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मोहम्मद जुबैर की पुलिस रिमांड पर हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुवे मांगा जवाब

20220701 182921 min
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ऑल्ट न्यूज़ के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर के 4 दिन के पुलिस रिमांड को चुनौती देने वाली अर्जी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है. जुबैर ने पुलिस रिमांड को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जिस पर आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई है. मामला 2018 का है, दिल्ली पुलिस ने मामले में अभी करवाई की है. जुबैर के वकील ग्रोवर ने पुलिस रिमांड का विरोध किया और मामले को कम महत्व वाला बताया.

दिल्ली पुलिस द्वारा जुबैर को बेंगलुरू ले जाने पर भी सवाल उठाया गया, उन्होंने कहा पब्लिक का पैसा बेकार करने का क्या मतलब है, जबकि यह इतना महत्वपूर्ण मामला नहीं है. ग्रोवर ने कोर्ट से कहा कि हम पुलिस रिमांड का विरोध करते हैं. बता दें कि दिल्ली पुलिस ने 28 जून को मोहम्मद जुबैर को अरेस्ट किया था, इसके बाद कोर्ट ने चार दिन की पुलिस रिमांड पर जेल भेज दिया था, जो कल समाप्त हो रही है.

ऑल्ट न्यूज़ के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर के 4 दिन के पुलिस रिमांड को चुनौती देने वाली अर्जी पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जारी नोटिस कर दिल्ली पुलिस से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है. दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा इस मामले में दिल्ली पुलिस जांच कर रही है इस विषय पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है, जैसे जांच आगे बढ़ेगी मामले से जुड़ी जानकारी साझा की जाएगी.

ग्रोवर- असाधारण तमाशा बनाया जा रहा है. आरोपी को एफआईआर की कॉपी, गिरफ्तारी का नोटिस या फोन जब्त करने का नोटिस तक दिल्ली पुलिस ने नहीं दिया था लेकिन उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं कोर्ट द्वारा 2018 में किए गए ट्वीट पर एफआईआर पर रोक लगाई गई है.
एसजी तुषार मेहता: हम इस मामले मे कोर्ट मे जवाब दाखिल करेंगे. एफआईआर का मतलब किसी भी मामले मे केवल कार्यवाही शुरू करना है. जांच अधिकारी को कई अन्य दस्तावेज या सामग्री या सबूत मिल सकते हैं, जो यह दिखा सकते हैं कि कोई अपराध किया गया है जो प्राथमिकी में नहीं हो सकता है.

ग्रोवर – सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए अर्नेश कुमार के फैसले का हवाला देते हुए कहा इस केस में अर्नेश कुमार के फैसले का पालन नहीं किया गया है और अगर कोर्ट इस मामले में दखल नहीं देगा तो लोगों के अधिकारों के साथ बड़ा खिलवाड़ होगा.
ग्रोवर- मुझे 27 जून की शाम करीब 6:45 बजे गिरफ्तार किया गया. पुलिस के पास 24 घंटे में मुझे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने का अधिकार है, लेकिन उसी रात मुझे 10 बजे ड्यूटी मजिस्ट्रेट के घर ले जाया जाता है. 2018 के एक ट्वीट पर इस तरह की गिरफ्तारी की गई मुझे बिना किसी नोटिस या रिमांड पेपर के 1 दिन का रिमांड दिया गया. ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही मुझे एफआईआर मिली. मजबूरन मुझे ट्विटर पर सर्च करना पड़ा कि मुझ पर क्या आरोप है.
ग्रोवर- सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए अर्नेश कुमार के फैसले का हवाला देते हुए कहा इस केस में अर्नेश कुमार के फैसले का पालन नहीं किया गया है और अगर कोर्ट इस मामले में दखल नहीं देगा तो लोगों के अधिकारों के साथ बड़ा खिलवाड़ होगा.

2018 के एक ट्वीट पर इस तरह की गिरफ्तारी की गई मुझे बिना किसी नोटिस या रिमांड पेपर के 1 दिन का रिमांड दिया गया. ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही मुझे एफआईआर मिली है. मजबूरन मुझे ट्विटर पर सर्च करना पड़ा कि मुझ पर क्या आरोप है.
ग्रोवर- मुझे 27 जून की शाम करीब 6:45 बजे गिरफ्तार किया गया. पुलिस के पास 24 घंटे में मुझे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने का अधिकार है लेकिन उसी रात मुझे 10 बजे ड्यूटी मजिस्ट्रेट के घर ले जाया जाता है.

आरोपी को एफआईआर की कॉपी, गिरफ्तारी का नोटिस या फोन जब्त करने का नोटिस तक दिल्ली पुलिस ने नहीं दिया था लेकिन उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. ग्रोवर- वहीं कोर्ट द्वारा 2018 में किए गए ट्वीट पर एफआईआर पर रोक लगाई गई है.
ग्रोवर- यह लिमिटेड मामला नहीं है, यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है. क्या इस मामले में रिमांड की जरूरत थी.. क्या मेरा पासपोर्ट, मेरा लैपटॉप लिया जा सकता है? ग्रोवर – यह एक पैटर्न बन गया है. एक छोटे से मामले में गिरफ्तारी. क्या है ट्वीट?

जस्टिस नरूला- चूंकि यह मामला कल निचली अदालत मे आ रहा है (चूंकि पुलिस कस्टडी कल समाप्त हो रहा है), जब यह कल ही आना है तो आप उचित अदालत मे अपनी बात क्यों नहीं रखते.
भारत सरकार के सॉलिशिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि वह दिल्ली पुलिस के लिए पेश हो रहे हैं, केंद्र के लिए नहीं. ग्रोवर ने कहा की इतने छोटे मामले मे एसजी का शामिल होना मामले को बताता है कि इसके पीछे उद्देश्य क्या है?

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