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मार्कंडेय काटजू के बयान से छिड़ गई बहस, बोले- 1947 से पहले उर्दू पढ़े-लिखे लोगों की भाषा थी

20221113 160803 min
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भाषा को लेकर समय-समय पर विवाद होता रहता है। कभी हिंदी को बढ़ावा देने की मांग होती है तो कभी उर्दू को हासिये पर डाल देने का आरोप लगाया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू (Markandey Katju) के एक ट्वीट पर इस वक्त विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व जज ने उर्दू भाषा के नरसंहार का आरोप लगाते हुए ट्वीट किया तो सोशल मीडिया पर लोग भी इस पर टिप्पणी करने लगे।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू (Former Supreme Court Judge Markandey Katju) ने ट्वीट किया, “1947 से पहले शहरी भारत के बड़े हिस्से में उर्दू शिक्षित वर्ग, हिंदू, मुस्लिम या सिख की भाषा हुआ करती थी। बाद में, कुछ निहित स्वार्थों ने झूठा प्रचार किया कि यह केवल मुसलमानों की एक विदेशी भाषा थी, जिसके परिणामस्वरूप उर्दू का लगभग नरसंहार हुआ। एक यूजर ने लिखा कि जिस भाषा की बात कर रहे हैं वो हिन्दुस्तानी है। इस पर उन्होंने लिखा कि 1947 से पहले शहरी भारत के बड़े हिस्से में हिंदुस्तानी (खड़ीबोली) आम आदमी की भाषा थी। उर्दू शिक्षित वर्ग की भाषा थी।

मार्केंडेय काटजू के इस ट्वीट पर तमाम लोग टिप्पणियां कर रहे हैं। @LotusBharat नाम यूजर ने लिखा कि संस्कृत और प्राकृत भाषा के नरसंहार के बारे में क्या राय है काटजू सर?, जो उर्दू के यहां आने से बहुत पहले भारत में थीं? हममें से कितने भारतीय इसे बोल या लिख सकते हैं? हमसे में कई लोग उर्दू के लिए बॉलीवुड को धन्यवाद देते हैं। आप तो उर्दू के एक्सपर्ट हैं शायद इसीलिए आपने इसे नोटिस किया।

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@harbirsingh64 यूजर ने लिखा कि यह पंजाब में एक थोपी गई भाषा थी, जिसे उर्दू लिपि सहित देशी पंजाबी भाषा कह बढ़ावा दिया जा रहा था। @anikghosh यूजर ने लिखा कि तमिल और संस्कृत मूल रूप से शिक्षित वर्ग की भाषा थी। उर्दू बहुत बाद में बारहवीं शताब्दी में आई। मुझे लगता है कि आप यह जानने के लिए पर्याप्त शिक्षित हैं कि भारत एक पुरानी सभ्यता है !

@SiriCapri07 यूजर ने लिखा कि उर्दू का “नरसंहार”? मुझे आशा है कि आप उस शब्द का अर्थ जानते होंगे। 1947 से बहुत पहले, उर्दू + फ़ारसी को देश के कई हिस्सों में जबरदस्ती थोपा गया था, क्योंकि प्रशासन फ़ारसी में ही था। उर्दूकृत हैदराबाद राज्य में हमारी मूल भाषाओं तेलुगू/कन्नड़/मराठी के शिक्षण पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। @ICMallikarjuna यूजर ने लिखा कि बॉस, क्या आपकी मेमोरी सिर्फ 1500 एड तक सीमित है? उस से पहले संस्कृत बोली और लिखी जाने वाली आधिकारिक थी, फिर मुगलों ने आक्रमण किया!

बता दें कि मार्कंडेय काटजू के “उर्दू के नरसंहार” के ट्वीट पर सोशल मीडिया पर लोग इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग उर्दू के अलावा संस्कृति और प्राकृत भाषा का बढ़ावा ना देने की बात कही तो कुछ ने कहा कि भारत की प्राचीन भाषा संस्कृति थी ना कि उर्दू! कुछ लोगों का कहना था कि संस्कृति उच्च शिक्षित वर्ग के लोगों की भाषा थी और विभिन्न भागों में आम लोगों में लिखी जाने वाली कई और बोलने वाली कई भाषाएँ थीं।

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