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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से नाबालिग को शादी की अनुमति, HC ने मांगा केन्द्र और राज्य से जवाब

20220724 075842 min
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मुस्लिम समुदाय की 18 साल से कम आयु की लड़कियों को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड शादी की अनुमति देता है. इसे चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और केन्द्र सरकार से जवाब तलब किया है. याचिका में इस तरह के प्रावधान को गैर-कानूनी घोषित करने की अपील की गई है.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के इस प्रावधान को चुनौती देने के लिए यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने एक जनहित याचिका दायर की थी. याचिका में कोर्ट को बताया गया कि 18 वर्ष से कम उम्र में शादी करने के बावजूद नव विवाहित जोड़ों को मान्यता दी जा रही है, साथ ही उन्हें पुलिस सुरक्षा देने का आदेश भी है, क्योंकि ऐसे विवाहों को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अनुमति देता है.

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मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने की सुनवाई मामले की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आर. सी. खुल्बे की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं. इसके बाद खंडपीठ ने केन्द्र सरकार और राज्य सरकार को इस मामले में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.

याचिका में कहा गया है कि 18 साल से कम उम्र में शादी होने, नाबालिग युवती से शारीरिक संबंध बनाने व कम उम्र में बच्चे पैदा करने से लड़कियों के साथ-साथ नवजात बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है. वहीं एक तरफ सरकार पॉक्सो जैसे कानून लाती है, तो दूसरी ओर 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों को शादी की अनुमति देना, इस अधिनियम का उल्लंघन है.

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शादी की न्यूनतम उम्र 21 करने की मांग याचिका में 18 साल से कम उम्र की लड़की की शादी को अमान्य घोषित करने की मांग की गई है. वहीं शादी के बाद उसके साथ होने वाले शारीरिक संबंध को दुराचार की श्रेणी में रखकर आरोपी के खिलाफ पॉक्सो के तहत कार्रवाई करने की बात कही गई है.

याचिका में लड़कियों की विवाह की उम्र 18 से बढ़कर 21 किए जाने वाले विधेयक को जल्द पास करने और जब तक यह विधेयक पास नहीं होता तब तक 18 से कम उम्र में किसी जाति, धर्म में हो रही शादियों को गैर कानूनी घोषित करने का आग्रह किया गया है.

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