोनिल पहली साक्ष्य-आधारित दवा थी। भारतीय जनता पार्टी के नेता हर्षवर्धन, जो उस समय स्वास्थ्य मंत्री थे, इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ मौजूद थे। हालांकि, उसी दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने किसी का नाम लिए बिना स्पष्ट किया था कि उसने किसी पारंपरिक दवा की प्रभावशीलता की समीक्षा या प्रमाणित नहीं किया था।

ये भी पढ़ें -: शिंदे vs उद्धव: सुप्रीम कोर्ट ने एकनाथ श‍िंदे को सुनाई खरी-खरी, ऐसे पकड़ी श‍िंदे की चालाकी

गुरुवार की सुनवाई में मेडिकल एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने तर्क दिया कि रामदेव और उनकी कंपनी द्वारा जारी स्पष्टीकरण में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए कि कोरोनिल कोविड -19 के इलाज के लिए इलाज या दवा नहीं थी। बार एंड बेंच ने बताया कि सिब्बल ने कहा कि उनके पास यह दिखाने के लिए दस्तावेज हैं कि कोरोनिल को अभी भी बीमारी की दवा के रूप में विज्ञापित किया जा रहा है।

डॉक्टरों की यूनियनों का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने प्रस्तुत किया कि उनका सुझाव था कि रामदेव को यह बताना चाहिए कि कोरोनिल कोविड -19 का इलाज नहीं है और न ही इसके इलाज की दवा है। सिब्बल ने आगे कहा कि वे चाहते हैं कि रामदेव कहें कि कोरोनिल केवल एक प्रतिरक्षा बूस्टर है जिसे कोविड -19 के खिलाफ सहायक उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है और कोविड -19 के लिए टीकाकरण या एलोपैथिक उपचार को हतोत्साहित करने का उनका इरादा कभी नहीं था। रामदेव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पीवी कपूर ने कहा कि पतंजलि आयुर्वेद बेहतर स्पष्टीकरण पेश करेगा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 अगस्त की तारीख तय की है।

ये भी पढ़ें -: बाबा रामदेव बोले- मेडिकल साइंस ने 50 साल से पूरी दुनिया में मचा रखी है तबाही, हुवे ट्रोल…

ये भी पढ़ें -: संसद में वित्त मंत्री बोली- नहीं कमजोर हो रहा भारतीय रुपया, लोग करने लगे ऐसे कमेंट…


आर्टिकल को शेयर ज़रूर करें :-