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नाइजीरिया को पीछे छोड़ भारत गरीबी में बना नंबर वन, देश में 18.92 करोड़ लोग कुपोषित

20220725 185050 min
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Poverty Capital: जब कभी गरीब देशों की बात उठती थी दक्षिण अफ्रीका महाद्वीप के देश खासकर सोमालिया और नाइजीरिया आदि की चर्चा होती थी. लेकिन पिछले कुछ सालों में भारत की इतनी दुर्दशा हुई है कि उसने उन देशों को भी पीछे छोड़ दिया है. अभी तक माना यह जाता था कि नाइजीरिया में दुनिया के सबसे ज्यादा गरीब रहते हैं लेकिन यह कलंक अब भारत के मत्थे मढ़ दिया गया है. भारत में अब दुनिया के सबसे ज्यादा गरीब लोग रहते हैं.

“बिजनेस इनसाइडर अफ्रीका” में छपी खबर के अनुसार अब तक अफ्रीकी देश नाइजीरिया को दुनिया का “पॉवर्टी कैपिटल” ( गरीबों की राजधानी ) माना जाता था. वहां सबसे ज्यादा गरीबों की संख्या थी. पर “वर्ल्ड पॉवर्टी क्लॉक” के नए आंकड़ों के अनुसार भारत ने अब नाइजीरिया को पीछे छोड़ दिया है. नए आंकड़ों के अनुसार भारत में 2022 में संयुक्त राष्ट्र की अनुमानित गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 8.3 करोड़ लोग हैं. नाइजीरिया में वर्तमान में 33 प्रतिशत जनसंख्या अत्यधिक गरीबी में रहती है. नाइजीरिया में 8,30,05,482 लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं जबकि भारत में यह संख्या 8,30,68,597 है. आबादी के प्रतिशत के हिसाब से देखें तो दुनिया की गरीब जनता का सबसे ज्यादा हिस्सा दोनों देशों में बराबर 12.2 प्रतिशत है लेकिन चूंकि भारत की आबादी ज्यादा है इसलिए सबसे ज्यादा गरीब भारत में हैं. कोरोना काल के बाद इन आंकड़ों के और ज्यादा विभत्स होने की आशंका है.

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साल 2020 की “स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड” की रिपोर्ट के अनुसार भारत में उस समय 18.92 करोड़ लोग कुपोषित थे. एक खबर के अनुसार भारत में हर साल 25 लाख लोग भुखमरी के कारण अपनी जान गंवा बैठते हैं. साल 2021 में ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट में भारत के 27.5 अंक हैं जो कि बहुत खराब स्थिति को दर्शाते हैं.

सेंटर फॉर साइंस एंड इन्वायरमेंट ( सीएससई) और डाउन टू अर्थ पत्रिका द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार 10 में से सात भारतीय पौष्टिक आहार का खर्च नहीं उठा पाते. पिछले एक साल में उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक ( सीएफपीआई) मुद्रास्फीति-या खान-पान के सामानों के दामों में 327 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखी गई है. जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) जिसमें सीएफपीआई भी शामिल है, में 84 फीसदी की वृद्धि देखी गई है. बाजार के जानकारों का मानना है कि यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है हम विश्व गुरू होने का सपना भले देख रहे हैं लेकिन सच तो ये है कि भारत की हालत बहुत खराब है. भारत हर मामले में बहुत ही पिछड़ा हुआ है. 2021 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 101वें स्थान पर था. संयुक्त राष्ट्र मानव विकास सूचकांक में 131वें तो विश्व खुशहाली सूचकांक (2022) में 136वें स्थान पर. वैश्विक लैंगिक अंतर सूचकांक में 135वें तो आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक में 121 वें स्थान पर.

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भारत युवाओं का देश है. विश्व में युवाओं की सबसे ज्यादा आबादी की शेखी बघारते हम नहीं थकते. लेकिन वैश्विक युवा विकास सूचकांक में हम 122वें नंबर पर हैं. सतत विकास सूचकांक में 120वें तो पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक में 180वें स्थान पर. किसी मामले में हम विश्व गुरू नहीं हैं. यही वजह है कि देश छोड़कर जाने वाले अमीर भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. देशभक्ति का दावा करने वाली मोदी सरकार में यह संख्या कुछ ज्यादा ही तेजी से बढ़ी है.

इसे बिडंबना ही कहेंगे कि जहां देश में गरीबों की संख्या बढ़ रही है वहीं कुछ उद्योगपतियों की संपत्ति दिन दूनी रात चौगुनी के हिसाब से बढ़ रही है. नई खबर के अनुसार भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी बिल गेट्स को पछाड़कर दुनिया के चौथे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं. ब्लूमबर्ग बिलेनियम इंडेक्स के अनुसार अडानी की कुल संपत्ति बढ़कर 1125 बिलीयन डॉलर से भी ज्यादा हो गई है जो माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प के सह संस्थापक की कुल संपत्ति से 230 मिलियन डॉलर अधिक है. अडानी की संपत्ति में इस साल 36 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है जो किसी और उद्योगपति की तुलना में अधिक है. जहां तक बिल गेट्स की बात है उनकी संपत्ति परोपकार के कार्यों में लगाने और तकनीकी शेयरों की बिक्री में तेजी आने के कारण सिकुड़ गई है.

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