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यूक्रेन बोला- भारत रूस से सस्ता तेल नहीं, हमारा खून खरीद रहा है

20220818 142631 min
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रूस और यूक्रेन में चल रहे युद्ध के बीच भारत लगातार रूस से तेल खरीद रहा है. भारत के इस कदम से अमेरिका समेत कई देश खुश नहीं हैं. इस बीच यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने रूस और भारत की ऑयल डील को लेकर तीखी टिप्पणी की है. यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने कहा कि रूस से जो भी तेल का बैरल भारत पहुंचाया जा रहा है, उसमें यूक्रेन के लोगों का खून मिला हुआ है. विदेश मंत्री ने आगे भारत को याद दिलाने के लहजे से कहा कि उन्होंने युद्ध के दौरान यूक्रेन से भारतीय छात्रों को वापस भेजने में मदद की थी.

बुधवार को एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो ने आगे कहा कि हम हमेशा कृषि उत्पादों विशेष रूप से सरसों के तेल में बहुत प्रतिबद्ध सप्लायर और व्यापारी थे. उन्होंने आगे कहा कि हमें भारत की ओर से यूक्रेन को मजबूत समर्थन की उम्मीद थी. विदेश मंत्री ने कहा कि यूक्रेन भारत का हमेशा भरोसेमंद साथी रहा है लेकिन रूस से तेल खरीदकर भारत यूक्रेन के लोगों का खून खरीद रहा है. यूक्रेन के विदेश मंत्री ने कहा कि जब भारत रूस से डिस्काउंट पर क्रूड ऑयल खरीद रहा है तो उन्हें समझना चाहिए कि जो डिस्काउंट उन्हें मिल रहा है, उसकी कीमत यूक्रेन के लोगों के खून से चुकाई जाएगी. विदेश मंत्री ने कहा कि यूक्रेन और भारत दोनों में काफी आवश्यक समानताएं हैं और दोनों देशों को एक दूसरे के लिए खड़े होना चाहिए.

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यूक्रेन के विदेश मंत्री ने आगे कहा कि भारत का रूस से तेल खरीदने का फैसला चौंकाने वाला बिल्कुल भी नहीं है लेकिन इससे ये साफ जरूर है कि यूक्रेन से युद्ध के जरिए रूस को अपने तेल बाजार से पैसे बनाने का मौका मिल गया है. भारत और रूस के ऑयल डील पर उन्होंने आगे कहा कि अभी तक के मानव इतिहास में हर विवाद, हर युद्ध में एक पक्ष ने नुकसान उठाया तो एक ने पैसा बनाया. वहीं विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और रूस के गहराते संबंधों का असर भविष्य में भारत के म्यांमार को लेकर पक्ष पर भी पड़ेगा.

भारत का तेल खरीदने को लेकर रुख साफ अमेरिका लगातार भारत पर रूस से तेल न खरीदने का दबाव बना रहा है. हालांकि, रूस से छूट पर तेल खरीदने को लेकर भारत का रुख स्पष्ट है कि जिस देश से अच्छी डील मिलेगी, वह अपने नागरिकों के हित को देखते हुए उसी से सौदा करेगा. हाल ही में थाईलैंड पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर एक बार फिर साफ किया कि रूस और भारत के बीच तेल की खरीदारी जारी रहेगी. विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के रूस से तेल खरीदने के फैसले की अमेरिका या कोई और देश बेशक सराहना न करें लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है क्योंकि भारत अपने रुख को लेकर बचाव की मुद्रा में नहीं है.

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विदेश मंत्री ने साफ करते हुए कहा कि जिस डील से भारतीय लोगों को फायदा पहुंचेगा, भारत उसी डील को करेगा. विदेश मंत्री ने कहा कि हर देश अपने नागरिकों के हितों को देखता है. विदेश मंत्री ने कहा था कि भारत एक ऐसा देश है, जहां प्रति व्यक्ति की इनकम 2 हजार डॉलर से भी कम है और देश के लोग तेल या गैस की ज्यादा महंगाई का बोझ नहीं उठा सकते हैं. ऐसे में उनका भी ये कर्तव्य है कि भारत के लोगों के हितों को देखते हुए ऐसे देशों से डील की जाए जहां से सबसे अच्छा ऑफर मिले.

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, जून महीने में रूस सऊदी अरब को पछाड़ते हुए भारत को तेल बेचने वाला दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया. हालांकि, इराक अभी तक भारत को तेल बेचने वाला सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है. भारत सबसे ज्यादा तेल इराक से ही निर्यात करता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन कर चुके हैं भारत को आगाह रूस और भारत की ऑयल डील से सबसे ज्यादा परेशानी अमेरिका को हो रही है. इसी वजह से कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि भारत के लिए रूस से तेल की खरीद को बढ़ाना हित में नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि वे ऊर्जा आयात में अधिक विविधता लाने में भारत की सहायता को भी तैयार हैं.

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