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मोराबी पुल हाद’साः मरम्मत से जुड़े लोगों पर IPC की इन धाराओं में एक्शन…

20221101 125846 min
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गुजरात के मोरबी में हुए दर्दनाक हादसे में 141 लोगों की मौत हो गई. इस हादसे के बाद चुनावी राज्य की सियासत भी गर्मा गई. पुलिस ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए पुल की मरम्मत से जुड़े 9 लोगों को गिरफ्तार किया है. जिनमें मरम्मत करने वाली कंपनी का मैनेजर, ठेकेदार और टिकट क्लर्क भी शामिल है. आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 114, 304 और 308 के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है. आइए जानते हैं कि क्या कहती हैं आईपीसी की ये धाराएं? और इन धाराओं के तहत क्या है सजा का प्रावधान?

आईपीसी की धारा 114 (Indian Penal Code Section 114) भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 114 (Section 114) के मुताबिक अपराध (Offence) किए जाते समय दुष्प्रेरक की उपस्थिति (Presence of an abettor) एक अपराध माना गया है और इसके लिए IPC की धारा 114 में दण्ड का प्रावधान (Provision of punishment) किया गया है.

सजा का प्रावधान (Punishment provision) धारा 114 के अनुसार, जब कभी कोई व्यक्ति जो अनुपस्थित होने पर दुष्प्रेरक के नाते दण्डनीय (Punishable as abettor) होता. उस समय उपस्थित हो जब वह कार्य या अपराध किया जाए जिसके लिए वह दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप दण्डनीय होता, तब यह समझा जाएगा कि उसने ऐसा कार्य या अपराध किया है.

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आईपीसी की धारा 304 (Indian Penal Code Section 304) जो कोई ऐसा आपराधिक मानव वध (Criminal homicide) करेगा, जो हत्या की कोटि में नहीं आता है, यदि वह कार्य जिसके द्वारा मृत्यु कारित की गई है, मृत्यु या ऐसी शारीरिक क्षति, जिससे मृत्यु होना सम्भाव्य है, कारित करने के आशय से किया जाए, तो वह इस धारा के तहत आरोपी माना जाएगा. यानी यह गैर इरादतन हत्या का मामला माना जाएगा.

सजा का प्रावधान (Punishment provision) ऐसे आरोपी को दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास (Life imprisonment) या दोनों में से किसी भांति के कारावास से से दण्डित किया जाएगा, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी. साथ ही दोषी पर जुर्माना (Fine) भी लगाया जाएगा.

आईपीसी की धारा 308 (Indian Penal Code Section 308) जानबूझकर ऐसा कार्य करना, जिसमें आप जानते हैं कि सामने वाले व्यक्ति को चोट लग सकती है या नुकसान पहुंच सकता है. लेकिन आपका इरादा उसको नुकसान पहुंचाने का नहीं है. पर वो घायल हो जाता है, तो यह मामला आईपीसी की धारा 308 के तहत आएगा.

सजा का प्रावधान (Punishment provision) इस धारा के तहत दोषी पाए जाने वाले शख्स को एक अवधि के लिए कारावास की सजा (Punished with imprisonment) हो सकती है. जिसे तीन साल तक बढ़ाया भी जा सकता है. अगर वह दोषी फिर भी ऐसा कुछ दोबारा करने की कोशिश करता है, तब ऐसे मामलों में उसकी सज़ा के तीन साल और बढ़ाए जा सकते हैं. अगर उस घायल व्यक्ति की मौत हो जाती है तो यही मामला आईपीसी की धारा 304 में तरमीम होगा. जिसमें दस साल की सजा का प्रावधान है.

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