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राजस्‍थान कांग्रेस में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच तेज हुआ संग्राम, जानें विस्तार से…

20221103 075553 min
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नई दिल्‍ली. कांग्रेस (Congress) के दिग्‍गज नेता रहे गुलाम नबी आजाद एक बार फिर चर्चा में हैं. हालांकि इस बार यह चर्चा राजस्‍थान में हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री (Rajasthan CM) अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की तस्‍वीरें छाई हुई हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम के बाद मुख्‍यमंत्री गहलोत की तारीफ की थी. इस घटना को लेकर सचिन पायलट और उनके समर्थकों ने पार्टी को ‘आजाद’ की याद दिलाई है. इससे प्रदेश में राजनीतिक घमासान फिर सामने आ गया है.

दरअसल कांग्रेस के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद जब राज्‍य सभा से विदा हो रहे थे तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी तारीफ की थी. उस दिन पीएम मोदी इमोशनल भी हो गए, जो कांग्रेस नेताओं को रास नहीं आया था. आखिरकार, जब आजाद ने अपनी पार्टी बनाने के लिए कांग्रेस छोड़ दी, तो कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पीएम के भावनात्मक क्षण ने यह स्पष्ट कर दिया था कि आजाद ने बहुत पहले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ रहने का फैसला कर लिया था.

तो सबको पता है कि क्या हुआ था सचिन पायलट ने अब कांग्रेस को इस घटना की याद दिलाते हुए कहा कि पिछली बार जब पीएम नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस से किसी की तारीफ की थी, तो सबको पता है कि क्या हुआ था.

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सचिन पायलट के इस बयान के बाद राज्‍य में पायलट समर्थकों ने भी यही बात दोहराई और कहा कि सीएम अशोक गहलोत पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और भाजपा के करीबी थे. भाजपा नेता चाहते थे कि सीएम के पद पर अशोक गहलोत बने रहें. इससे भाजपा को राज्‍य की सत्‍ता पाने में आसानी रहेगी. समर्थकों का दावा है कि यदि सचिन पायलट को सीएम बनाया जाता तो वे भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होते और उनके नेतृत्‍व में राज्‍य में फिर से कांग्रेस की सरकार बनती.

कांग्रेस पार्टी के अंदर अनुशासनहीनता के मुद्दे को सुलझाने की जरूरत सचिन पायलट ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस पार्टी के अंदर अनुशासनहीनता के मुद्दे को सुलझाने की जरूरत है. गहलोत के करीबी माने जाने वाले तीन कांग्रेस नेताओं को नेतृत्व के मुद्दे को सुलझाने के लिए बुलाई गई कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में शामिल नहीं होने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन दोनों को नेतृत्व के संघर्ष को सुलझाने के लिए भेजा गया था, लेकिन वे खाली हाथ वापस आ गए थे.

पायलट के करीबी सूत्रों का कहना है, ‘अगर पायलट को अनुशासनहीनता नोटिस मिलने पर बर्खास्त कर दिया गया और अदालत का सामना करना पड़ा, तो अब यह अलग क्यों होना चाहिए? जिन तीन नेताओं को कारण बताओ नोटिस दिया गया था, वे अब नए कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ तस्वीरें क्यों क्लिक कर रहे हैं?

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