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मुरादाबाद में सामूहिक नमाज का मामला निकला झूठा, जांच के बाद मुकदमा ख़ारिज

20220830 171504 min
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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक पक्ष की ओर से बिना अनुमति सामूहिक नमाज पढ़ने का मुकदमा दर्ज कराया गया था। मंगलवार को मुरादाबाद पुलिस ने जांच के बाद इसको फर्जी पाया है। पुलिस ने मुकदमे को एक्सपंज (खारिज) कर दिया है। बता दें कि कुछ दिन पहले 16 नामजद और 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था।

छजलैट थाना क्षेत्र के दूल्हेपुर मामला है। एक पक्ष के लोगों ने वाहिद और मुस्तकीम के घर नमाज पढ़ी थी। इस पर आपत्ति जताते हुए दूसरे पक्ष को लोगों ने पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था। शिकायत देने वालों में चंद्रपाल सिंह, रामपाल सिंह, बाबूराम, रामचरन सिंह, नन्हें सिंह, मुरारी सिंह शामिल थे। वहीं, अब मुरादाबाद पुलिस ने कहा कि ग्राम दूल्हेपुर में चंद्रपाल आदि की ओर से सामूहिक नमाज पढ़ने को लेकर पीएस छजलैट में मुकदमा दर्ज कराया गया था, जोकि जांच में सही नहीं पाया गया है, इसलिए पुलिस ने मुकदमे को एक्सपंज कर दिया है।

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मुरादाबाद के थाना छजलैट के गांव दूल्हेपुर में बिना मस्जिद-मदरसे के एक घर में सामूहिक नमाज पढ़ने का एक वीडियो सामने आया है। मुस्लिम लोगों ने वीडियो को स्वीकार किया है, लेकिन वीडियो को 3 जून की नमाज का बताया था। इसके बाद कोई नमाज सामूहिक रूप से गांव में नहीं हुई। वहीं हिंदू पक्ष का कहना है कि नमाज का ये वीडियो 3 जून का है, लेकिन अभी भी सामूहिक रूप से नमाज जारी है। इसीलिए पुलिस में शिकायत की गई।

गांव में रहने वाले हिंदू पक्ष के लोगों का कहना है कि गांव में कोई मस्जिद या मदरसा नहीं है और न ही गांव में कोई मंदिर है। हम लोग एक किलोमीटर दूर दूसरे गांव में पूजा करने जाते हैं।

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हिंदू पक्ष के लोगों का आरोप है कि यहां के मुस्लिम लोग इकट्ठा होकर नई परंपरा के तहत घरों में सामूहिक नमाज पढ़ रहे हैं, जो सही नहीं है। हमारा भी गांव में कोई मंदिर नहीं है लिहाजा हम पास के गांव में पूजा करने और जल चढ़ाने जाते हैं। हम कोई नई परंपरा डालना नहीं चाहते।

वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष के लोग भी इकट्ठा थे, उनसे बात करने पर उन्होंने बताया कि नमाज का यह वीडियो एकदम सही है। वीडियो 3 जून का है। हम लोग गांव में सन 1980 से सामूहिक रूप से घर में नमाज पढ़ते चले आ रहे है, लेकिन अब 3 जून 2022 से नमाज पर एतराज होने के बाद से हम सामूहिक नमाज नहीं पढ़ रहे हैं। पुलिस गश्त करती है और हमारे घरों में झांकती है। कोई नमाज तो नहीं पढ़ी जा रही।

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