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जितेंद्र त्यागी ने किया सरेंडर, बोले- सनातन धर्म अपनाकर लड़ाई में अकेला हो गया हूं

20220902 224737 min
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हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में अमर्यादित भाषण देने के मामले में तीन महीने की अंतरिम जमानत अवधि पूरी होने के बाद शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी ने शुक्रवार को सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने जितेंद्र नारायण त्यागी को रोशनाबाद स्थित जेल भेजा है। जिला जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से त्यागी जेल में अलग बैरक में रहेंगे।

उत्तरी हरिद्वार के वेद निकेतन में 17 से 19 दिसंबर 2021 को धर्मसंसद हुई थी। इसमें कई प्रमुख संतों के अलावा जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी भी शामिल हुए। त्यागी ने धर्म विशेष के खिलाफ विवादित भाषण दिया था, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने 27 दिसंबर को शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने 13 जनवरी 2022 को त्यागी को नारसन बॉर्डर से गिरफ्तार किया था। बाद कोर्ट में पेश कर जेल भेजाा था।

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सुप्रीम कोर्ट ने जितेंद्र त्यागी को मेडिकल ग्राउंड पर 17 मई को तीन महीने की अंतरिम जमानत दी थी। उनके वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट को बताया था कि त्यागी हृदय रोग समेत कई बीमारियों से पीड़ित हैं। अंतरिम जमानत की अवधि पूरी होने पर सुप्रीम कोर्ट ने 29 अगस्त को त्यागी को दो सितंबर तक हरिद्वार जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जितेंद्र नारायण त्यागी ने शुक्रवार को सीजेएम की अदालत में आत्मसमर्पण किया।

जितेंद्र नारायण त्यागी ने अदालत में आत्मसमर्पण करने से पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष एवं मां मनसा देवी ट्रस्ट अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी से मुलाकात की। त्यागी के श्री निरंजनी अखाड़ा पहुंचने पर कई संत भी वहां पहुंचे।

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त्यागी ने कहा कि जब से सनातन धर्म अपनाया है कुछ लोग उनके पीछे पड़ गए हैं। इस लड़ाई में अकेले हो गए हैं। इसका कोई अफसोस नहीं है। काफी सोच समझकर ही सनातन धर्म अपनाया है। त्यागी ने आरोप लगाया कि ज्वालापुर के कुछ लोगों ने रोशनाबाद जेल के अंदर उनको मारने की साजिश बनाई थी, लेकिन जेल प्रशासन की सतर्कता और सख्ती से साजिश कामयाब नहीं हुई।

श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि जितेंद्र नारायण त्यागी के जेल जाने से संत आहत हैं। कहा कि आखिर हिंदू धर्म अपनाकर त्यागी को क्या मिला। सभी संतों को त्यागी का साथ देना चाहिए था, लेकिन सभी ने नहीं दिया। कई संतों ने उनको बीच में छोड़ दिया। शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि जितेंद्र नारायण त्यागी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। इस लड़ाई में त्यागी के साथ हरदम खड़े रहेंगे।

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