Politics

अग्निपथ में जाति और धर्म के कॉलम पर विवाद, राजनाथ सिंह ने कही ये बात…

20220719 163308 min
आर्टिकल को शेयर ज़रूर करें :-

भारतीय सेना में अग्निपथ योजना के तहत होने वाली भर्तियों में आवेदक से जाति प्रमाण पत्र भी मांगा गया है. इसे लेकर अब विवाद हो गया है. विपक्ष के लोग सवाल पूछ रहे हैं कि सेना में जाति आधारित कोई आरक्षण नहीं है तो फिर आवेदकों से जाति प्रमाण पत्र क्यों मांगा जा रहा है? बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने भी इस पर सवाल उठाया है. वरुण गांधी ने ट्वीट कर कहा है, ”सेना में किसी भी तरह का कोई आरक्षण नहीं है पर अग्निपथ की भर्तियों में जाति प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है. क्या अब हम जाति देख कर किसी की राष्ट्रभक्ति तय करेंगे?

सेना की स्थापित परंपराओं को बदलने से हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर जो प्रभाव पड़ेगा उसके बारे में सरकार को सोचना चाहिए.” वरुण गांधी के अलावा आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने जाति प्रमाण पत्र मांगने पर आपत्ति जताते हुए मोदी सरकार को निशाने पर लिया है. संजय सिंह ट्वीट कर कहा है, ”मोदी सरकार का घटिया चेहरा देश के सामने आ चुका है. क्या मोदी जी दलितों/पिछड़ों/आदिवासियों को सेना भर्ती के क़ाबिल नही मानते? भारत के इतिहास में पहली बार ‘सेना भर्ती’ में जाति पूछी जा रही है. मोदी जी आपको ‘अग्निवीर’ बनाना है या ‘जातिवीर’?

ये भी पढ़ें -: मोहम्मद जुबैर को सुप्रीम कोर्ट से राहत, यूपी में दर्ज सभी FIR में कार्रवाई नहीं करने के दिए आदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मंगलवार को समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि अग्निपथ में जाति को लेकर जो बात कही जा रही है, वह अफ़वाह है. राजनाथ सिंह ने कहा, ”यह महज़ अफ़वाह है. यह आज़ादी से पहले की ही व्यवस्था है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. पुरानी व्यवस्था ही जारी है.” संजय सिंह के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख आमित मालवीय ने लिखा है, ”2013 में सेना ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दाखिल कर स्पष्ट किया था कि जाति, क्षेत्र और धर्म आधारित भर्तियां नहीं होती हैं. हालांकि ख़ास इलाक़े के लोग रेजिमेंट में ज़रूर आते हैं और यह प्रशासनिक सुविधा के कारण होता है.”

आरजेडी नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी जाति प्रमाण पत्र मांगने पर सरकार की आलोचना की है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”आजादी के बाद 75 वर्षों तक सेना में ठेके पर “अग्निपथ” व्यवस्था लागू नहीं थी. सेना में भर्ती होने के बाद 75% सैनिकों की छँटनी नहीं होती थी लेकिन संघ की कट्टर जातिवादी सरकार अब जाति/धर्म देखकर 75% सैनिकों की छँटनी करेगी. सेना में जब आरक्षण है ही नहीं तो जाति प्रमाणपत्र की क्या ज़रूरत?”

ये भी पढ़ें -: नूपुर शर्मा गिरफ़्तारी से बचने के लिए पहुंची सुप्रीम कोर्ट, दी ये दलील…

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, इस विवाद पर भारतीय सेना ने कहा है, ”अभ्यर्थियों से जाति और धर्म सर्टिफिकेट ज़रूरत पड़ने पर हमेशा से मांगा जाता रहा है. अग्निवीर भर्ती स्कीम में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है. ट्रेनिंग और युद्ध के दौरान मौत होने पर धार्मिक रीति रिवाज के हिसाब से जवानों की अंत्येष्टि होती है. इसलिए धर्म का सर्टफिकेट मांगा जाता है.”

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी पूरे विवाद पर अपना पक्ष रखा है. मंगलवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर संबित पात्रा ने कहा, ”इस बात का दुख है कि सांसद सच से परिचित नहीं हैं. भारत की सेना धर्म और जाति के आधार पर भर्तियां नहीं करती है. जाति और धर्म से कहीं ऊपर भारत की सेना है. जाति और धर्म के कॉलम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सेना ने जवाब दिया था. 2013 में सेना हलफनामा दायर कहा था कि जाति और धर्म की भर्तियों में कोई भूमिका नहीं है. लेकिन यह प्रशासनिक और संचलान के लिए ज़रूरत है. 2013 में तो मोदी जी की सरकार भी नहीं थी. तब मनमोहन सिंह की सरकार थी.”

संबित पात्रा ने कहा, ”धर्म का कॉलम इसलिए है कि दुर्भाग्य से कोई जवान शहीद होता है तो उसकी अंत्येष्टि कैसे होगी, उसमें धर्म की ज़रूरत पड़ती है. इस सच को जानते हुए भी सेना पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है. सेना में भर्ती की प्रक्रिया कोई नई नहीं है. आज़ादी के बाद भी पुरानी प्रक्रिया को ही मंज़ूरी दी गई थी. मोदी सरकार ने इस प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया है. कुछ राजनेता अफ़वाह फैलाना चाहते हैं. जाति के आधार पर ये देश को बाँटना चाहते हैं.

ये भी पढ़ें -: क्या बंगाल के गवर्नर होंगे मुख्तार अब्बास नकवी? BJP सांसद ने दी बधाई, फिर डिलीट किया ट्वीट

ये भी पढ़ें -: सावरकर 11 जुलाई 1911 को अंडमान पहुंचे थे और 29 अगस्त 1911 को ही अपना पहला माफीनामा…


आर्टिकल को शेयर ज़रूर करें :-